कर्नाटक चुनाव : पानी की कमी से बोरवेल फेल, किसान बने मजदूर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
Updated:
विज्ञापन
बेंगलुरु से अजय कुमार बेंगलुरु-मैसूर हाइवे पर गाड़ियां सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हैं. खूबसूरत नजारा. सड़क के दोनों किनारे नारियल के घने पेड़. खेतों में फैले धान के पौधे. बीच-बीच में आलीशान बिल्डिंग्स. आप इस विकास पर इतरा सकते हैं. पर ठहरिये. चलते हैं -माचेहल्ली. यह हाइवे से 10 किमी […]
विज्ञापन
बेंगलुरु से अजय कुमार
बेंगलुरु-मैसूर हाइवे पर गाड़ियां सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हैं. खूबसूरत नजारा. सड़क के दोनों किनारे नारियल के घने पेड़. खेतों में फैले धान के पौधे. बीच-बीच में आलीशान बिल्डिंग्स. आप इस विकास पर इतरा सकते हैं. पर ठहरिये. चलते हैं -माचेहल्ली. यह हाइवे से 10 किमी अंदर का गांव है.
बिहार-झारखंड के गांवों से एकदम अलग. साफ-सुथरी और अच्छा. जैसे ही आप माचेहल्ली में जाते हैं ,तो दिमाग में सवाल कौंधता है बेंगलुरु से 70 किमी दूर कोई गांव ऐसा भी हो सकता है? बदहाल और बेबस. गांव में हम मिलते हैं जयम्मा से. वह घर के पास लकड़ी बिन रहीं थीं. कुछ महीने पहले ही उनके 22 साल के बेटे जयराम ने फांसी लगाकर जान दे दी. उसके कुछ दिनों बाद ही जयम्मा के पति गोविंद राजू गायब हो गये, अचानक.
खोजबीन में 11वें दिन खेत में लाश मिली. उन्होंने जहर पी लिया था. यह सब बयां करते जयम्मा की आंखें भर गयीं. उनके तीन बेटों में से एक ने फांसी लगा ली. दो बेंगलुरु में मजदूरी करते हैं. वे गृहस्थी में मां को भूल गये. पैसे नहीं भेजते. जयम्मा का घर भैंस के दूध से चलता है. एक भैंस है. एक दिन में चार लीटर दूध में वह तीन लीटर 20 रुपये लीटर के हिसाब से बेच देती हैं. यानी साठ रुपये रोज.
गम और गुरबत में रहने को मजबूर किसान
पढ़ाई छूटी, हर्षिता ने दे दी जान
जयम्मा और अन्य महिलाओं ने फोटो दिखा कर बताया यह हर्षिता है. वह बेंगलुरु में रहकर पढ़ती थी. खेतीबारी चौपट हुई, तो उसे परिवार ने गांव बुला लिया. वह पढ़ना चाहती थी. जब उसे यकीन हो गया कि कुछ नहीं कर सकते, तो उसने जान दे दी. वह परिवार की इकलौती संतान थी. गांव की महिलाओं को लगता है कि इनकी हालत खराब की वजह नसीब है. हालांकि उन्हें सरकारी प्रति व्यक्ति सात किलो चावल मिलता है. पेंशन भी.
दो दिन में एक बार पानी
300 घरोंवाले गांव में पेयजल दो दिनों पर आधे घंटे के लिए आता है. इतने में किसी का काम नहीं चलता. जिसके पास पैसा है, वह जार का पानी पीते हैं. खेतों के हाल खराब हैं. बारिश हुई, तो ठीक वरना किसान से मजदूर बनना तय. गांव के महेश गौड़ा कहते हैं, बोरवेल लगाने में 45 हजार लगते हैं. उनके तीन बोरवेल बेकार हो गये. खेत तबाह होने पर वह मद्दुर के होटल में काम करते हैं. शिवन्ना, चेन्नई गौड़ा- सबकी एक ही कहानी है.
कर्ज से गांव में सब परेशान
नागराज के बेटे लिंगराज ने साल भर पहले 26 जुलाई को फांसी लगा ली. चार लाख का कर्ज था. लिंगराज के घर मिली रमन्ना की बेटी रोजा गौड़ाने बताया कि पिता पर कर्ज था. खुदुकशी कर ली. परिवार में छोटा भाई राकेश ही कमानेवाला है. आधा एकड़ जमीन है. पर वह किसी काम की नहीं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










