मसना नदी का पुल क्षतिग्रस्त, आवागमन में परेशानी

Updated at : 02 Jul 2024 12:35 AM (IST)
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मसना नदी का पुल क्षतिग्रस्त, आवागमन में परेशानी

प्रतिनिधि, कुर्साकांटा. प्रखंड क्षेत्र के कुआड़ी बाजार से सुंदरी रजौला जाने वाली सड़क पर मसना नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी

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प्रतिनिधि, कुर्साकांटा. प्रखंड क्षेत्र के कुआड़ी बाजार से सुंदरी रजौला जाने वाली सड़क पर मसना नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बता दें कि बरसात का मौसम आते ही यह परेशानी तब बढ़ जाती है. जब मसना नदी उफान पर होती है. क्षतिग्रस्त पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है. तब उक्त मार्ग से गुजरने वाले रजौला, सुंदरी, मधुबनी, डुमरिया सहित लगभग आधा दर्जन गांव के लोगों को कुआड़ी बाजार आने के लिए महज पांच किलोमीटर की दूरी को प्रखंड मुख्यालय के रास्ते करीब 14 किमी की दूरी कर आना पड़ता है. इधर, क्षतिग्रस्त पुल के कारण आये दिन वाहन चालक दुर्घटना के शिकार होते रहे हैं. क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मतीकरण को लेकर पूर्व प्रखंड प्रमुख सुशील कुमार सिंह, धनजीत सिंह, मो अबुतालिब, मो नफीस हैदर, पंसस प्रतिनिधि मो मंसूर आलम, पूर्व जिप सदस्य मो आफाक आलम, मुखिया मो मतलुब आलम, वार्ड सदस्य रंजीत साह, पूर्व पंसस इनाम अहसन, मो रसीद सहित दर्जनों लोगों ने डीएम से क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मती की मांग की है. फारबिसगंज-लक्ष्मीपुर नये रेलखंड के संपर्क के लिए सर्वेक्षण की घोषणा प्रतिनिधि, फारबिसगंज. रेल संघर्ष समिति के सदस्यों में सामरिक महत्व की निर्माणाधीन ठाकुरगंज-अररिया नई रेल लाइन को फारबिसगंज से इस मार्ग के बीच पड़ने वाले स्टेशन लक्ष्मीपुर से जोड़े जाने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए मंजूरी की घोषणा से हर्ष व्याप्त है. गौरतलब है कि रेल संघर्ष समिति पिछले दो सालों से खवासपुर से फारबिसगंज को जोड़े जाने के लिए नये रेल संपर्क बनाये जाने की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन कर रही थी. इस संदर्भ में सांसद प्रदीप कुमार सिंह के साथ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक (निर्माण) व मुख्य अभियंता के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में सांसद के रेल प्रतिनिधि सह डीआरयूसीसी सदस्य विनोद सरावगी तथा रेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष मांगीलाल गोलछा, संरक्षक बछराज, राकेश रोशन, अजातशत्रु अग्रवाल आदी मौजूद थे. खवासपुर के एक हॉल्ट स्टेशन होने के कारण वहां से नई रेल लाइन बनाने की तकनीकी समस्या को देखते हुए उन्हें लक्ष्मीपुर स्टेशन से जोड़े जाने का विकल्प बताया गया था. महाप्रबंधक ने सांसद श्री सिंह को इस बाईपास लाइन के निर्माण के लिए सर्वे कराये जाने को आश्वस्त किया था. अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के प्रथम चरण में रेलवे बोर्ड ने इसके फाइनल लोकेशन सर्वे पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है. 17.60 लंबे रेल संपर्क लक्ष्मीपुर से फारबिसगंज तक निर्माण हो जाने से पूर्वोत्तर भारत से उत्तर भारत की ओर रेल मार्ग की दूरी 38 किलोमीटर दूरी कम हो जायेगी, जो काफी महत्त्वपूर्ण है. सिलीगुडी से दरभंगा व सहरसा की ओर जाने वाली ट्रेनों को भाया अररिया नहीं जाकर फारबिसगंज होकर जाने से 38 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की सुरक्षा की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील चिकन नेक में इस रेल कनेक्टिविटी के बन जाने से पूर्वोत्तर के लिए एक और नया विकल्प मिल जायेगा. रेल विभाग के इस निर्णय से उत्साहित रेल संघर्ष समिति के संरक्षक बछराज राखेचा व विनोद सरावगी, सचिव ई. आयुष अग्रवाल, पूनम पांडीया, प्रकाश चौधरी, रमेश सिंह,अजातशत्रु अग्रवाल, गुड्डू अली, राकेश रोशन, पवन मिश्रा ,अवधेश कुमार साह ,शाहजहां शाद, गोपाल कृष्ण सोनू, ब्रजेश राय, राशीद जुनैद आदी ने हर्ष जताया है.

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