पीएनबी से हुए पांच करोड़ के फ्रॉड में इडी ने शुरू की जांच, मांगी जानकारी

ED begins probe into Rs 5 crore PNB fraud
: इडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में मामला दर्ज कर शुरू किया अनुसंधान : नगर थाने में दर्ज फ्रॉड के दो बड़े कांड के बारे में मांगी जानकारी
: गिरफ्तार किए गए जफर व नितेश सिंह के बारे में जुटा रही ब्योरा: रिटायर्ड प्रोफेसर से एक करोड़ व दूसरे से हुआ था 24 लाख का फ्रॉडसंवाददाता, मुजफ्फरपुर पीएनबी से 2021 में हुए पांच करोड़ से अधिक के फ्रॉड में इडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में मामला दर्ज करके अनुसंधान शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में नगर थाने में दर्ज रिटायर्ड प्रोफेसर मीना कुमारी के खाते से एक करोड़ सात लाख रुपये व रिटायर्ड बीएसएनएल कर्मी रामदेव राम के खाते से हुए 24 लाख के फ्रॉड के केस के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गयी है. प्रवर्तन निदेशालय पटना जोनल ऑफिस के असिस्टेंट डायरेक्टर राजेंद्र सिंह ने नगर थानेदार को पत्र भेजकर थाने में 2021 में तीन जुलाई व 10 अगस्त को दर्ज दोनों केस में अब तक पुलिस की ओर से की गयी कार्रवाई, 31 जनवरी 2022 को मामले में न्यायालय में समर्पित किए गए चार्जशीट के बारे में जानकारी मांगी है.आरोपियों और उनके सहयोगियों पर शिकंजा
ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए आरोपियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. पत्र में मो. जफर इकबाल और नीतेश कुमार सिंह जैसे मुख्य आरोपियों का नाम लिया गया है और उनसे जुड़ी सभी वित्तीय गतिविधियों का ब्योरा मांगा गया है. इसमें उनके बैंक खातों से किए गए लेन-देन, उनसे जब्त की गई नकद राशि और अन्य संपत्तियों की जानकारी मांगी गयी है. इडी ने यह भी कहा है कि पुलिस की जांच में कोलकाता के साइबर फ्रॉड मो. सादिक, सोमनाथ डे और तापसी डे जैसे अन्य साइबर अपराधियों जिनके खाते में पीएनबी से फ्रॉड की गयी राशि को भेजा गया था . उन खातों से हुई नकद निकासी के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है. इन खातों से निकाले गए पैसों का स्रोत और गंतव्य इस जांच का अहम हिस्सा है.कोलकाता से जुड़ा था तार, आगे नहीं हो सका अनुसंधान जिले के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड का कोलकाता से ताड़ जुड़ा था. केस के पहला आइओ दरोगा ओमप्रकाश को बनाया गया. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ते ही तत्कालीन एसएसपी ने एसआइटी का गठन किया था. इडी ने पत्र में समीर दा और सईद व शाहिद नामक साइबर अपराधियों का विस्तृत पता और अन्य जानकारी मांगी है.
रामदेव राम के खाते से हुए फ्रॉड की जांच के बाद हुआ था खुलासा
पीएनबी फ्रॉड का पहला मामला तब पकड़ में आया था जब बीएसएनएल के रिटायर्ड लाइनमैन रामदेव राम के खाते से 22.44 लाख रुपये का फ्रॉड कर लिया गया था. इस मामले की जांच के दौरान नगर थाने की पुलिस को जानकारी मिली कि इस गिरोह ने काजीमोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के दामू चौक की रहनेवाली रिटायर्ड प्रोफेसर मीना कुमारी के खाते से एक करोड़ सात लाख रुपये का फ्रॉड कर लिया था. इसके आलावे साइंस कॉलेज के प्रोफेसर ज्योति नारायण सिंह के खाते से 45 लाख रुपये का फ्रॉड पकड़ में आया. इसके बाद सीतामढ़ी, छपरा, पूर्वी चंपारण आदि जगहों पर करोड़ों रुपये का फ्रॉड पकड़ा गया. इस कांड में नगर थाने की पुलिस बंगाल के तस्कर समीर दा उर्फ समीर दास, राजेश मन्ना, दरभंगा के मो. वजफ समेत एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है.
एडीजी एटीएस ने किया था कांड का समीक्षा
2022 में एडीजी एटीएस जिले के साइबर फ्रॉड के इस बड़े कांड की समीक्षा की थी. उन्होंने बंगाल व बेंगलुरु के फ्रॉड को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था . आर्थिक अपराध इकाई पटना की टीम भी दो बार नगर थाने आकर केस के संबंध में पूरी जानकारी ली थी . पुलिस इसकांड में पीएनबी के साइंस कॉलेज शाखा के कैशियर नीतेश कुमार सिंह, जफर इकबाल, राजेश कुमार, मंजय समेत सात के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर कर चुकी है. पीएनबी फ्रॉड केस की पूरी डिटेल इडी की टीम भी ले गयी थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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