देश के दुश्मनों की खैर नहीं, 307 ATAGS तोप खरीदने की तैयारी! जानिए क्या है खासियत

Published by : Pritish Sahay Updated At : 01 Mar 2023 9:50 PM

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एडवांस टॉड गन सिस्टम (ATAGS) को डीआरडीओ ने टाटा और भारत फोर्ज कंपनियों के साथ मिलकर बनाया है. 155/52 कैलिबर की इस एटीएजीएस तोप की रेंज करीब 48 किलोमीटर है. इन तोपों को किसी भी स्थान पर ले जाकर तैनात किया जा सकता है.

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चीन और पाकिस्तान अगर भारत की तरफ नजरे टेढ़ी करेगा तो उसकी खैर नहीं. जमीनी लड़ाई में भी भारत दोनों के होश फाख्ता कर सकता है. रक्षा क्षेत्र में भारत मेक इन इंडिया की तर्ज पर देश लगातार मजबूत हो रहा है. अब जल्द ही इस दिशा में एक और उपलब्धि हासिल हो सकती है.

खरीद का मिला प्रस्ताव: न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय को भारतीय सेना की ओर से 307 एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) खरीदने का प्रस्ताव मिला है. एक बिलियन अमरीकी डालर से अधिक का प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है. रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है.

लाल किले पर पहली बार हुआ था इस्तेमाल: स्वतंत्रता दिवस समारोह में पारंपरिक 21 तोपों की सलामी के दौरान पहली बार पूरी तरह स्वदेशी होवित्जर तोप का इस्तेमाल किया गया था. इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की ओर से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाया गया है. इसे एडवांस्ड टॉड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) के तहत विकसित किया गया है. यह तोप कितना घातक है और चीन पाकिस्तान के दांत खट्टे करने में कितना सक्षम है यहां देखते हैं.

एडवांस टॉड गन सिस्टम (ATAGS) को डीआरडीओ ने टाटा और भारत फोर्ज कंपनियों के साथ मिलकर बनाया है. 155/52 कैलिबर की इस एटीएजीएस तोप की रेंज करीब 48 किलोमीटर है. इन तोपों को किसी भी स्थान पर ले जाकर तैनात किया जा सकता है. हर मौसम और सभी परिस्थित में ये तोप दुश्मनों को तेस्तानाबूत कर सकते हैं. इसे ऐसा बनाया गया है कि इसे कहीं भी ले जाने में परेशानी नहीं होती.

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गौरतलब है कि बीते समय से चीन की घुसपैठ लगातार भारतीय सीमा में बढ़ी है. ड्रैगन हमेशा से विस्तारवादी नीति को प्रशय देता है. ऐसे में भारत के साथ उसकी तकरार भी होती है. कई बार तो दोनों देशों की सेना में खूनी जंग भी हुई है. ऐसे में भारत जमीन से लेकर आसमान तक अपनी सुरक्षा चाक चौबंद कर रहा है. ताकी भविष्य में ड्रैगन समेत किसी भी दुश्मन का भारतीय सेना मुंह तोड़ जवाब दे सके.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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