अब तक किसी पार्टी को नहीं मिला 50% से अधिक वोट शेयर
Updated at : 14 Apr 2019 6:09 AM (IST)
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कांग्रेस का अब तक का सबसे अधिक वोट शेयर 48% 1984 के चुनावों में रहा था बीजेपी का पहली बार 10% से अधिक वोट शेयर 1989 के चुनावों में हुआ था 2014 में बीजेपी का वोट शेयर पहली बार 30 फीसदी से अधिक का रहा था जब भी चुनाव होता है तो उसके बाद विश्लेषक […]
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- कांग्रेस का अब तक का सबसे अधिक वोट शेयर 48% 1984 के चुनावों में रहा था
- बीजेपी का पहली बार 10% से अधिक वोट शेयर 1989 के चुनावों में हुआ था
- 2014 में बीजेपी का वोट शेयर पहली बार 30 फीसदी से अधिक का रहा था
जब भी चुनाव होता है तो उसके बाद विश्लेषक वोट शेयर पर चर्चा जरूर करते हैं. हाल के चुनाव परिणामों पर नजर डालें, तो देखेंगे कि भारी बहुमत से आयी सरकारों के लिए भी 50% से अधिक वोट शेयर पाना लगभग नामुमकिन सा ही है.
अब पार्टियों के लिए चुनाव जीतने की सामान्य रणनीति है कि स्मार्ट तरीके से वोट शेयर हासिल किया जाए, क्योंकि कभी-कभी 20% से कम वोट शेयर वाली पार्टियां भी प्रधानमंत्री दे सकती हैं.
1951 से अब तक हुए चुनाव में किसी पार्टी को 50% से अधिक वोट शेयर नहीं मिला. पंडित जवाहर लाल नेहरू के जमाने में भी यह आंकड़ा पार नहीं हो पाया.
1984 तक 8 आम चुनावों में सरकार बनानेवाली पार्टी का वोट शेयर 40 प्रतिशत से ज्यादा ही रहा.
जीतनेवाली पार्टी का वोट शेयर 40% से कम पहली बार 1989 में हुआ जब नेशनल फ्रंट ने जीत हासिल की थी.
1991 तक सरकार बनानेवाली पार्टी का वोट शेयर 30% से अधिक ही रहा. 1991 में कांग्रेस जीतनेवाली मुख्य पार्टी थी. वोट शेयर 30 फीसदी से कम पहली बार 1996 में रहा, जब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. तब से 2009 तक लोकसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी का वोट शेयर 30% से कम ही रहा है.
1991 के बाद पहली बार 2014 में जब बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो वोट शेयर 30% से अधिक रहा.
कांग्रेस : अब तक की कहानी ऐसी
1984 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे
तब कांग्रेस का वोट शेयर सबसे अधिक रहा. उस साल चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 48% रहा था.
कांग्रेस के वोट शेयर में पहली बार भारी गिरावट 1989 के चुनावों में देखने को मिली. इन चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर पहली बार गिरकर 40% से भी कम रह गया. 1996 में पहली बार कांग्रेस का वोट शेयर 30% से भी नीचे गया. 2009 चुनावों तक यह आंकड़ा 30 फीसदी से नीचे ही रहा, जबकि 2004 और 2009 में कांग्रेस नेतृत्व में दो बार देश में यूपीए की सरकार थी.
2014 का चुनाव कांग्रेस के लिए शर्मनाक पराजय लेकर आया. पहली बार कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 20% से भी कम रह गया.
बीजेपी : कहानी कांग्रेस से उलट है
बीजेपी की स्थिति कांग्रेस से उलट रही है और धीरे-धीरे भगवा पार्टी ने अपनी पैठ बनायी. पहली बार 1989 में बीजेपी का वोट शेयर 10% से अधिक पहुंचा था.
1991 के चुनावों में पहली बार बीजेपी का वोट शेयर 20% से अधिक रहा और 2004 में सत्ता गंवाने के बाद भी यह आंकड़ा कमोबेश समान ही रहा.
2009 में पहली बार बीजेपी को बड़ा झटका लगा और वोट शेयर 20% से भी कम रह गया.2014 चुनाव बीजेपी के अब तक के इतिहास का सबसे सफल चुनाव रहा है. पहली बार 1991 के बाद किसी पार्टी को 30% से अधिक वोट शेयर मिला.
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