भारत का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 फिर टला

Updated at : 05 Aug 2018 12:53 PM (IST)
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भारत का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 फिर टला

नयी दिल्ली : चांद पर उतरने के भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को एक बार फिर से टाल दिया गया है. चंद्रयान-2 को इससे पहले अक्तूबर में ही भेजा जाना था लेकिन अब भारत का यह सपना जनवरी 2019 से पहले पूरा नहीं हो पाएगा. एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी है. […]

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नयी दिल्ली : चांद पर उतरने के भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को एक बार फिर से टाल दिया गया है. चंद्रयान-2 को इससे पहले अक्तूबर में ही भेजा जाना था लेकिन अब भारत का यह सपना जनवरी 2019 से पहले पूरा नहीं हो पाएगा. एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक साल के भीतर दो बड़ी असफलताओं को झेल चुका है और ऐसे में चंद्रयान-2 मिशन को भी टालने का फैसला लिया गया है. चंद्रयान-2 को सबसे पहले अप्रैल में ही पृथ्वी से रवाना किया जाना था. इस साल की शुरुआत में इसरो ने सैन्य उपग्रह जीएसएटी-6ए प्रक्षेपित किया था लेकिन इस उपग्रह के साथ इसरो का संपर्क टूट गया था. इसके बाद इसरो ने फ्रेंच गुयाना से प्रक्षेपित होने वाले जीएसएटी-11 के प्रक्षेपण को यह कहते हुए टाल दिया था कि इसकी कुछ अतिरिक्त तकनीकी जांच की जाएगी.

पिछले साल सितंबर में आईआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह को लेकर जा रहे पीएसएलवी-सी39 मिशन अभियान भी असफल रहा था क्योंकि इसका हीट शील्ड नहीं खुलने की वजह से उपग्रह नहीं छोड़ा जा सका. इन दो बड़ी असफलता के बाद इसरो चंद्रयान-2 के साथ एहतियात बरत रहा है क्योंकि चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन के बाद चंद्रयान-2 इसरो के लिए एक बहुत बड़ा मिशन है. किसी भी खगोलीय पिंड पर उतरने का इसरो का यह पहला मिशन है.

अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, “ हम कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहते हैं.” उन्होंने बताया कि अब चंद्रयान-2 मिशन को जनवरी में रवाना किया जा सकता है. इसरो के अध्यक्ष के सिवन से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. अप्रैल में सिवन ने सरकार को अक्तबूर-नवंबर में होने वाले प्रक्षेपण को टालने की सूचना दी थी.

चंद्रयान-2 की समीक्षा करनेवाली एक राष्ट्रीय स्तर की समिति ने इस मिशन से पहले कुछ अतिरिक्त परीक्षण की सिफारिश की थी. चंद्रयान-2 चांद पर रोवर उतारने की इसरो की पहली कोशिश है. इस पर करीब 800 करोड़ का खर्चा आया है और यह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। चांद के इस हिस्से की ज्याद जांच-पड़ताल अब तक नहीं हुई है.

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