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जम्मू-कश्मीर सरकार का इंटरनेट प्रतिबंध साबित हो रहा है बेअसर

Updated at : 17 May 2017 4:16 PM (IST)
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जम्मू-कश्मीर सरकार का इंटरनेट प्रतिबंध साबित हो रहा है बेअसर

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी में अशांति को रोकने के लिए सोशल मीडिया ऐप्लीकेशन और इंटरनेट वेबसाइट पर एक माह का प्रतिबंध लगाया है, लेकिन कश्मीर घाटी में करीब सभी लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया जैसे सभी इंटरनेट माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं. कश्मीर के आईजी मुनीर खान ने […]

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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी में अशांति को रोकने के लिए सोशल मीडिया ऐप्लीकेशन और इंटरनेट वेबसाइट पर एक माह का प्रतिबंध लगाया है, लेकिन कश्मीर घाटी में करीब सभी लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया जैसे सभी इंटरनेट माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं. कश्मीर के आईजी मुनीर खान ने कहा कि, ”सोशल मीडिया पर प्रतिबंध कोई नहीं चाहता. लेकिन, इसका दुरुपयोग हो रहा है. इसका कोई विकल्प भी नहीं है, तो इसे लागू करने की जरूरत है.”

कश्मीर घाटी की सड़कों पर होनेवाले प्रदर्शनों की रोकथाम के लिए राज्य के गृह विभाग की ओर से 26 अप्रैल को एक आदेश जारी किया गया, जिसके तहत सूची कश्मीर घाटी में फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर जैसे 22 सोशल मीडिया ऐप्लीकेशन प्रतिबंधित कर दिये गये. राज्य गृह विभाग के मुख्य सचिव आर के गोयल ने कहा था, ‘‘सार्वजनिक व्यवस्था को बहाल रखने के लक्ष्य से सरकार इंटरनेट प्रदाता सभी कंपनियों को निर्देश देती है कि किसी प्रकार का संदेश अथवा किसी व्यक्ति या विशेष वर्ग के किसी भी विषय पर आधारित संदेश अथवा किसी प्रकार का चित्रात्मक संदेश एक माह की अवधि तक अथवा अगला आदेश आने तक सोशल नेटवर्किंग वाली साइट्स पर प्रसारित नहीं किया जायेगा.”

यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिये गये थे. यह निर्देश फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, वीचैट, क्यूक्यू, क्यूजोन, गूगल प्लस, स्काइपे, लाइन, पिनट्रस्ट, स्नैपचैट, यूट्यूब, वाइन और फ्लिक्र पर लागू होंगे. आदेश में कहा गया था, ‘‘सभी संबंधित कारकों का सावधानीपूर्वक अवलोकन करने के बाद पाया गया है कि राष्ट्रविरोधी एवं असमाजिक तत्व सोशल मीडिया प्लेटफार्म का विभिन्न प्रारूपों में भड़काऊ सूचना प्रसारित करने के लिए दुरुपयोग करते हैं, उन्हें तुरंत नियंत्रित अथवा अधिनियमित करने की जरूरत है.”

हालांकि, सरकार का आदेश लोगों की इस प्रकार की सोशल मीडिया साइट्स पर पहुंच रोकने की सारी जिम्मेदारी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों पर डालता है. वहीं, वह उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रतिबंध को बाईपास करके इस प्रकार की सेवाओं का इस्तेमाल करने में सक्षम होने की संभावना पर चुप है.

शीर्ष राजनयिक और सरकारी अधिकारी समेत पुलिस महानिदेशक भी कश्मीर घाटी के ताजा हालात संबंधी जानकारियां साझा करने के लिए इस प्रकार की प्रतिबंधित सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. विपक्षी नेशनल कांफ्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला भी प्रतिबंध के बावजूद सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते रहे. वह लगातार कश्मीर एवं दुनिया के अन्य क्षेत्रों की गतिविधियों के बारे में ट्विटर पर पोस्ट डालते हैं. सत्तारूढ़ पीडीपी भी प्रेस विज्ञप्तियां जारी करने और विपक्षी पार्टियों के आरोपों का जवाब देने के लिए ट्विटर का प्रयोग कर रही है. नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी दोनों पार्टियाें के बीच मंगलवार को स्वयं सहायता समूह के एक कार्यक्रम के दौरान ‘आजादी’ के नारे लगाने के कारण ट्विटर पर जुबानी जंग छिड़ गयी थी. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने की थी. राज्य के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार कश्मीर घाटी के ताजा हालात बताने के लिए व्हाट्सऐप और फेसबुक का प्रयोग कर रहे हैं.

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