दिव्य मंत्रों की गूंज से गांव व शहर भक्तिमय

शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उलाय नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक गिद्धौर दुर्गा मंदिर में गूंज रहे दुर्गा सप्तशती के श्लोकों से वातावरण भक्तिमय हो गया है.
कुमार सौरभ,
गिद्धौर शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उलाय नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक गिद्धौर दुर्गा मंदिर में गूंज रहे दुर्गा सप्तशती के श्लोकों से वातावरण भक्तिमय हो गया है. श्रद्धालुओं की आस्था इस मेंदिर से विशेष रूप से जुड़ी हुई है. 22 सितंबर से ही मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है. वहीं शाम के समय मां की आरती में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. बुधवार को मां के तीसरे स्वरूप मां चंद्रधण्टा की पूजा-अर्चना की गयी. मालूम हो कि मंदिर की स्थापना चंदेल राजवंश के शासकों ने की थी. यहां तांत्रिक विधि-विधान के तहत कुंडलिनी पद्धति से पूजा करने की सदियों पुरानी परंपरा है. राज रियासत के ज्योतिषाचार्य डॉ विभूति नाथ झा बताते हैं कि श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां प्रथम दिन की पूजा में दंडवत प्रणाम करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इस परंपरा का निर्वहन आज भी क्षेत्र भर के श्रद्धालु करते हैं. गिद्धौर चंदेल राजवंश की परंपरा में रचा-बसा यह मां पतसंडा मंदिर दशहरे के अवसर पर अंतरजिला भर के श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र बन जाता है. वर्ष 1996 में महाराजा बहादुर प्रताप सिंह के इसे जनाश्रित घोषित करने के बाद, शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति के माध्यम से यह पर्व ग्रामीण स्तर पर भव्य रूप से आयोजित होता आ रहा है.नवरात्रि की प्रमुख तिथियां व पूजा कार्यक्रम
27 सितंबर (शनिवार) – गहवारा प्रवेश का मुहूर्त: सुबह 7:00 बजे से 11:40 बजे तक28 सितंबर (रविवार) – बिल्वभिमंत्रण: अपराह्न 3:40 से 4:30 बजे तक29 सितंबर (सोमवार) – पत्रिका प्रवेश : 4:06 बजे के बाद
इसी दिन महाअष्टमी निशा पूजा भी संपन्न होगी
30 सितंबर (मंगलवार) – महाष्टमी व्रत एवं जगरना, इस दिन मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा
1 अक्टूबर (बुधवार) – महानवमी बलिप्रदान : सुबह 5:35 से 8:35 एवं 10:03 से 11:39 तक2 अक्टूबर (गुरुवार) – विजया दशमी : प्रवाह निष्क्रमण का समय अपराह्न 2:30 पूर्व या संध्या 5:27 तक
6 अक्टूबर (सोमवार) – शरद पूर्णिमा को महालक्ष्मी पूजन संकल्प7 अक्टूबर (मंगलवार) – प्रतिमा विसर्जन: अपराह्न 8:20 से 12:56 तक, प्रवाह निष्क्रमण संध्या 4:30 से 5:35 तक
मंदिर परिसर में सांस्कृतिक विरासत का उल्लास
गिद्धौर का दशहरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी अद्भुत संगम है. मेले में सांस्कृतिक महोत्सव, सर्कस, जादू के खेल, चूड़ियों व मिठाइयों की दुकानें, तारामाची, काठघोड़ा व नाव की सवारी जैसी पारंपरिक चीजें आज भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.
प्रतिमा निर्माण में जुटे मूर्तिकार
गिद्धौर निवासी बनारस के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार राजकुमार रावत द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण कार्य निर्बाध गति से जारी है. स्वर्ण मुकुट से सुसज्जित मां दुर्गा की प्रतिमा महाष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को दर्शन देगी.
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