4 वरिष्ठतम जजों को मिला 4 रिटायर्ड जजों का साथ, चीफ जस्टिस को लिखा खुला पत्र : पारदर्शी तरीके से हो केसों का आवंटन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jan 2018 9:04 AM

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट प्रशासन पर सवाल उठाने वाले चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों को चार रिटायर्ड जजों का समर्थन मिला है. रविवार को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पीबी सावंत, दिल्ली हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एपी शाह, मद्रास हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के चंद्रू और बंबई हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच सुरेश ने प्रधान […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट प्रशासन पर सवाल उठाने वाले चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों को चार रिटायर्ड जजों का समर्थन मिला है. रविवार को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पीबी सावंत, दिल्ली हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एपी शाह, मद्रास हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के चंद्रू और बंबई हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच सुरेश ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को खुला पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि वह मामलों के आवंटन को लेकर शीर्ष न्यायालय के चार न्यायाधीशों द्वारा उठाये गये मुद्दों से सहमत हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि इस संकट को न्यायपालिका के अंदर ही सुलझाये जाने की जरूरत है.

जस्टिस शाह ने पत्र लिखे जाने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा जाहिर किया गया विचार ठीक वैसा ही है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जाहिर किया था. एसोसिएशन ने कहा था कि इस संकट के हल होने तक महत्वपूर्ण विषयों को वरिष्ठ जजों की पांच सदस्यीय एक संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिए.

इस पत्र में कहा गया है कि संवेदनशील और अहम मुद्दों का आवंटन तार्किक और पारदर्शी तरीके से किये जाने चाहिए. इसके लिए स्पष्ट नियम कायदे निर्धारित किये जाने चाहिए, जो तार्किक, निष्पक्ष और पारदर्शी हों.

सीजेआइ से मिले एससीबीए अध्यक्ष, सौंपा प्रस्ताव, मिला भरोसा : कोर्ट में कायम होगा सौहार्द

चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पैदा हुए संकट को दूर करने की कोशिश तेज हो गयी है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष विकास सिंह ने रविवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा से मुलाकात की और शीर्ष न्यायालय में संकट को लेकर उन्हें एक प्रस्ताव सौंपा. सिंह ने बताया कि मैं प्रधान न्यायाधीश से मिला और प्रस्ताव की प्रति उन्हें सौंपी. सीजेआइ मिश्रा ने कहा कि वह इस पर गौर करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में जल्द-से-जल्द सौहार्द कायम करेंगे.

लंबित मामलों का निबटारा संविधान पीठ करे

पत्र में कहा गया है कि सभी संवेदनशील और लंबित अहम मामलों का निबटारा शीर्ष न्यायालय के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ करे. सिर्फ इसी तरह के उपाय से लोगों में यह भरोसा आयेगा कि सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है और प्रधान न्यायाधीश की ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ के तौर पर शक्तियों का अहम और महत्वपूर्ण मामलों में कोई खास नतीजा प्राप्त करने के लिए दुरुपयोग नहीं हो रहा है. इसलिए, हम आपसे इस सिलसिले में फौरन कदम उठाने का अनुरोध करते हैं.

बीसीआइ की समिति जस्टिस मिश्रा से मिली, चर्चा की

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) की एक समिति ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा से मुलाकात की और शीर्ष न्यायपालिका में चल रहे संकट पर चर्चा की. जस्टिस मिश्रा को सीजेआइ ने विशेष सीबीआइ जज बीएच लोया की मौत से जुड़ी एक जनहित याचिका सौंपी थी, जो सोहराबुद्दीन शेख कथित मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे. इससे पहले, समिति ने जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस एएम खानविलकर और शीर्ष न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों से मुलाकात की. सूत्रों ने बताया कि शीर्ष न्यायालय के दो न्यायाधीशों (जस्टिस एसए बोबदे और जस्टिस एल नागेश्वर राव) ने जस्टिस चेलमेश्वर से मुलाकात की है, जिन्होंने शुक्रवार को एक अभूतपूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस में चार जजों का नेतृत्व किया था.

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