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फर्जी पोंजी स्कीम पर लगाम लगाने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

Updated at : 29 Jul 2019 6:13 PM (IST)
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फर्जी पोंजी स्कीम पर लगाम लगाने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

नयी दिल्ली : फर्जी पोंजी स्कीम के नाम पर लोगों विशेषकर गरीबों को झूठे सपने दिखाकर उनकी गाढ़ी कमाई लूटने वाले लोगों की शामत आने वाली है क्योंकि ऐसे लोगों एवं कंपनियों पर लगाम कसने वाले एक विधेयक को सोमवार को संसद की मंजूरी मिल गयी. राज्यसभा ने ऐसी योजनाओं पर लगाम कसने के प्रावधानों […]

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नयी दिल्ली : फर्जी पोंजी स्कीम के नाम पर लोगों विशेषकर गरीबों को झूठे सपने दिखाकर उनकी गाढ़ी कमाई लूटने वाले लोगों की शामत आने वाली है क्योंकि ऐसे लोगों एवं कंपनियों पर लगाम कसने वाले एक विधेयक को सोमवार को संसद की मंजूरी मिल गयी.

राज्यसभा ने ऐसी योजनाओं पर लगाम कसने के प्रावधानों वाले अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विधेयक, 2019 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया. उच्च सदन ने इससे संबंधित अध्यादेश को निरस्त करने संबंधी विपक्ष के प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज कर दिया. यह विधेयक लोकसभा में पिछले सप्ताह ही पारित किया जा चुका है. यह विधेयक कानून बनने के बाद इस संबंध में इस साल 21 फरवरी को लाये गये अध्यादेश का स्थान लेगा. उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि गरीबों से जुड़े इस विधेयक पर सभी दलों का समर्थन यह दर्शाता है कि गरीबों की गाढ़ी कमाई का पैसा लूटने का प्रयास करने वालों के खिलाफ संसद एकजुट है. उन्होंने कहा कि गरीबों का पैसा लूटकर कोई बच नहीं सकता और इस विधेयक में ऐसे प्रावधान किये गये हैं.

ठाकुर ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से पोंजी योजनाओं की बुराई को समाप्त करने के लिए विधायी प्रावधानों को मजबूत बनाया गया है और खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में नियम राज्य सरकारों के माध्यम से बनेंगे. इससे राज्य एवं केंद्र दोनों सरकारों को ताकत मिलेगी. ठाकुर ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि संबंधित अदालत में ऐसे मामले जाने के बाद उसे 180 दिनों के भीतर निस्तारित किया जायेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पोंजी स्कीम संबंधी कंपनियों के बारे में जो राष्ट्रीय डाटा बेस बनाया जायेगा उसमें किसी जमाकर्ता के बारे में कोई जानकारी नहीं डाली जायेगी. इसमें अविनियमित कंपनियों और उन्हें चलाने वाले लोगों के बारे में जानकारी दी जायेगी ताकि लोग उनके बारे में समुचित ब्योरा हासिल कर ऐसी योजनाओं के झांसे में न फंस सकें.

चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने पश्चिम बंगाल में ऐसी बहुत सारी योजनाओं के चलाये जाने का जिक्र किया था. इसका उल्लेख करते हुए ठाकुर ने कहा कि वह किसी राज्य की चर्चा नहीं करना चाहते क्योंकि देश में कहीं भी और किसी भी राज्य में यदि गरीब को लूटा जाता है तो यह सरकार और पूरे देश के लिए चिंता की बात है. उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि इन योजनाओं को लेकर किसी भी व्यक्ति को ऐसा प्रचार या विज्ञापन नहीं करना चाहिए जो सत्य पर आधारित नहीं हो. उन्होंने कहा कि इस परिभाषा में सभी लोग आ जाते हैं चाहें वे कोई राजनीतिक नेता हों, फिल्म अभिनेता हों या कोई खिलाड़ी हों.

विधेयक में प्रावधान किया गया है कि पुलिस अविनियमित पोंजी कंपनी चलाने वाले परिसरों या व्यक्तियों के घरों पर बिना वारंट के छापे मार सकती है या उनकी संपत्ति कुर्क कर सकती है. विधेयक में अविनियमित पोंजी स्कीम चलाने के अपराध में एक साल से 10 साल तक जेल की सजा तथा दो लाख से 50 करोड़ रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है. विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में जब्त की गयी धनराशि पर पहला अधिकार जमाकर्ताओं का होगा. विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसमें रियल एस्टेट, संबंधियों या मित्रों से संकट पड़ने पर धन या उधार या जमा लेने पर कोई रोक नहीं होगी.

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