पत्थरबाजों पर जैन मुनि का बड़ा हमला, कहा, देश का खाते हैं और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं, गद्दार नहीं तो और क्या हैं?

Updated at : 30 Jun 2017 10:27 AM (IST)
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पत्थरबाजों पर जैन मुनि का बड़ा हमला, कहा, देश का खाते हैं और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं, गद्दार नहीं तो और क्या हैं?

सीकरः क्रांतिकारी जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने जम्मू-कश्मीर में बिगड़े हालात के मद्देनजर पत्थरबाजों पर बड़ा हमला किया है. उन्होंने कहा कि भारत में रह कर पाकिस्तान से फैलाये जा रहे आतंकवाद का समर्थन करना देश से गद्दारी है. उन्होंने कहा कि आतंकवादी हिंसा सबसे बुरी होती है. जैन मुनि ने कहा कि […]

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सीकरः क्रांतिकारी जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने जम्मू-कश्मीर में बिगड़े हालात के मद्देनजर पत्थरबाजों पर बड़ा हमला किया है. उन्होंने कहा कि भारत में रह कर पाकिस्तान से फैलाये जा रहे आतंकवाद का समर्थन करना देश से गद्दारी है. उन्होंने कहा कि आतंकवादी हिंसा सबसे बुरी होती है.

जैन मुनि ने कहा कि आतंकवादी कभी सामने से प्रहार नहीं करता. वह भेड़िये की तरह पीछे से वार करता है. इसलिए पाकिस्तान ने हमारे देश में गद्दार तैयार किये हैं. जैन मुनि ने कहा कि पाकिस्तान में जितने आतंकवादी हैं, उससे ज्यादा हमारे देश में गद्दार बैठे हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग देश का खाते हैं और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं, वे गद्दार नहीं तो और क्या है?

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गुरुवार को पिपराली स्थित वैदिक आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में में तरुण सागर ने कहा कि जिन नेताओं को विभिन्न मामलों में कोर्ट ने सजा सुना चुकी है, उनके चुनाव लड़ने पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन नेताओं पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनकी सुनवाई सबसे पहले होनी चाहिए.

ओजस्वी भाषण से लोगों को उद्वेलित कर देनेवाले मुनि तरुण सागर ने कहा कि युवाओं को अपनी कमाई का एक फीसदी हिस्सा माता-पिता को देना चाहिए, ताकि उन्हें दान-पुण्य करने के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़े.

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जैन मुनि ने देश में व्याप्त विसंगतियों पर चोट करते हुए कहा, ‘लोग कहते हैं कि भारत गरीब देश है. मैं कहता हूं कि भारत गरीब नहीं है. मेरा मानना है कि देश में गरीबी नहीं, गैर बराबरी है. यहां ज्यादातर संपदा 100-200 परिवारों में सिमटी है.’ उन्होंने अपने कड़वे प्रवचनों के सवाल पर कहा कि कड़वाहट उनके प्रवचनों में नहीं, समाज और लोगों के आपसी संबंधों में घुल गयी है. इसलिए लोगों को उनके प्रवचन कड़वे लगते हैं.

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