अब बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम के लिए आधार जरूरी नहीं, जानें कुछ महत्वपूर्ण बातें

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Sep 2018 8:06 AM

विज्ञापन

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी बायोमेट्रिक पहचान योजना को संवैधानिक रूप से वैध ठहराते हुए कहा कि आधार न तो ‘निगरानी राज्य’ बनाता है और न ही इससे निजता के अधिकारों का उल्लंघन होता है. हालांकि, न्यायालय ने बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और स्कूल में बच्चों के प्रवेश […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी बायोमेट्रिक पहचान योजना को संवैधानिक रूप से वैध ठहराते हुए कहा कि आधार न तो ‘निगरानी राज्य’ बनाता है और न ही इससे निजता के अधिकारों का उल्लंघन होता है. हालांकि, न्यायालय ने बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और स्कूल में बच्चों के प्रवेश आदि के लिये इसकी अनिवार्यता संबंधी प्रावधान को निरस्त करके विवादास्पद आधार का दायरा सीमित कर दिया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधार को लेकर दिये गये फैसले की मुख्य बातें आप भी जानें…

– न्यायालय ने ‘आधार’ की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है.

– विवादित बायोमीट्रिक पहचान परियोजना के दायरे को सीमित करते हुए कहा कि यह बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और विद्यालय के दाखिले में जरूरी नहीं होगा.

– न्यायालय ने कहा कि आधार अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं जो व्यक्ति के निजता के अधिकार का उल्लंघन करता हो.

– आधार योजना के प्रमाणीकरण में पर्याप्त सुरक्षा तंत्र है.

– आयकर (आई-टी) रिटर्न दाखिल करने और स्थायी खाता संख्या (पीएएन) के आवंटन के लिये आधार अनिवार्य है.

– न्यायालय ने आधार अधिनियम 2016 की धारा 57 को रद्द कर दिया जो टेलीकॉम कंपनियों या कॉरपोरेट कंपनियों जैसी निजी संस्थाओं को आधार का बायोमीट्रिक आंकड़ा इस्तेमाल करने की इजाजत देता है.

– आधार प्रमाणीकरण आंकड़ों को छह महीने से ज्यादा वक्त के लिये नहीं रखा जा सकता.

– मजबूत डाटा सुरक्षा व्यवस्था को जितनी जल्दी हो सके अमल में लाया जाएगा.

-आधार संख्या उपलब्ध न करा पाने की सूरत में किसी बच्चे को योजनाओं का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता.

– सरकार को अवैध अप्रवासियों को आधार न देने का निर्देश दिया गया है.

– पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 4:1 के अनुपात में आधार विधेयक को लोकसभा में धन विधेयक के तौर पर पारित किये जाने को बरकरार रखा.

– यह विद्यालयों में दाखिले, मेडिकल में दाखिले के लिये केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की परीक्षाओं के लिये अनिवार्य नहीं होगा.

– साढ़े चार महीनों तक 31 याचिकाओं पर चली मैराथन 38 सुनवाइयों के बाद यह फैसला सुनाया गया.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola