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टीबी हारेगा, देश जीतेगा का नारा दवा के अभाव में पड़ गया मंद

Updated at : 31 Jul 2024 10:56 PM (IST)
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Electoral Roll Revision

चार माह से टीबी की दवा के लिए भटक रहे मरीज, प्रयाप्त मात्रा में दवा उपलब्ध नहीं रहने से मरीज परेशान

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कटिहार. देश से यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर सरकार कई योजनाएं चल रही है. यहां तक की टीबी हारेगा, देश जीतेगा का नारा जोर-शोर से दिया जा रहा है. सरकार देश से 2025 तक टीबी उन्मूलन को लेकर हर कोशिश में लगी है. लेकिन यह नारा सिर्फ बैनर पोस्टर पर ही सिमट कर रह गया है. कारण है कि पिछले चार महीने से जिले के टीबी मरीजों को टीबी की दवाई ही नहीं मिल पा रही है. यहां तक की बाहर मेडिकल में भी टीबी की दवाई खरीदारी करने के लिए मरीज को भटकना पड़ रहा है. आलम ऐसा है कि पैसे देकर भी बाहर आसानी से दवाई नहीं मिल पा रही है. दरअसल जिले में टीबी ग्रसित मरीजों के लिए फोरएफडीसी दवाई समाप्त हो गयी है. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जो टीबी ग्रसित मरीज रजिस्टर्ड है. उन्हें ही दवाई मिल पा रही है. इसमें भी कई प्रखंड है जहां पर दवाई उपलब्ध ही नहीं है. जिस कारण से मरीजों को घोर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा जो निजी क्लीनिक में अपना इलाज करवा रहे हैं. ऐसे मरीजों को तो पिछले एक अप्रैल से ही फोरएफडीसी तथा थ्रीएफडीसी दवाई निर्गत नहीं कराया जा रहा है. ऐसे में सरकार का टीबी हारेगा देश जीतेगा जैसे कथन गलत साबित हो रहा है. क्योंकि जिले में टीबी ग्रसित मरीज के लिए दवाई आपूर्ति ही नहीं हो पा रही है. इस संदर्भ में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ अशरफ रिजवी ने बताया कि पिछले एक अप्रैल से जो बाहरी निजी क्लीनिक में टीबी ग्रसित मरीज अपना इलाज करवा रहे हैं. ऐसे मरीज को दवाई निर्गत नहीं कराई जा रही है. इससे पहले सरकारी स्वास्थ्य केंद्र हो या निजी प्राइवेट क्लीनिक जहां पर भी टीबी ग्रसित मरीजों का उपचार होता था. उन्हें प्रिपकेशन के आधार पर निकटम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर आसानी से निशुल्क दवाई उपलब्ध करा दी जाती थी. लेकिन अप्रैल महीने से जिला में फोरएफडीसी थ्रीएफडीसी दवाई जितना उपलब्ध होना चाहिए उतना उपलब्ध नहीं है. कुछ दवाई आती है तो उन्हें वितरण किया जाता है. लेकिन मरीज को जिस प्रकार से दवाई मिलनी चाहिए. वह नहीं मिल पा रही है. ऐसे में जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर टीबी ग्रसित मरीज रजिस्टर्ड है. उन्हें ही दवाई निर्गत कराई जा रही है. लेकिन जो प्राइवेट क्लीनिक अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं. उन्हें फोरएफडीसी की दवाई उनके लिए उपलब्ध नहीं है.

जिले में टीबी ग्रसित एक्टिव मरीजों की संख्या है 3187

जिले में अप्रैल महीने से ही टीवी ग्रसित मरीजों को दवाई नहीं मिल पा रही है. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के अलावा निजी प्राइवेट क्लिनिकों में कुल मिला कर जिले में 3187 टीबी ग्रसित मरीज एक्टिव है. टीबी ग्रसित मरीजों की पहचान होने के बाद नियमित तौर पर दवाई का पूरा कोर्स सेवन करने से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है. लेकिन अभी दवाई नहीं मिलने से मरीजों की काफी परेशानी बढ़ी हुई है. इसके अलावा जिला यक्ष्मा विभाग के अधिकारी भी काफी परेशान है. इसका कारण है कि जो टीबी ग्रसित मरीज की पहचान हो पाई है. उन्हें नियमित तौर पर दवाई का सेवन करना है. यदि नियमित तौर पर दवाई का सेवन नहीं हो पाया तो ऐसे में मरीज की हालत और बिगड़ेगी और पिछला जितना भी उनका उपचार हो पाया है. उसका कोई फायदा नहीं होगा. वर्तमान की बात करें तो जिले में 3187 टीबी ग्रसित मरीजों की पहचान हुई है. जिसे सभी को दवाई का सेवन करना है. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर दवाई उपलब्ध नहीं होने से मरीज बाहर मेडिकल में दवाई खरीदारी करने के लिए पहुंच रहे हैं. लेकिन वहां पर भी उन्हें दवाई नहीं मिल पा पड़ी है. ऐसा इसलिए क्योंकि टीबी से बचाव को लेकर सभी मरीजों को निशुल्क दवाई सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध करा दी जाती थी. जिस कारण से दवाई कंपनी इस दवाई को बनाना ही बंद कर दिया. साथ ही जो दवाई बिक्री होती है. उसके लिए मेडिकल वालों को कई नियमों का पालन करना पड़ता है. मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर सभी प्रकार के दवाई निशुल्क उपलब्ध होने के कारण इस तरह की दवाई मेडिकल वाले रखने में रुचि भी नहीं रखते है. एक तो नियमों का पालन करना ऊपर से दवाई की बिक्री नहीं होना और एक्सपायरी का अलग से झंझट इन सभी कारण से कंपनियों ने जहां दवाई बनाना बंद कर दिया तो दूसरी तरफ प्राइवेट मेडिकल में भी टीबी ग्रसित रिलेटेड दवाई रखने में अपनी रुचि नहीं दखा रहे हैं. जिस कारण से बाहर भी पैसे देकर मरीज को दवाई निर्गत नहीं हो पा रही है.

कहते हैं जिला यक्ष्मा पदाधिकारी

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ अशरफ रिजवी ने बताया कि जिले में फोरएफडीसी दवाई समाप्त हो गयी है, जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर रजिस्टर्ड है. उन्हें दवाई निर्गत करायी जा रही है. दवाई को लेकर स्टेट को कई बार लिखित तौर पर अवगत भी कराया गया है. साथ ही स्थानीय स्तर पर दवाई की खरीदारी करने को लेकर कार्य किया जा रहे है. बहुत जल्द मरीजों को सभी प्रकार की दवाई सभी स्वास्थ्य केंद्र पर नि:शुल्क उपलब्ध करायी जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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