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अब नहीं किया जाएगा बीती तरीख से कराधान : मोदी

Updated at : 24 Jan 2016 8:03 PM (IST)
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अब नहीं किया जाएगा बीती तरीख से कराधान : मोदी

चंडीगढ़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज घोषणा की कि देश में पिछली तिथि से कराधान की विवादास्पद व्यवस्था अब बीते जमाने की बात हो गई है और भारत में यह अध्याय अब दुबारा नहीं खोला जाएगा. मोदी का यह बयान स्थिर कर प्रणाली को लेकर विदेशी निवेशकों की चिंताएं दूर करने के उद्देश्य से […]

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चंडीगढ़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज घोषणा की कि देश में पिछली तिथि से कराधान की विवादास्पद व्यवस्था अब बीते जमाने की बात हो गई है और भारत में यह अध्याय अब दुबारा नहीं खोला जाएगा. मोदी का यह बयान स्थिर कर प्रणाली को लेकर विदेशी निवेशकों की चिंताएं दूर करने के उद्देश्य से आया है. मोदी यहां फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की उपस्थित में दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों व कंपनी अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे.

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विदेशी निवेशक भारत में आगामी 15 साल तक की कर प्रणाली को लेकर स्पष्ट रहें. उन्होंने कहा,‘ मैं स्थिर व्यवस्था व भरोसेमंद काराधान प्रणाली के पक्ष में हूं. सरकार यह भरोसा सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठा रही है. यह सरकार स्थिर व पूर्वानमेय कर प्रणाली के लिए जानी जाती है. ‘ इस संदर्भ में उन्होंने 2012 में आयकर कानून में संशोधन के जरिए लागू की गई पिछली तारीख से कर व्यवस्था का संदर्भ दिया. उसके कारण विशेषकर विदेशी निवेशकों में काफी बेचैनी देखने को मिली और इसके खिलाफ बहुत शोर हुआ.
मोदी ने भारत-फ्रांस व्यापार शिखर सम्मेलन में कहा,‘ पिछली तारीख से कराधान बीती बात हो गई. वह अध्याय अब दुबारा नहीं खुलेगा. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उस अध्याय को न तो यह सरकार और न ही भावी सरकारें खोल सकें. ‘
मोदी ने कहा,‘ जो भी देश में निवेश कर रहा है उसे अगले पांच साल, 10 साल, 15 साल की कराधान प्रणाली की जानकारी होनी चाहिए. ‘ फ्रांस के राष्ट्रपति ओलोंद ने अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत आज यहां से की। उनके साथ फ्रांसीसी कंपनियों के कार्याधिकारियों (सीईओ) का बड़ा प्रतिनिधि मंडल आया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेषकर रक्षा क्षेत्र की फ्रांसीसी कंपनियों को भारत में विनिर्माण के लिए न्योता दिया और कहा कि वे यहां कम लागत का फायदा उठाए. मोदी के अनुसार भारत उन्हें व्यापार की बड़े अवसरों की पेशकश करता है.
उन्होंने कहा,‘ भारत रक्षा विनिर्माण क्षेत में उतरना चाहता है… मैं यहां मौजूद फ्रांसीसी कंपनियों विशेष रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि हम रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में काफी कुछ कर सकते हैं. ‘ मोदी ने कहा,‘ हम जीवन के गुणवत्ता में सुधार के लिए काम कर रहे हैं. हम अच्छे प्रशासन की दिशा में काम कर रहे हैं. ये दो पहले हैं जिनकी ओर सारी दुनिया आकर्षित हुई है. ‘ उन्होंने कहा कि भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 40 प्रतिशत बढोतरी हुई है और उसने खुदर को विदेशी पूंजी के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रुप में स्थापित किया है.
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यभार संभालने के बाद थोड़े से ही समय में ‘व्यापार सुगमता’ की रैंकिंग में भारत 12 पायदान उपर चढ़ा है. उन्होंने कहा,‘ थोड़े से ही समय में एफडीआई में 40 प्रतिशत बढोतरी इस बात का सबूत है कि दुनिया ने महत्वपूर्ण गंतव्य के रुप में भारत को पहचाना है. ‘
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत व फ्रांस के बीच विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के अवसर हैं. उन्होंने कहा,‘ यह ‘एक दूजे के लिए बने’ जैसा है. आप (फ्रांस) के पास जो है वह हमारी जरुरत है और जो आपको चाहिए वह बाजार हमारे पास है. ‘ उन्होंने देश के बुनियादी ढांचे, रेल नेटवर्क व नवोन्मेष में सुधार के लिए फ्रांस की मदद चाही.
मोदी ने कहा,‘ हमारे विकास माडल को फ्रांस की विशेषज्ञता की जरुरत है. हमें बुनियादी ढांचे, रेल, समुद्री व जलमार्ग के क्षेत्र में आगे बढ़ना है. ‘ उन्होंने कहा कि भारत वायुमंडल का तापमान बढ़ने की चुनौती से निपटने में वैश्विक लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है. मोदी ने कहा,‘ हम कार्बन उत्सर्जन (फुटप्रिंट) घटाना चाहते हैं और जलमार्ग की ओर बढ़ना चाहते हैं.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार रेलवे को डीजल से इलेक्ट्रिक माडल पर ले जाने की प्रक्रिया में है.
मोदी ने कहा,‘ हम अपने रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना चाहते हैं. हम 50 मेट्रो स्टेशनों के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा करना चाहते हैं और फ्रांस में यह (करने की) क्षमता है. ‘ प्रधानमंत्री ने कहा कि नवोन्मेष फ्रांस की सबसे बड़ा ताकत है. मोदी ने कहा कि भारत व फ्रांस दोनों इस क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं. आतंकवाद को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति की चिंताओं को साझा करते हुए मोदी ने कहा कि आतंकवाद समूची मानवता के लिए चुनौती है और सारी दुनिया को इससे मिलकर लड़ना होगा. ‘
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