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Bollywood Drugs Case : इस व्यक्ति ने खोला बॉलीवुड का राज, मशहूर हस्तियों के डिलीट चैट को किया रिकवर

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
मकरंद वाघ ( Macans Infotech)
मकरंद वाघ ( Macans Infotech)
file

सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड के कई दबे राज सामने आ गये. बॉलीवुड और ड्रग्स का कनेक्शन सामने आया. कई लोगों से पूछताछ हुई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक के बाद एक कई सिरे पकड़े और बॉलीवुड से जुड़े कई रैकेट का भंडाफोड़ भी किया.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े कई राज सामने लाने में मकरंद वाघ की अहम भूमिका है. मकरंद उन लोगों में है जिन्होंने कई लोगों के फोन के अंदर झांक कर छिपे राज बाहर निकाले हैं. मकरंद पहले मुंबई पुलिस में थे लेकिन अब साइबर एक्सपर्ट के तौर पर काम करते हैं. इन्होंने कई डिलीट किये गये चैट को वापस पुलिस के सामने ला दिया. व्हाट्सएप पर ऐसी डिलीट कई बातचीत को वह पुलिस के सामने लाने में सफल रहे.

मरकंद पहले मुंबई पुलिस में वह तकनीकी टीम का हिस्सा थे जब साल 2016 में डेविड हेडली मुंबई हमले के मामले में पकड़ा गया था इसी वक्त उन्होंने इलेक्ट्रोनिक फॉरेंसिंग और डिजिटल से कैसे सबूत इकट्ठा करते हैं इसकी बारीकी सीखी. साल 2017 में इन्होंने पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली.

इस दौरान वह इस क्षेत्र में खुद को और माहिर करते रहे. फरवरी 2020 में इन्होंने अपनी कंपनी शुरू की. कंपनी खुलने के तुरंत बाद इन्होंने कोरोना संक्रमण की वजह से परेशानियां झेली क्योंकि इस दौरान कई बिजनेस को नुकसान पहुंचा. इनकी कंपनी का नाम Macans Infotech रखा.

इसी दौरान इनके पास बड़ा मौका आया. सुशांत सिंह राजपूत के मामले में जांच एजेंसी इसी तरह की किसी कंपनी की तलाश कर रही थी जो डिजिटल फूट प्रिंट को पहचान सके. मरकंद ने ही रिया चक्रवर्ती की व्हाट्सएप चैट की पूरी बातचीत सामने लायी. इसी बातचीत में ड्रग्स के कनेक्शन के साथ उनके रिश्ते को लेकर जांच शुरू हुई. इसके बाद एक के बाद कई लोगों के राज खुलने लगे. मरकंद ने 120 से ज्यादा डिवाइस पर काम किया और अहम जानकारियां एनसीबी को दे दी.

इस मामले में दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर, और अर्जुन रामपाल जैसे नाम भी सामने . हैरान करने वाली बात यह कि मरकंद ने कई चैट ऐसे भी वापस ले आये जो साल 2005 के थे. इस मामले पर मरकंद ने कहा, मुझे यह महसूस होता है कि पारंपरिक तरीके से काम करने और तकनीक के साथ काम करने में काफी अंतर है.

इन दोनों के बीच लंबी खाई है. मुझे लगा कि तकनीकी तौर पर काम करना ज्यादा बेहतर होगा और मैंने इसे करियेर ऑप्शन के रूप में देखा. हमने सुशांत सिंर राजपूत केस के मामले में कई अहम जानकारियां पुलिस को एनसीबी को दी जिन्होंने इस केस में उनकी खूब मदद की है. आपका डाटा ही आपका दुश्मन हो सकता है, अपराधियों को उनका जुर्म कबूल करने की जरूरत नहीं है. इंटरनेट पर उसके सारे अपराध सामने आ जाते हैं.

इस जांच में बेहतर तकनीक, बढ़िया उपकरण और शानदार सॉफ्टवेयर आपको बेहतर काम करने में मदद करते हैं. आपको डाटा रिवाईव करते वक्त कई बातों का ध्यान रखना होता है, जैसे किन शब्दों का इस्तेमाल करके ये बात करते होंगे जैसे ड्रग्स, गाजा को स्टफ कहकर बुलाते हैं, लिखते हैं.

इस कीवर्ड की मदद से अहम डाटा सामने आ जाते हैं. इस तरह का डाटा कहीं भी नहीं निकाला जाता सिर्फ आधाकारिक एजेंसी ही यह काम करती है . हम पुलिस की जानकारी में यह काम करते हैं, उनके लिए करते हैं. हम इसका ध्यान रखते हैं कि सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ ना हो. हमारे पास जो डाटा है उसे ही हम पूरी तरह से कोर्ट में पहुंचा देते हैं.

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