जयललिता मामले में बहस के लिए सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी अनुमति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jan 2015 5:03 PM (IST)
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नयी दिल्ली: भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुनायी गयी सजा के खिलाफ दायर अपील पर बहस करने की अनुमति मांगी है. प्रधान न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने स्वामी से कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय […]
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नयी दिल्ली: भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुनायी गयी सजा के खिलाफ दायर अपील पर बहस करने की अनुमति मांगी है.
प्रधान न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने स्वामी से कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के किसी आदेश के अभाव में शीर्ष अदलात कोई निर्देश नहीं दे सकती है.न्यायाधीशों ने कहा ‘आप कर्नाटक उच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त करें. हम इसके बाद ही इस पर गौर कर सकते हैं.’ न्यायाधीशों ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि उच्च न्यायालय में क्या हुआ है. स्वामी ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान कहा कि सत्र अदालत के समक्ष इस मामले में वह शिकायतकर्ता थे.
इस तथ्य के बावजूद उच्च न्यायालय ने उन्हें अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी है. उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण कानून के प्रावधान का हवाला देते हुये कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में शिकायतकर्ता को अभियोजक माना जा सकता है.
लेकिन न्यायालय इससे प्रभावित नहीं हुआ और उनसे कहा कि उच्च न्यायालय के लिखित आदेश के बाद ही उनके कथन पर विचार किया जा सकता है.
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 18 दिसंबर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में जयललिता की जमानत चार महीने के लिये बढा दी थी. इसके साथ ही न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले का फैसला करने के लिये विशेष पीठ गठित करने का आग्रह किया था ताकि तीन महीने के भीतर अपील का निबटारा किया जा सके.
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि अन्ना द्रमुक सुप्रीमो की सजा के खिलाफ दायर अपील पर दैनिक आधार पर सुनवाई होगी.न्यायालय ने जयललिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी से कहा था कि इस मामले के दस्तावेजों की एक प्रति स्वामी को उपलब्ध करायी जाए.
इस मामले में विशेष अदालत ने जयललिता को चार साल की कैद और सौ करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी. शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर से जेल में बंद जयललिता को 17 अक्तूबर 2014 को सशर्त जमानत दी थी.
न्यायालय ने जयललिता की सहयोगी शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को भी जमानत प्रदान कर दी थी. सत्र अदालत द्वारा जयललिता को जेल भेजे जाने के बाद कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. जयललिता ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि उन्हें सिर्फ चार साल की सजा सुनायी गयी है और उन्होंने जमानत के लिये अपनी तमाम बीमारियों का हवाला दिया था.
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