Coronavirus Lockdown: जानें रेड, आरेंज और ग्रीन जोन क्या है ?, लॉकडाउन में आपको मिलेगी कितनी राहत

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Apr 2020 12:21 PM

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Patna: A policeman baton charges at a rickshaw puller for allegedly flouting lockdown norms in the wake of coronavirus pandemic, in Patna, Wednesday, April 15, 2020. (PTI Photo) (PTI15-04-2020_000249B)

coronavirus lockdown: देश को अब रेड( Red Zone), ऑरेंज (orange Zone) और ग्रीन ( green Zone) तीन जोन में बांटने का काम किया जाएगा. देश के कई राज्यों को इन तीन जोनों में बांटने का काम अलग-अलग राज्यों में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या को ध्‍यान में रखते हुए किया जाएगा.

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coronavirus lockdown : देश के कई हिस्सों को लॉकडाउन से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्लान तैयार किया है. प्लान के तहत देश को अब रेड ( Red Zone), ऑरेंज (orange Zone) और ग्रीन ( green Zone) तीन जोन में बांटने का काम किया जाएगा. देश के कई राज्यों को इन तीन जोनों में बांटने का काम अलग-अलग राज्यों में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या को ध्‍यान में रखते हुए किया जाएगा. लॉकडाउन के दौरान लोगों को हा रही परेशानी से राहत देने के लिए गृहमंत्रालय की गाइडलाइंस के साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के प्रभाव के आधार पर राज्यों को अपने जिले को इन तीन जोन में निर्धारित करने का निर्देश दिया है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सर्वाधिक संक्रमण वाले 170 जिलों को रेड जोन जिले, सीमित संक्रमण वाले 207 जिलों को आरेंज जोन (संभावित हॉटस्पाट जिले) और संक्रमण मुक्त शेष जिलों को ‘ग्रीन जोन’ में बांटते हुए राज्यों से कहा है कि अगर उनकी दृष्टि में ऐसे कोई जिले हैं जो हॉटस्पॉट के मानकों को पूरा करते हों, तो वे इन्हें इस श्रेणी में शामिल कर सकते हैं. इसका मतलब है कि देश में कुल 736 जिलों में 359 जिले पूरी तरह से कोराना से मुक्त हैं और ग्रीन जोन में हैं.

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रेड और आरेंज जोन में कोरोना वायरस का कंटेनमेंट प्लान लागू होगा और वहां किसी तरह की आर्थिक गतिविधि की इजाजत नहीं होगी. ग्रीन जोन में शारीरिक दूरी और मास्क की अनिवार्यता के साथ आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों की इजाजत प्रदान की जाएगी. यहां ध्‍यान देने योग्य बात यह है कि 28 दिन तक कोरोना का एक भी मरीज सामने नहीं आने के बाद आरेंज जोन ग्रीन जोन में बदल जाएगा.

आप भी जानें रेड और आरेंज जोन में क्या है अंतर

रेड जोन में उन इलाकों को शामिल किया गया हैं, जहां कोरोना के हॉटस्पॉट हैं. जबकि आरेंज जोन में कोई भी हॉटस्पॉट एरिया नहीं है. रेड जोन को भी दो भागों में बांटने का काम किया गया है. रेड जोन में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां कोरोना का आउटब्रेक हुआ है. ऐसे जिलों की संख्या देशभर में 123 है. इसके अलावा कुछ रेड जोन वाले जिले में कोरोना के बहुत सारे मरीज मिले हैं. वहां कलस्टर बनाने का काम किया गया है. ऐसे जिलों की संख्या 47 हैं.

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बिहार का ये है हाल

स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो बिहार का सीवान, राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली के दक्षिणी, दक्षिणी पूर्वी, शाहदरा, पश्चिमी उत्तरी और मध्य दिल्ली, उत्तरप्रदेश के आगरा, नोएडा, मेरठ, लखनऊ गाजियाबाद, शामली, फिरोजाबाद, मोरादाबाद और सहारनपुर रेड जोन में कोरोना आउटब्रेक वाले जिलों में शामिल है. यही नहीं बिहार का मुंगेर, बेगुसराय और गया, दिल्ली का उत्तरी-पश्चिमी, उत्तराखंड के नैनीताल और उधम सिंह नगर और उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर, सीतापुर, बस्ती और बागपत रेड जोन के कलस्टर वाले जिलों में है.

ऑरेंज जोन में शामिल जिले

बिहार के गोपालगंज, नवादा, भागलपुर,सारन, लखीसराय, नालंदा और पटना जबकि राजधानी दिल्ली का उत्तरी-पूर्वी… उत्तरप्रदेश के कानपुर नगर, वाराणसी, अमरोहा, हापुड़, महाराजगंज, प्रतापगढ़ और रामपुर जैसे जिलों को ऑरेंज जोन में रखा गया है. यहां न तो कोरोना का कलस्टर और न ही आउटब्रेक हुआ है. इन जिलों में कुछ केस पाये गये थे.

ये भी जानें

-रेड जोन वाले इलाके में घर-घर सर्वे कर कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच करने का काम किया जाता है. पूरे इलाके को पूरी तरह सील कर किसी को आने-जाने की इजाजत नहीं दी जाती है.

-बफर जोन में आर्थिक गतिविधियों पर रोक साथ जरूरी सेवाओं को चालू रखने की इजाजत प्रशासन देता है. बफर जोन में सर्दी-खांसी, जुकाम और बुखार वाले मरीजों पर विशेष ध्यान रखा जाता है और उनका कोरोना टेस्ट करवाया जाता है.

-रेड और आरेंज जोन के अलावा सरकार ने ग्रीन जोन में भी कोरोना पर नजर रखने का निर्णय लिया है. ग्रीन जोन वाले इनफ्लुएंजा या सांस से संबंधित बीमारी से गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों का कोरोना टेस्ट प्रशासन करवाएगी.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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