होली के रंगों में दिखी उत्तराखंड की संस्कृति, आस्था और विकास के संदेश के साथ दिखे सीएम धामी
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 06 Mar 2026 1:28 PM
मुख्यमंत्री धामी होली खेलते हुए (Photo: X)
Uttarakhand Holi : उत्तराखंड में होली का पर्व इस बार केवल रंगों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि इसमें राज्य की संस्कृति, आस्था और विकास का संदेश भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर प्रदेशवासियों के साथ होली का उत्सव मनाया और लोकसंस्कृति, आस्था तथा विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया.
Uttarakhand Holi : देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित होली मिलन समारोह में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली. राज्य के विभिन्न क्षेत्रों गढ़वाल, कुमाऊँ, जौनसार और तराई से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से माहौल को उत्सवमय बना दिया.
जौनसार क्षेत्र के कलाकारों ने पारंपरिक हारूल नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि कुमाऊँ से आए होल्यारों ने अपने पारंपरिक होली गीतों से वातावरण में उल्लास घोल दिया. ढोल, मंजीरा और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर गूंजते लोकगीतों ने मुख्यमंत्री आवास को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के रंगों से सराबोर कर दिया.
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लोक कलाकारों के साथ उत्साहपूर्वक शामिल हुए. उन्होंने कलाकारों के साथ थिरकते हुए पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाए और लोकगीतों का आनंद लिया. यह दृश्य केवल उत्सव का हिस्सा नहीं था, बल्कि राज्य की लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.
राजनीतिक शिष्टाचार का भी दिया संदेश
होली मिलन समारोह के समानांतर मुख्यमंत्री ने राजनीतिक शिष्टाचार और वरिष्ठ नेतृत्व के प्रति सम्मान की परंपरा को भी आगे बढ़ाया. उन्होंने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों भुवन चंद्र खंडूरी रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेन्द्र सिंह रावत से उनके आवास पर भेंट कर उन्हें होली की शुभकामनाएं दीं.
चंपावत दौरे में दिखा जनविश्वास
होली के अवसर पर मुख्यमंत्री का चंपावत दौरा भी कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा. कार्यक्रमों में उमड़ी भारी भीड़ ने धामी सरकार के कार्यों पर जनता के विश्वास की मजबूत झलक पेश की. दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने माँ पूर्णागिरी धाम में आयोजित मेले का शुभारंभ किया और मंदिर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, पेयजल और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है.
काली कुमाऊँ होली महोत्सव में दिखा उत्साह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी काली कुमाऊँ होली रंग महोत्सव और लोहाघाट में आयोजित होली मिलन समारोह में भी शामिल हुए. यहां उन्होंने जनता से आत्मीय संवाद किया. ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों के बीच आयोजित कार्यक्रमों में उमड़ी भीड़ ने माहौल को उत्साह से भर दिया.
खटीमा में होली मिलन की ऐतिहासिक झलक
खटीमा में आयोजित होली मिलन समारोह भी जनसमर्थन और जनविश्वास का बड़ा प्रमाण बना. बड़ी संख्या में लोग अपने मुख्यमंत्री के साथ होली खेलने पहुंचे. ढोल-नगाड़ों की गूंज, रंगों से सराबोर माहौल और “धामी ज़िंदाबाद” के नारों के बीच यह आयोजन जनता और नेतृत्व के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया.
आस्था और विकास के साथ आगे बढ़ता उत्तराखंड
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सनातन संस्कृति और आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि देवभूमि के मूल स्वरूप और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
होली के अवसर पर आयोजित ये कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं रहे, बल्कि आस्था, संस्कृति, विकास और जनविश्वास के समन्वय का संदेश भी देते नजर आए. कार्यक्रमों में उमड़ी भीड़ यह संकेत देती है कि उत्तराखंड की जनता अपने मुख्यमंत्री के साथ विकास और सांस्कृतिक पहचान दोनों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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