ePaper

बाल विवाह के खिलाफ भारत जीत रहा है जंग, 51 फीसदी कमी दर्ज : रिपोर्ट

Updated at : 30 May 2019 4:57 PM (IST)
विज्ञापन
बाल विवाह के खिलाफ भारत जीत रहा है जंग, 51 फीसदी कमी दर्ज : रिपोर्ट

नयी दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय संगठन सेव दि चिल्ड्रेन की वैश्विक बचपन रिपोर्ट 2019 में इस बात का खुलासा हुआ है कि बाल विवाह को रोकने के लिए देश में उल्लेखनीय कार्य किया गया. रिपोर्ट के अनुसार 15-19 वर्ष आयु की विवाहित लड़कियों की संख्या वर्ष 2000 की तुलना में 51फीसदी कम हुई है, वहीं वर्ष […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय संगठन सेव दि चिल्ड्रेन की वैश्विक बचपन रिपोर्ट 2019 में इस बात का खुलासा हुआ है कि बाल विवाह को रोकने के लिए देश में उल्लेखनीय कार्य किया गया. रिपोर्ट के अनुसार 15-19 वर्ष आयु की विवाहित लड़कियों की संख्या वर्ष 2000 की तुलना में 51फीसदी कम हुई है, वहीं वर्ष 1990 की तुलना में यह 63 फीसदी कम हुई है. अगर बाल विवाह की दर में कमी नहीं आयी होती तो, आज भारत में विवाहित लड़कियों की संख्या 90 लाख से ज्यादा होती, ऐसा रिपोर्ट का कहना है.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस)-4 (2015-16) के मुताबिक, 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली 20-24 वर्ष की महिलाओं का प्रतिशत 26.8 है, जो कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस)-3 (2005-06) में 47.4 था. यह घटता हुआ ट्रेंड दिखाता है. हालांकि आज भी शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की दर ज्यादा है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए 15-19 वर्ष आयुवर्ग के लिए यह आंकड़ा क्रमश: 14.1 और 6.9 फीसदी है. बाल विवाह के मामले में राज्यवार और आर्थिक स्थितियों में भी फर्क मौजूद है.

बचपन सूचकांक पर 137 प्वॉइंट्स के स्कोर 632 से 769 के साथ भारत में नाबालिग उम्र में मां बनने के मामलों में वर्ष 2000 से 63 फीसदी और 1990 से 75 फीसदी की कमी आयी है. इस कमी का नतीजा है कि 2000 की तुलना में अब भारत में नाबालिग मां बनने के मामलों में 20 लाख की कमी आयी है. (35 लाख से 14 लाख).

सेव दि चिल्ड्रेन की सीईओ बिदिशा पिल्लई ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘इस सूचकांक में भारत की उपलब्धि निश्चित तौर पर आने वाली पीढ़ी पर चौतरफा असर डालेगी. हालांकि हम प्रगति को राष्ट्रीय औसत के आंकड़ों से मिलाकर देख रहे हैं, इसलिए हमें तुरंत ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों व संपदा के मामले में लोगों के बीच पाए जाने वाले अंतर को कम करने पर फोकस करना होगा. सर्वाधिक वंचित बच्चों,जिन तक पहुंचना हमेशा ही सबसे मुश्किल होता है, उन तक अपनी पहुंच बनाने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है.

सेव दि चिल्ड्रेन बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था है और यह पिछले सौ वर्षों से काम कर रही है. आज यह संस्था बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली अग्रणी गैर सरकारी संस्था है, जिसके 12 राज्यों में कार्यालय हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola