पाकिस्तान के साथ दूरियों को पाटना जरूरी, तीसरा पक्ष स्वीकार्य नहीं : सुषमा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Dec 2015 6:25 PM

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नयीदिल्ली : भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की नयी शुरुआत पर आज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया. विदेश मंत्री ने एक अहम बात कही कि दोनों देशों में बीच बेहतर रिश्ते क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है. विदेश मंत्री ने अफसोस जताया कि दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय […]

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नयीदिल्ली : भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की नयी शुरुआत पर आज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया. विदेश मंत्री ने एक अहम बात कही कि दोनों देशों में बीच बेहतर रिश्ते क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है. विदेश मंत्री ने अफसोस जताया कि दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय सहयाेग संगठन दक्षेस उस तरह से आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जैसे विश्व के दूसरे क्षेत्रीय सहयोग संगठन आगे बढ़ रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काठमांडो सार्क सम्मेलन में भाषण

भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों को पूरे क्षेत्र की शांति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार ने आज कहा कि पाक से दूरियों को पाटना जरूरी है और उम्मीद जतायी कि ‘समग्र द्विपक्षीय वार्ता’ के तहत इस पड़ोसी देश के साथ बातचीत से अमन और विकास का नया अध्याय शुरू होगा. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपनी हाल की इस्लामाबाद यात्रा तथा भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों के संबंध में संसद में दिए बयान में कहा, ‘‘ बातचीत किसी तीसरे की मध्यस्थता में नहीं होनी है…तीसरी पार्टी की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेंगे. बातचीत दोनों देशों को ही करनी होगी…इसलिए दूरी को पाटना जरूरी है.’ उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार चढाव का असर दक्षेस संगठन पर पडने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ उस तरीके से दक्षेस आगे नहीं बढ रहा है जैसे दूसरे संगठन बढ रहे हैं.’ पाकिस्तान के साथ पिछले दिनों कई स्तर पर हुई बातचीत के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘यह कूटनीति का हिस्सा है. लेकिन गुपचुप कुछ नहीं हुआ है. ‘

वार्ता के मुद्दे

उन्होंने पाकिस्तान के साथ मधुर संबंधों को दोनों देशों के हित में बताते हुए कहा कि वार्ता को निर्बाध रखने के लिए जरूरी है कि माहौल खराब करने वालों के बहकावे में नहीं आया जाए. उन्होंने कहा, ‘‘ वार्ता से ही रास्ता निकलेगा भरोसा करके ही बातचीत शुरू होगी.’ विदेश मंत्री ने बयान के बाद सदस्यों द्वारा किए गए सवालों के जवाब में बताया कि उनकी पाकिस्तान यात्रा के दौरान धार्मिक पर्यटन को भी कारोबार, ट्रांजिट, तुलबुल परियोजना, सियाचिन और सरक्रीक के साथ वार्ता के महत्वपूर्ण स्तंभों में शामिल किया गया है.

उन्होंने साथ ही बताया कि आतंकवाद पर वार्ता के स्तर को भी बढाने का फैसला किया गया है और अब इस मुद्दे पर वार्ता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर ही होगी.

मोदी शरीफ मुलाकात में पड़ी समग्र द्विपक्षीय वार्ता की नींव

सुषमा ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच पेरिस पर्यावरण सम्मेलन के दौरान यह चर्चा हुई थी कि दोनों देशों के बीच दोबारा किस तरह बातचीत का माहौल बनाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ एक नए शीर्षक समग्र द्विपक्षीय वार्ता’ के तहत बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के विदेश सचिवों को इसनयी वार्ता की रूपरेखा और सारणी तय करने का काम सौंपा गया है.

बातचीत का सिलसिला शुरू करने पर उन्होंने कहा, इसके पीछे यह भावना थी कि हम दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगातार दूरी हमारे क्षेत्र में शांति स्थापित करने तथा इसे एक प्रगतिशील क्षेत्र के रूप में विकसित करने के हमारे साझा सपने के मार्ग में अड़चन है.’ सुषमा ने कहा, साथ ही यह भी बिल्कुल स्पष्ट था कि हमारे बीच संबंधों को विकसित करने के मार्ग में मुख्य बाधाओं, विशेषकर आतंकवाद से, प्रत्यक्ष एवं स्पष्टरूप से निपटने की आवश्यकता है. सुषमा ने कहा कि 30 नवंबर को मोदी..शरीफ बैठक के परिणामस्वरूप छह दिसंबर को बैंकाक में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत हुई जो स्पष्ट, सौहार्द्रपूर्ण और रचनात्मक माहौल में हुई. यह चर्चा सुरक्षा, आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर अमन..चैन और जम्मू कश्मीर पर केंद्रित थी. जम्मू कश्मीर राज्य आतंकवाद और नियंत्रण रेखा के उल्लंघन से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है.

