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Bokaro News : नये उपायुक्त के समक्ष होंगी कई चुनौतियां

Updated at : 28 May 2025 11:13 PM (IST)
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Bokaro News : नये उपायुक्त के समक्ष होंगी कई चुनौतियां

<P>Bokaro News : <H2>सीपी सिंह , बोकारो, </H2>बोकारो जिला के नक्शा में उतरने के बाद से जिला ने विकास का जो सपना देखा था, उसमें से कई अब भी अधूरा

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Bokaro News :

सीपी सिंह , बोकारो,

बोकारो जिला के नक्शा में उतरने के बाद से जिला ने विकास का जो सपना देखा था, उसमें से कई अब भी अधूरा है. जिला को इस दौरान 34 उपायुक्त मिले. हर उपायुक्त ने तमाम योजनाओं को धरातल पर लाने का प्रयास भी किया, पर योजना की स्थिति जस-की-तस बनी रही. विस्थापित गांव में त्रिस्तरीय पंचायती राज का लाभ मिलने से लेकर बुनियादी बस स्टैंड तक की समस्या सालों से खड़ी हैं. मंगलवार को बोकारो जिले के 35वें डीसी के रूप में अजयनाथ झा ने कार्यभार संभाला. नये डीसी के सामने पुरानी चुनौतियां खड़ी हैं.

50 हजार की आबादी, लेकिन पहचान नहीं :

बोकारो जिला पूरे देश का शायद एकमात्र जिला होगा, जहां के 19 गांव पहचान के लिए आंदोलन कर रहे हैं. दरअसल, भारत सरकार और सोवियत यूनियन की एक साझेदारी से बोकारो स्टील प्लांट स्थापित किया गया. निर्माण शुरू होने से पहले सरकार ने 1956 में ही भूमि अधिग्रहण का नोटिस जारी कर दिया था. 80 गांवों में से 19 को छोड़ कर बाकी गांवों को पुनर्वासित कर दिया गया था. भविष्य में प्लांट के विस्तार की संभावना की वजह से इन गांवों को छोड़ दिया गया. इन गांवों ने ना ही मुआवजा स्वीकार किया और ना ही जमीनें खाली की. वर्तमान समय में 19 गांव के लोगों को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का लाभ नहीं मिल रहा है. केंद्र व राज्य सरकार की किसी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिलता.

छह साल से हो रहा है इंतजार, उड़ान अभी संभव नहीं : बोकारो एयरपोर्ट से उड़ान के लिए बोकारो लगभग सात साल से इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी उड़ान संभव नहीं दिख रहा है. जानकारी के अनुसार बोकारो एयरपोर्ट को लाइसेंस प्रक्रिया के पूरे होने के पहले प्रदूषण विभाग, पर्यावरण विभाग, एक एंबुलेंस, एक फायर ब्रिगेड की विशेष वाहन की उपलब्धता पूरी करनी है. साथ ही सतनपुर पहाड़ी पर सर्चलाइट लगानी है. अभी भी एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने में सबसे बड़ी समस्या यथावत है. एयरपोर्ट के सामने से बूचड़खाना हटाने की दिशा में भी अभी तक कुछ नहीं हुआ है. एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की माने तो इस दिशा में कुछ नहीं हो रहा है. ना तो सेल और ना ही राज्य सरकार की ओर से कोई पहल की जा रही है.

चास-बोकारो में सुव्यवस्थित बस स्टैंड का अभाव :

जिले के 19 गांवों व एयरपोर्ट की समस्या के अलावा चास-बोकारो में नियमित बस स्टैंड तक नहीं है. नया मोड़ में बस स्टैंड का निर्माण बोकारो इस्पात संयंत्र के स्थापना काल के दौरान ही हुआ, लेकिन राजस्व के हिसाब से इसका इस्तेमाल नहीं हो सका है. बीएसएल की जमीन पर स्टैंड होने के कारण जिला प्रशासन स्टैंड में कोई काम नहीं कर पाता. झारखंड निर्माण के पहले विमल कीर्ति सिंह के उपायुक्त रहते एक बार इस स्टैंड को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गयी थी, लेकिन बाद में वह असफल हो गयी. आज भी जिला मुख्यालय में सुव्यवस्थित बस स्टैंड की कमी है. साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर की मांग भी जिला में दशकों से हो रही है. 2017-18 में जेल मोड़ के पास जगह चिह्नित की गयी थी. इसके लिए वन विभाग व जिला पदाधिकारी से वार्ता भी हुई थी, लेकिन, कोई फैसला नहीं हो सका. इसके अलावा बोकारो तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बाद 18 जून 2014 से सॉफ्टवेयर तकनीक पार्क स्थापित होने का इंतजार कर रहा है.

इन मामलों का भी हो समाधान

– स्थायी होने का इंतजार कर रहा है दुंदीबाद बाजार.

– गरगा-सिंगारीजोरिया की सफाई और एसटीएफ बनने का हो रहा है इंतजार– साइंस सेंटर व टेक्नोलॉजी लाइब्रेरी बनाने की योजना 2001 से पेंडिंग

– चास बोकारो में कचरा निस्तारण केंद्र की बात हवा हवाई

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANOJ KUMAR

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