Sitamarhi : घोटाला की जांच निगरानी एवं सतर्कता विभाग से कराने की अनुशंसा

Updated at : 03 May 2025 7:27 PM (IST)
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Sitamarhi : घोटाला की जांच निगरानी एवं सतर्कता विभाग से कराने की अनुशंसा

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— वीडियो क्लिप की फॉरेंसिंक जानकार से जांच कराई जाए: एडीएम

— आंगनबाड़ी केंद्रों पर कथित घोटाले की जांच कर एडीएम ने डीएम को सौंपी रिपोर्ट

Sitamarhi : सीतामढ़ी.

जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए हर माह आवंटित खाद्यान्न व राशि में से करीब 6000 क्विंटल चावल व करीब पांच करोड़ रुपये प्रतिमाह घोटाला कर लिया जाता है. यह आरोप है जिले के बथनाहा प्रखंड के कमलदह गांव निवासी व सोशल वर्कर उमेश कुमार सिंह का. उक्त शिकायत पर डीएम रिची पांडेय ने एडीएम, विभागीय जांच कुमार धनंजय को जांच सौंपी थी. एडीएम ने डीएम को जांच रिपोर्ट सौंप दी है.

— निगरानी विभाग से ही जांच संभव

एडीएम ने रिपोर्ट में लिखा है कि प्रतिमाह 6000 क्विं. चावल व पांच करोड़ रूपये के घोटाले का आरोप है.

यह वित्तीय अनियमितता से जुड़ा जटिल मामला है. उन्होंने डीएम से कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच राज्य निगरानी एवं सतर्कता विभाग से कराने की अनुशंसा की है. एडीएम ने निगरानी अथवा वित्तीय विशेषज्ञ एवं अनुभवी ऑडिट अधिकारी/दक्ष वित्तीय लेखा अधिकारी से जांच कराने की बात कही है. एडीएम की उक्त जांच रिपोर्ट काफी चर्चा में है. आवेदक द्वारा जांच रिपोर्ट का कुछ अंश सोशल मिडिया पर वायरल कर दिया गया है.

— वीडियो की फोरेंसिक जांच जरूरी: एडीएम

घोटाले के शिकायतकर्ता सिंह ने आवेदन के साथ कुछ वीडियो क्लिप व डिजिटल बतौर साक्ष्य दिए थे. उक्त इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच किसी आईटी विशेषज्ञ/फॉरेंसिंक विज्ञान के जानकार की समिति गठित कर कराने की अनुशंसा की गई है. बता दें कि सिंह द्वारा आरोप व साक्ष्य 237 पन्नों में एवं पेन ड्राइव में वीडियो फुटेज जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था, तो आरोपों के विरूद्ध आईसीडीएस डीपीओ द्वारा 630 पन्नों में साक्ष्य/दस्तावेज जांच पदाधिकारी को सौंपी गई थी. दोनों पक्षों, कई सीडीपीओ व सेविकाओं से उनका पक्ष जानकर एवं कई केंद्रों के निरीक्षण के बाद कागजातों/दस्तावेजों के आधार पर जांच कर एडीएम द्वारा जांच रिपोर्ट डीएम को समर्पित की गई हैं.

— किराया गबन का आरोप तथ्यहीन

आवेदक सिंह का आरोप है कि सेविकाएं आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन अपने दरवाजे पर करती है. उसका किराया सेविका व सीडीपीओ 50-50 फीसदी बांट लेती है. हालांकि सेविकाओं से मिली जानकारी के आधार पर उक्त आरोप को तथ्यहीन करार दिया गया है. जांच रिपोर्ट के अनुसार, किराया का पैसा मकान मालिक के खाते में जाता है. यानी कोई गड़बड़ी नहीं की जाती है. खाद्यान्न और राशि गबन के आरोप को भी निराधार बताया गया है. गौरतलब है कि आवेदक ने कुछ वीडियो क्लिप जांच अधिकारी को दिए थे, जिसके बारे में यह कहा गया था कि पर्यवेक्षिका द्वारा कुछ सेविकाओं से पैसे लिए जा रहे है. बहरहाल, विशेष जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पायेगा.

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