जीआरएएल कंपनी के खिलाफ कबरा पंचायत में महाधरना, सड़क निर्माण का ग्रामीणों ने किया विरोध

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 02 Jun 2026 4:39 PM

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चतरा के टंडवा प्रखंड की कबरा पंचायत में प्रदर्शन करते लोग. फोटो: प्रभात खबर

Chatra News: चतरा के टंडवा प्रखंड स्थित कबरा पंचायत में जीआरएएल कंपनी द्वारा कथित ट्रांसपोर्टिंग सड़क निर्माण के विरोध में ग्रामीणों ने महाधरना शुरू किया है. ग्रामीणों ने पर्यावरण, सुरक्षा और अतिक्रमण की आशंका जताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की. कार्रवाई नहीं होने पर 5 जून से चक्का जाम की चेतावनी दी गई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से दीनबंधू की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के टंडवा प्रखंड अंतर्गत कबरा पंचायत में जीआरएएल कंपनी द्वारा कराए जा रहे कथित सड़क निर्माण कार्य के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है. पंचायत के वृंदा मोड़ के समीप बड़ी संख्या में ग्रामीण महाधरना पर बैठ गए हैं और निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा अवैध तरीके से ट्रांसपोर्टिंग सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की शांति, पर्यावरण और जनसुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो गया है.

सड़क निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद

धरना पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, वह घनी आबादी वाले इलाके, सरकारी भूमि तथा बड़की नदी क्षेत्र से होकर गुजरती है. ऐसे में सड़क निर्माण से अतिक्रमण की समस्या बढ़ सकती है. साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाएगी.ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के लिए स्थानीय लोगों की राय नहीं ली गई और न ही ग्रामसभा की सहमति प्राप्त की गई है. इसी कारण लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है.

बाउंसरों के सहारे काम कराने का आरोप

धरनारत ग्रामीणों ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में दहशत का माहौल बनाने के लिए बाउंसरों की तैनाती की गई है. उनका कहना है कि ग्रामीणों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी के प्रतिनिधि स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनने के बजाय दबाव बनाकर कार्य कराना चाहते हैं. हालांकि कंपनी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

पर्यावरण और जनहित को लेकर चिंता

धरना में शामिल लोगों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है. सड़क निर्माण और उसके बाद कोयला परिवहन के कारण धूल प्रदूषण बढ़ने की आशंका है, जिसका असर आसपास के गांवों और कृषि भूमि पर पड़ सकता है. इसके अलावा बड़की नदी क्षेत्र से होकर सड़क गुजरने की बात को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए सड़क निर्माण कार्य की जांच कराने का अनुरोध किया है. उनका कहना है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियों, पर्यावरणीय पहलुओं और ग्रामसभा की सहमति की जांच की जानी चाहिए. धरना पर बैठे लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के पीछे अवैध वसूली की मंशा हो सकती है. हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

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5 जून से चक्का जाम की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने समय रहते सड़क निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई, तो 5 जून से क्षेत्र में चक्का जाम आंदोलन शुरू किया जाएगा. धरना स्थल पर ग्रामीणों ने कंपनी के कथित दलालों के खिलाChatra News: जीआरएएल कंपनी के खिलाफ कबरा पंचायत में महाधरना, सड़क निर्माण का ग्रामीणों ने किया विरोधफ नारेबाजी करते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की. उनका कहना है कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और क्षेत्र की सुरक्षा को दरकिनार कर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा. फिलहाल मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. ऐसे में अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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