बंबई हमले पर हुई बात

उन्होंने कहा कि शरीफ तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष सरताज अजीज के साथ उनकी बैठकें इसी सकारात्मक प्रगति की पृष्ठभूमि में आयोजित की गयीं. दोनों पक्षों ने आतंकवाद की भर्त्सना की और इसे खत्म करने के लिए आपसी सहयोग करने का संकल्प लिया. सुषमा ने कहा, साथ ही हमने मुंबई आतंकी हमले से संबंधित न्यायिक कार्रवाई में पाकिस्तान द्वारा तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया. पाकिस्तान द्वारा भारतीय पक्ष को इसे शीघ्र अंजाम तक पहुंचाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में आश्वस्त किया गया.’ उन्होंने कहा, मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगी कि यह सरकार देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. इस संबंध में किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए सरकार कूटनीतिक प्रयोगों सहित वो सभी कदम उठाएगी जो आवश्यक हों.’

सुषमा ने कहा, हमारी सरकार पाकिस्तान सहित अपने सभीपड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों के लिए वचनबद्ध है ताकि दक्षिण एशिया में शांति और विकास के लिए जो प्रयास इस सरकार ने अपना कार्यभार संभालने के समय शुरू किए थे, उन्हें आगे बढाया जा सके. पाकिस्तान के साथ इस नवीन वार्ता के दो उद्देश्य हैं, चिंता के विषयों पर रचनात्मक बातचीत के जरिए समस्याओं का निराकरण करना और साथ ही सहयोगात्मक संबंधों को स्थापित करना तथा इस दिशा में नए मार्ग तलाशना.’ विदेश मंत्री ने कहा, व्यापार और संपर्क द्वारा, लोगों के बीच आपसी संपर्क द्वारा, और मानवीय पक्षों पर नयी पहलों के द्वारा समूचे क्षेत्र का कल्याण हो सकता है. इससे आपसी समझ और विश्वास भी बढ सकता है. हम आशा करते हैं कि इस नवीन वार्ता से हमारे समूचे क्षेत्र में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू होगा.’ सुषमा ने कहा, मैं अफगानिस्तान से संबंधित हार्ट आफ एशिया’ सम्मेलन में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व करने के लिए हाल में इस्लामाबाद गयी थी.’ उन्होंने कहा, यह सम्मेलन अफगानिस्तान में स्थिरता और विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता और उसके भविष्य के प्रति हमारी आस्था को पुन: दोहराने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बना.

इस सम्मेलन के बारे में उन्होंने कहा, इस्लामाबाद की मेरी इस यात्रा में भारत की अफगानिस्तान के प्रति इसी मजबूत प्रतिबद्धता को फिर दर्शाया गया.’ उन्होंने सम्मेलन में अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान के रास्ते भारत तक पूर्ण और सीधे ट्रांजिट मार्ग खोलने का आग्रह किया.

अच्छे संबंध से पूरे क्षेत्र में स्थापित होगी शांति

सुषमा ने कहा कि मई 2014 में भारत मेंनयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को अन्य दक्षेस देशाें के नेताओं के साथ आमंत्रित किया था. उन्होंने कहा कि यह निमंत्रण पाकिस्तान के साथ अच्छेपड़ोसी संबंध रखने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का परिचायक था. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियाें की जुलाई में उफा में मुलाकात हुई जिसमें वे इस बात पर सहमत हुए किशांति सुनिश्चित करने और विकास को बढावा देने की जिम्मेदारी दोनों देशाें की है. दोनों ने यह भी इंगित किया कि दोनों देश सभी बकाया मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं. उफा सम्मेलन के दौरान शरीफ ने हमारे प्रधानमंत्री को वर्ष 2016 में होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद आने का आमंत्रण दिया.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में बताया कि पाकिस्तान के साथ बहुत अच्छे माहौल में बात हुई. उन्होंने कहा, ‘‘ भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अच्छे होते हैं तो पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित होगी. ‘ उन्होंने साथ ही भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता बहाल होने का स्वागत करने के लिए सदन में विभिन्न राजनीतिक दलों का आभार भी जताया. लोकसभा में आमतौर पर मंत्री के जवाब के बाद स्पष्टीकरण का नियम नहीं है लेकिन सुषमा ने कहा कि यदि आसन अनुमति दे तो वह सदस्यों के सवालों के जवाब देने को तैयार हैं. आसन की अनुमति से तृणमूलकांग्रेस के सौगत राय, माकपा के मोहम्मद सलीम, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती, बीजद के भृतुहरि मेहताब, तेलुगू देशम पार्टी के जयदेव गल्ला तथा आल इंडिया मजलिस ए इत्तहादुल मुसलमीन के असादुद्दीन औवेसी ने विदेश मंत्री की पाकिस्तान यात्रा को लेकर विभिन्न सवाल किए.

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