डीएस कॉलेज में मानव बल बहाली के नाम पर खजाने में सेंधमारी

Author :RAJKISHOR K
Published by :RAJKISHOR K
Updated at :24 Sep 2025 7:37 PM
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डीएस कॉलेज में मानव बल बहाली के नाम पर खजाने में सेंधमारी

डीएस कॉलेज में मानव बल बहाली के नाम पर खजाने में सेंधमारी

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संशोघित खबर, इसी को लेना है – पूर्व प्राचार्य के ड्राइवर के भाई से लेकर अस्थाई कर्मी के परिजन को रख राशि का हुआ बंदरबांट – बिना किसी नियुक्त पत्र कर्मियों से लिया गया कार्य – मामला सामने आने पर कार्य कर रहे मानव बल में बौखलाहट प्रतिनिधि, कटिहार डीएस कॉलेज में मानव बल बहाली के नाम पर कॉलेज के खजाने में सेंधमारी का प्रयास किया गया है. बिना किसी नियम व आरक्षण के तत्कालीन प्राचार्य के चहेतों से लेकर अस्थायी रूप में डीएस कॉलेज में कार्य कर रहे कर्मी के परिजन को मानव बल में रखकर कॉलेज की राशि का बंदरबांट किया गया है. ऐसा मानव बल में बहाल कई कर्मियों का कहना है. बिना किसी नियुक्ति पत्र दिये अधिकांश कर्मियों से मानव बल के रूप में बहाल कर कार्य लिया गया. कम्पनी द्वारा कार्य में असमर्थता जाहिर करने के बाद कार्य कर रहे मानव बल के कर्मियों के बीच बौखलाहट शुरू हो गया है. कई कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल में सुविधा एजेंसी के साथ एग्रीमेंट के बाद उनलोगों से कार्य लिया जा रहा है. अधिकांश कर्मियों की माने तो उनलोगों को अब तक नियुक्ति पत्र निर्गत नहीं किया गया न ही उनलोगों को स्किल्ड व ननस्किल्ड के तहत कार्य का बंटवारा किया गया. उनलोगों ने बताया कि पूर्व प्राचार्य के चालक के भाई, दो चहेते व एक डीएस काॅलेज में अस्थायी रूप से कार्य कर रहे कर्मी के परिजन को मानव बल में रखकर कार्य लिया गया. हालांकि उक्त महिला कर्मी को आज तक कॉलेज परिसर में किसी के द्वारा कार्य करते देखा तक नहीं गया. ऐसे कर्मियों की उपस्थिति किस तरीके से बनाकर मानदेय भुगतान किया गया, यह जांच का विषय है. कॉलेज में कार्य कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि कम्पनी से किये गये एग्रीमेंट में स्किल्ड को 12 हजार और ननस्किल्ड को 11 हजार रूपये निर्धारित किये गये है. जबकि उनलोगों को स्किल्ड के नाम पर सात हजार और ननस्किल्ड को महज 65 सौ रूपये दिया गया. इपीएफ व ईएसआई के नाम पर अब तक उनलोगों के खाते में राशि जमा किया गया है या नहीं इसका भी कोई अता पता नहीं है. उनलोगों ने प्राचार्य से कम्पनी के विरूद्ध कड़ा एक्शन लेते हुए ब्लैक लिस्टेड करने की मांग की. साथ ही उनलोगों ने इपीएफ व इएसआई के मद मे राशि के साथ अगस्त माह का मानदेय उपलब्ध कराये जाने की मांग की है. एग्रीमेंट से काफी कम मानदेय दिया जाना गंभीर मामला ————————————————————— यह मामला उनके पूर्व का है. मामला संज्ञान में आया है. जानकारी के बाद पूर्व के प्राचार्य के चहेते के दो कर्मियों को हटा दिया गया है. उनके जाते ही भुगतान पर रोक लगा दिया गया है. बीएड मेें नामांकित छात्रा को किस आधार पर मानव बल के रूप में लिया गया. एकरारनामा में अधिक राशि और कार्य कर रहे कर्मियों को काफी कम मानदेय भुगतान किया गया है. इपीएफ व ईएसआई की राशि क्यों नहीं जमा किया गया यह जांच का विषय है. एजेंसी के पदाधिकारी से फोनिक बातचीत हुई है. एजेंसी के द्वारा बताया गया है कि मिलकर सभी बातों से अवगत कराया जायेगा. अगर यह कम्पनी कार्य नहीं करना चाहती है तो यूटिलाईजशन देना होगा. उसके बाद नियमत: दूसरे कम्पनी को हायर कर कार्य लिया जा सकता है. डॉ प्रो प्रशांत कुमार, प्राचार्य, डीएस कॉलेज लनिंग विद अनिंग कॉन्सेपट के तहत बीएड में नामांकित छात्रा से लिया गया होगा कार्य ——————————————————————————————— उनके कार्यकाल में सुविधा एजेंसी के साथ मानव बल रखकर कार्य कराने को लेकर एग्रीमेंट किया गया था. उनका दूसरे कॉलेज में स्थानांतरण हो गया है. लनिंग विथ अनिंग कॉन्सेप्ट पूर्णिया विवि का निर्देश है. इसी के आधार पर बीएड में नामांकित छात्रा को मानव बल के तहत बहाल किया गया होगा. इसके लिए एजेंसी जिम्मेदार है. स्कील्ड व ननस्कील्ड के रूप में कर्मियों को बहाल किया गया था. नियुक्ति पत्र किसी को इसलिए नहीं दिया गया होगा कि ये लोग कोर्ट चले जायेंगे. इपीएफ से लेकर इएसआई देना कम्पनी का दायितव है. स्कील्ड कर्मी के लिए कम्पनी को बारह हजार हजार व ननस्कील्ड कर्मी के लिए ग्यारह हजार के रूप में एकरानामा किया गया था. दो साल का नहीं एक साल का एग्रीमेंट था. उसके बाद रिन्यूल किया जा सकता है. डॉ संजय कुमार सिंह, डीएस कॉलेज, तत्कालीन प्राचार्य संज्ञान में नहीं है इस तरह का मामला —————————————— आउटसोर्स के माध्यम से कॉलेजों में कार्य कराने का निर्देश है. यह कॉलेज स्तर से किया गया है. लनिंग विथ अनिंग किसी तरह का कॉन्सेप्ट है. इसकी जानकारी नहीं है. नियम के तहत सभी कर्मियों को मानव बल में बहाल कर कार्य कराये जाने का आदेश है. कॉलेज के खजाने से किसी को एक रूपये अतिरिक्त खर्च करने का अधिकार नहीं है. अगर इस तरह का हुआ है यह वित्तीय मामला बनता है. बीएड में नामांकित छात्रा को आउटसाेसिंग के तहत मानव बल में रखकर कार्य लेकर भुगतान एक गंभीर मामला है. कुलपति को ध्यान दिया जायेगा. जरूरत पड़नेे पर उच्चस्तरीय जांच कमेटी बना जांच करायी जायेगी. डॉ प्रणय कुमार गुप्ता, कुलसचिव, पूर्णिया विवि

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