Dhanbad News: सुविधा व सुरक्षा नहीं मिलने से तीन साल में 700 चिकित्सकों ने छोड़ा राज्य : आइएमए
Updated at : 03 Mar 2025 12:53 AM (IST)
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<P><H2>धनबाद. </H2>इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) झारखंड प्रदेश, एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक रविवार को धनबाद क्लब में हुई. इसमें आइएमए के प्रदेश व जिला के पदाधिकारी शामिल हुए. इस दौरान मुख्य
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धनबाद.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) झारखंड प्रदेश, एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक रविवार को धनबाद क्लब में हुई. इसमें आइएमए के प्रदेश व जिला के पदाधिकारी शामिल हुए. इस दौरान मुख्य रूप से धनबाद समेत राज्य में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने, चिकित्सकों की सुविधा व सुरक्षा आदि मुद्दों पर चर्चा की गयी. बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ एके सिंह ने कहा कि सरकार के उदासीन रवैए से मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की मांग अबतक लंबित है. चिकित्सकों को सुविधा मुहैया कराने के बजाए सरकार क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के जरिए शोषण करने में लगी है. यही वजह है कि तीन साल में राज्य के लगभग 700 चिकित्सक दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं. उन्होंने सरकार से 50 से कम बेड वाले क्लिनिक, नर्सिंगहोम व अस्पताल को सीइए से बाहर करने की मांग की. कहा कि राज्य सरकार छह नये मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कह रही है. जबकि वर्तमान में संचालित मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ करने की दिशा में कोई कार्य नहीं हो रहा है. मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों व मैनपावर की कमी है. जूनियर डॉक्टरों का वेतन बकाया रखा जा रहा है. हमारी मांगों पर सरकार गंभीर नहीं हुई तो आइएमए कड़े फैसले लेने को बाध्य होगा. बैठक में संगठन के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ बीपी कश्यप, को-ऑर्डिनेटर डॉ अजय सिंह, धनबाद सचिव डॉ राकेश इंदर सिंह, डॉ अनंत सिन्हा, डॉ मृत्युंजय, डॉ शंभू, डॉ एके चक्रवर्ती, डॉ सुशील कुमार ने भी संबोधित किया.सुरक्षित रहेंगे, तभी दे पायेंगे बेहतर चिकित्सा : सचिव
आइएमए के प्रदेश सचिव डॉ प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि चिकित्सक सुरक्षित रहेंगे तभी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल पायेगी. देश के 25 राज्यों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है. सुरक्षा नहीं मिलने से चिकित्सक गंभीर मरीजों का इलाज करने में कतराते हैं.आयुष्मान योजना के करोड़ों रुपये बकाया : जिलाध्यक्ष
आइएमए के धनबाद अध्यक्ष डॉ बीएन गुप्ता ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज के एवज में अस्पतालों को मिलने वाला करोड़ों रुपये बकाया है. ऐसे में अस्पतालों ने आयुष्मान के मरीजों को भर्ती लेकर इलाज करना बंद कर दिया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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