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पंजाब कांग्रेस की प्रभारी बन सकती हैं दिल्ली की पूर्व CM शीला दीक्षित

Updated at : 16 Jun 2016 2:29 PM (IST)
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पंजाब कांग्रेस की प्रभारी  बन सकती हैं दिल्ली की पूर्व CM शीला दीक्षित

नयी दिल्ली : दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आज कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की है. अटकलें हैं कि शीला दीक्षित को कांग्रेस कोई बड़ी जिम्मेवारी सौंप सकती है. कमलनाथ के इस्तीफे के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस का महासचिव पद रिक्त हो गया है. यह पद प्रदेश में होने वाले चुनाव के […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आज कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की है. अटकलें हैं कि शीला दीक्षित को कांग्रेस कोई बड़ी जिम्मेवारी सौंप सकती है. कमलनाथ के इस्तीफे के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस का महासचिव पद रिक्त हो गया है. यह पद प्रदेश में होने वाले चुनाव के मद्देनजर प्रभारी का भी था. यह पद शीला दीक्षित को सौंपा जा सकता है. पंजाब और उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है. दूसरी ओर चर्चा है कि शीला दीक्षित को कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सीएम के चेहरे के रूप में पेश कर सकती है. इनमें से जो भी हो शीला दीक्षित को पार्टी कोई बड़ी जिम्मेवारी सौंप सकती है.

प्रमुख समाचार चैनलों ने सूत्रों के हवाले से कहा कि शीला दीक्षित को पंजाब का कमान सौंपा जा सकता है. शीला दीक्षित पंजाब मूल की है और उन्हें कांग्रेस में काफी पसंद किया जाता है. उन्हें एक अच्छा प्रशासक माना जाता है. गौरतलब है कि कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने प्रदेश कांग्रेस में बड़े फेरबदल के सुझाव दिए थे. इस सुझाव को स्वीकार करते हुए पार्टी हाई कमांड ने मधुसुदन मिस्त्री की जगह गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रभारी नियुक्त किया है.

जिसके बाद से ही अटकले तेज हैं कि निर्मल खत्री की जगह एक नये और युवा चेहरे को कांग्रेस अध्यक्ष की कमान मिल सकती है. कमलनाथ ने यह कदम ऐसे समय उठाया जब अकाली दल, भाजपा और आप ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की कथित भूमिका को लेकर उन पर तथा कांग्रेस पर हमला साधा है. उनकी नियुक्ति को सिखों के जख्मों पर नमक छिडकने जैसा बताते हुए तीनों दल इस नियुक्ति को बडा तूल देने की तैयारी में थे.

कमलनाथ ने दिया पंजाब प्रदेश प्रभारी पद से इस्तीफा

हाल ही में पंजाब प्रदेश महासचिव बनें कमलनाथ ने 1984 दंगों में अपना नाम घसीटे जानें के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और सोनिया गांधी ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है. कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पद से मुक्त करने की मांग की. सोनिया ने उनका इस्तीफा तुरंत मंजूर किया और उन्हें पार्टी महासचिव पद से मुक्त कर दिया. पंजाब और हरियाणा के तीन दिन पहले प्रभारी महासचिव बनाये गए कमलनाथ ने सोनिया को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘मैं आग्रह करता हूं कि मुझे (पंजाब में) मेरे पद से मुक्त किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो कि पंजाब से असल मुद्दों से ध्यान नहीं भटके.’ पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने कहा कि वह ‘पिछले कुछ दिन में नई दिल्ली में 1984 के दर्दनाक दंगों को लेकर पैदा गैरजरुरी विवाद से जुडे घटनाक्रम से आहत’ हैं.

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