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रोहिंग्या मामला: सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार, सात रोहिंग्या भेजे जाएंगे म्यांमार

Updated at : 04 Oct 2018 11:06 AM (IST)
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रोहिंग्या मामला: सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार, सात रोहिंग्या भेजे जाएंगे म्यांमार

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार को सात रोहिंग्या लोगों को म्यांमार वापस भेजने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक नयी याचिका दायर की गयी जिसपर आज सुनवाई हुई. मामले में केंद्र सरकार के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सात रोहिंग्याओं […]

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नयी दिल्ली : केंद्र सरकार को सात रोहिंग्या लोगों को म्यांमार वापस भेजने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक नयी याचिका दायर की गयी जिसपर आज सुनवाई हुई. मामले में केंद्र सरकार के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सात रोहिंग्याओं को अवैध आप्रवासी पाया गया और म्यांमार ने उन्हें अपने नागरिक के रूप में स्वीकार कर लिया है. रोहिंग्याओ के निर्वासन पर कोर्ट ने कहा कि हम किये जा चुके फैसले में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं. केंद्र ने कोर्ट से कहा कि सात रोहिंग्याओं को विदेशी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था.

केंद्र ने कहा कि म्यामां ने सात रोहिंग्याओं के निर्वासन को सुगम बनाने के लिए एक महीने का वीजा और पहचान प्रमाण पत्र जारी किया है. प्रशांत भूषण ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट को रोहिंग्याओं के जीवन के अधिकार की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए जिसपर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास है और किसी को इसे याद दिलाने की आवश्‍यकता नहीं है.

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बुधवार को प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षतावाली पीठ कहा था कि वह आवेदन पर विचार करने के बाद ही इस मामले की तुरंत सुनवाई पर फैसला देगी. यहां चर्चा कर दें कि प्रधान न्यायाधीश ने अपने कामकाज के पहले दिन बुधवार को वकीलों के समक्ष स्पष्ट किया कि वह ऐसे मामलों में मानदंड तय होने तक उनके तुरंत सुनवाई की अनुमति नहीं देगी. पीठ में न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ भी शामिल थे.
बुधवार को अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि इन रोहिंग्या लोगों को स्वदेश वापस भेजा जा रहा है अत: इस मामले की तुरंत सुनवाई जरूरी है. पीठ ने कहा, तुरंत सुनवाई के लिए किसी मामले का उल्लेख नहीं. हम मानदंड तय करेंगे फिर देखेंगे कि मामलों का उल्लेख किस प्रकार होगा. पीठ ने कहा कि मौत की सजा की तामिल और बेदखली के मामलों की ही तुरंत सुनवाई हो सकती है.

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शुरुआत में पीठ ने भूषण से कहा कि वह याचिका दायर करें. भूषण के इस जवाब पर कि अर्जी दी जा चुकी है, पीठ ने कहा कि हम इस पर विचार करेंगे और फिर फैसला लेंगे. गौर हो कि असम में अवैध तरीके से रह रहे सात रोहिंग्या को म्यांमार वापस भेजने के केंद्र के फैसले को चुनौती देते हुए नयी याचिका दायर की गयी थी. इन लोगों को गुरुवार को म्यांमार वापस भेजा जाना है.
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