संस्‍था के हित में की कोर्ट की टिप्‍पणियों पर आपत्ति : रंजीत सिन्‍हा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Oct 2014 2:35 PM

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नयी दिल्ली : कोयला घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई के जांचकर्ताओं पर निचली अदालत की टिप्पणियों को उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के बाद सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा, मुझे अपनी संस्था और टीम के हित में उन (निचली अदालत) टिप्‍पणियों पर आपत्ति जाहिर की.उच्चतम न्यायालय के आदेश के दो दिन बाद […]

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नयी दिल्ली : कोयला घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई के जांचकर्ताओं पर निचली अदालत की टिप्पणियों को उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के बाद सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा, मुझे अपनी संस्था और टीम के हित में उन (निचली अदालत) टिप्‍पणियों पर आपत्ति जाहिर की.उच्चतम न्यायालय के आदेश के दो दिन बाद सीबीआई निदेशक ने यह भी कहा कि विवादास्पद मीट निर्यातक मुइन कुरैशी और उनके बीच बातचीत के वकील प्रशांत भूषण के आरोपों के बाद वह भूषण के खिलाफ झूठी गवाही का मामला दर्ज करने के लिए उच्चतम न्यायालय में जा रहे हैं.

सिन्हा ने कोयला घोटाले के मामलों पर सुनवाई कर रही एक विशेष अदालत की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जाहिर की थी कि जांच अधिकारियों को सीबीआई अकादमी में उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि उनकी जांच की कुशलता को तराशा जा सके. सिन्हा ने कहा, मैंने उच्चतम न्यायालय में जाने का फैसला किया. उन्होंने यहां कहा, मैं महत्वपूर्ण नहीं हूं, मेरी संस्था महत्वपूर्ण है. मैं प्रतिष्ठित जांच एजेंसी की गरिमा बनाये रखने के लिए शीर्ष अदालत का आभारी हूं.

उच्चतम न्यायालय ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों पर सुनवाई कर रही विशेष अदालत से कहा है कि घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों के खिलाफ कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जाए और कानून के अनुसार चला जाए. न्यायमूर्ति एम बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने विशेष अदालत की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा, यह (निचली अदालत) कानूनी मुद्दों के प्रति बाध्य है और कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करेगी.

पीठ का यह आदेश सीबीआई के इस बयान के बाद आया कि उसके दो अधिकारी, पुलिस अधीक्षक निर्भय कुमार तथा निरीक्षक राजबीर सिंह ने निचली अदालत की टिप्पणी के मद्देनजर जांचकर्ताओं के दल में बने रहने पर अनिच्छा जताई है. अदालत ने कोयला मामलों की जांच कर रहे किसी भी अधिकारी पर उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बिना जांच से हटने पर रोक भी लगा दी थी.

सिन्हा ने दावा किया कि कुछ ‘निहित स्वार्थ’ वाले लोगों द्वारा झूठे आरोप लगाकर सीबीआई की छवि को दागदार करने के समन्वित प्रयास किये गये. उन्होंने उच्चतम न्यायालय में प्रशांत भूषण के लगाये इन आरोपों को खारिज कर दिया कि कुरैशी संभवत: सीबीआई निदेशक तथा कोयला घोटाले के आरोपियों के बीच संदेशवाहक था. भूषण का आरोप था कि सिन्हा की लगभग 15 महीने में कुरैशी के साथ 90 मुलाकातें हुईं.

उनका दावा था कि मीट कारोबारी कोयला घोटाले से जुडे अनेक मामलों में एजेंसी से जांच बंद कराने के लिए संदेशवाहक का काम कर रहा था. एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को कुरैशी पर आयकर महानिदेशक (जांच) द्वारा तैयार मूल्यांकन रिपोर्ट के बारे में सूचित किया था. रोहतगी ने अदालत में कहा था कि कुरैशी और सिन्हा के बीच कोई बातचीत नहीं हुई.

सीबीआई निदेशक के संदर्भ में कुछ संकेत हो सकते हैं लेकिन कोई ‘सीधी बातचीत’ नहीं हुई. सिन्हा ने कहा कि वह अगले सप्ताह भूषण के खिलाफ झूठी गवाही देने का मामला दर्ज कराएंगे क्योंकि आयकर विभाग द्वारा की गयी जांच के बाद सीबीआई निदेशक के खिलाफ उनके आरोप गलत साबित हुए. उन्होंने कहा, एक बार फिर यह रंजीत सिन्हा का सवाल नहीं है बल्कि सीबीआई निदेशक के पद के सम्मान और गरिमा का प्रश्न है.

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