ePaper

''रहम मी लॉर्ड, रहम! सीतापुर में कुत्तों ने नहीं ली है बच्चों की जान''

Updated at : 08 Jun 2018 5:23 PM (IST)
विज्ञापन
''रहम मी लॉर्ड, रहम! सीतापुर में कुत्तों ने नहीं ली है बच्चों की जान''

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में कुत्तों के काटने से अनेक बच्चों की मौत के बाद से आवारा कुत्तों को कथित रूप से मारने का अभियान रोकने का प्राधिकारियों को निर्देश देने से शुक्रवार को इंकार कर दिया. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में कुत्तों के काटने से अनेक बच्चों की मौत के बाद से आवारा कुत्तों को कथित रूप से मारने का अभियान रोकने का प्राधिकारियों को निर्देश देने से शुक्रवार को इंकार कर दिया. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इस मामले में जुलाई में सुनवाई की जायेगी. इस मामले में एक पक्ष की ओर से पेश वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि जिले में कुत्तों को मारने की गतिविधयां रोकने के लिए प्राधिकारियों को अंतिरम आदेश दिया जाये. इस पर पीठ ने कहा कि हम अभी कोई निर्देश नहीं दे रहे हैं. हम जुलाई में इस मामले को देखेंगे.

इसे भी पढ़ें : आवारा कुत्ते ने बच्चा समेत 12 लोगों को किया घायल

इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही वकील ने आरोप लगाया कि सीतापुर जिले में सिर्फ भय की वजह से आवारा कुत्ते गैर-कानूनी तरीके से मारे जा रहे हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि जिलाधिकारी ने बयान दिये थे कि बच्चों को आवारा कुत्तों ने मारा था. वकील ने दलील दी कि एक समिति बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सीतापुर गयी थी और उसने कहा कि कुत्तों ने किसी भी बच्चे को नहीं मारा है और शायद कोई अन्य वन्य जीव इन बच्चों की हत्या के लिए जिम्मेदार है.

इससे पहले एक अन्य वकील ने शीर्ष अदालत से कहा था कि सीतापुर जिले में बच्चों के मारे जाने के बारे में दो परस्पर विरोधी रिपोर्ट हैं. अदालत इससे पहले सीतापुर जिले में बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों के कथित रूप से मारे जाने के मुद्दे पर गार्गी श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया था. याचिका में राज्य सरकार को यह तय करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि जिले में अब और कुत्ते नहीं मारे जायें.

याचिका में दावा किया गया है कि शीर्ष अदालत ने 18 नवंबर, 2015 के आदेश में स्थानीय प्रशासन और पंचायतों को आवारा कुत्तों को नहीं मारने का स्पष्ट निर्देश दिया था. याचिका में राज्य सरकार को उन व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जिन्होंने आवारा कुत्तों को मारने के लिए उकसाने या इस काम में मदद करने में भूमिका निभायी है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola