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#JammuKashmir: घाटी के हालात पर प्रधान सचिव रोहित कंसल का बड़ा बयान, संचार व्यवस्था को लेकर कही ये बात

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और इसे दो भागों में विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला केंद्र सरकार ने किया. इसके पहले घाटी में तमाम संवेदनशील स्थानों पर किसी भी गड़बड़ी की आशंका से बचने के लिए भारी मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी और कई स्थानों पर धारा-144 लगा दी […]

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और इसे दो भागों में विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला केंद्र सरकार ने किया. इसके पहले घाटी में तमाम संवेदनशील स्थानों पर किसी भी गड़बड़ी की आशंका से बचने के लिए भारी मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी और कई स्थानों पर धारा-144 लगा दी गई थी.

स्वतंत्रता दिवस समारोह की तस्वीरें आईं

पिछले कुछ समय से घाटी के हालात को लेकर कयासों का दौर चल रहा है. विपक्षी पार्टियों सहित कई गैर सरकारी संंगठन केंद्र सरकार पर वहां संचार व्यवस्था को ठप्प कर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं. बीते 12 अगस्त को बकरीद थी और कहा जा रहा था कि यही हालात रहे तो लोग त्यौहार कैसे मना पाएंगे. वहीं 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस को लेकर भी चर्चा का बाजार गर्म है. हालांकि घाटी में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों से जुड़ी कई तस्वीरें सामने आई है. इस बीच फर्जी ट्विटर हैंडल से निपटने की तैयारी भी चल रही है.

इस बीच जम्मू और कश्मीर के प्रधान सचिव ने अलग-अलग कई बयान जारी करके कयासों पर विराम लगाने की कोशिश की है. प्रधान सचिव रोहित कंसल ने एक मीडिया एजेंसी से बातचीत में कहा कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के सभी जिलोें में स्वतंत्रता दिवस को लेकर फुल ड्रेस रिहर्सल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि समारोह को भव्य तरीके से मनाने के लिए सारी तैयारियां की जा रही है.

निषेधाज्ञा में दी गई है जरूरी राहत

बकरीद को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में त्यौहार को भलीभांति और शांति पूर्ण तरीके से मनाने के लिए जरुरी छूट दी गई थी. उन्होंने कहा कि धारा-144 के तहत जो भी निषेधाज्ञा लगाई गई थी उसमें भी यथोचित छूट दी गई है. उन्होंने कहा कि जम्मू क्षेत्र पूरी तरह से प्रतिबंंधों से मुक्त है लेकिन कश्मीर के कुछ संवेदनशील हिस्सों में अभी भी निषेधाज्ञा लगाई गई है.

रोहित कंसल ने बताया कि साल 2008 से 2016 के बीच राज्य में काफी गड़बड़ियां देखी गईं. 2016 में महज एक सप्ताह के अंदर 37 लोगों की जान हिंसा की विभिन्न घटनाओं में हुई थी. उन्होंने कहा कि पिछले 1 हफ्त में कोई दुर्घटना नहीं हुई है. कंसल का कहना है कि यदि उचित प्रतिबंध लगाकर मानवीय जिंदगियां बचाई जा रही है ये कहां गलत है.

फर्जी सोशल प्लेटफॉर्म से निपटने की तैयारी

बता दें विपक्षी पार्टियां सबसे ज्यादा वहां संचार साधनों को ठप्प किए जाने को मुद्दा बना रही है. रोहित कंसल ने इस बारे में कहा कि वर्तमान हालातों के मद्देनजर किसी भी तरह की अफवाहों को लेकर हम सावधानी बरत रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमने सभी फर्जी ट्विटर हैंडलों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संज्ञान लिया है जो घाटी में अशांति फैलाने में उपयोग किए जातें हैं. उन्होंने कहा कि इनसे कानूनी स्तर पर प्रक्रियात्मक रुप से उचित माध्यम से निपटा जा रहा है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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