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बंद पड़ा पीकू वार्ड इस्तेमाल और देखरेख के अभाव में तोड़ रहा दम

हैंडओवर के बाद से अस्पताल प्रशासन अब तक उसे छोटे बच्चों के इलाज के लिए नहीं कर रही इस्तेमाल में ... प्रतिनिधि, सहरसा बनने के कई माह बाद पीकू

हैंडओवर के बाद से अस्पताल प्रशासन अब तक उसे छोटे बच्चों के इलाज के लिए नहीं कर रही इस्तेमाल में … प्रतिनिधि, सहरसा बनने के कई माह बाद पीकू वार्ड को जहां जनवरी माह में सदर अस्पताल के हैंडओवर किया गया, वहीं हैंडओवर के चार माह बाद ही पीकू वार्ड का सीलिंग गिरना शुरू हो गया. जबकि हैंडओवर के बाद से पीकू वार्ड पूरी तरह से बंद पड़ा है. पीकू वार्ड हैंडओवर के बाद से अस्पताल प्रशासन अब तक उसे छोटे बच्चों के इलाज के लिए इस्तेमाल में नहीं ला सकी है. बंद पड़ा पीकू वार्ड इस्तेमाल और देखरेख के अभाव में दम तोड़ रहा है. जबकि अस्पताल प्रशासन की स्वास्थ्य व्यवस्था सदर अस्पताल में भगवान भरोसे ही चल रहा है. स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति करने वाले अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही अब चरम पर पहुंच चुकी है. करोड़ों का पीकू वार्ड बनाने वाले संवेदक भी निर्माण कार्य में अनियमितता बरत कर चले गये. जबकि पीकू वार्ड निर्माण के समय अस्पताल प्रबंधन के एक भी सदस्य गुणवत्तापूर्ण कार्य की निगरानी के लिए स्थल पर नहीं गये. वहीं हैंडओवर के चार माह बाद भी 42 बेड के तैयार पीकू वार्ड के मुख्य गेट पर कंट्रक्शन अंडर प्रोसेस का बोर्ड लगा है. बिना इस्तेमाल पीकू वार्ड का परिसर में जंगली पौधों से पट चुका है. पीकू वार्ड के पीछे लगाए गये दर्जनों एसी में से कईयों का चोर उच्चकों ने पाइप और तार काट लिया है. जबकि वार्ड के पीछे की कोई निगरानी तक नहीं है. बिना इस्तेमाल के पीकू वार्ड की हालत शुरू होने से पहले ही जर्जर होती नजर आ रही है. शुरू होने पर भी सिलिंडर से ऑक्सीजन होगा सहारा अस्पताल परिसर में बच्चा मरीज के लिए 42 बेड का पीकू वार्ड अपने निर्धारित समय से कुछ माह बाद बनकर तो तैयार हो गया था. लेकिन तैयार होने के लगभग 7 माह बाद उसे सदर अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर कर दिया. उसके 4 माह बाद भी पीकू वार्ड का इस्तेमाल बच्चा मरीजों के लिए नहीं किया जा सका. कारण है कि पूर्ण रूप से तैयार पीकू वार्ड में बच्चा मरीजों की सुविधा के लिए प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था तो कर दी गयी. लेकिन ऑक्सीजन प्लांट के वर्षों से खराब रहने के कारण सुविधा बहाल नहीं हो पायी. ऑक्सीजन सप्लाई देने के मामले में वहां भी सिलिंडर ही सहारा होगा. संवेदक के कार्यों की खुली पोल निर्माण कार्य पूरा हुए अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ है और तैयार पीकू वार्ड का सीलिंग गिरना शुरू हो गया है. जो संवेदक के कार्यों की लापरवाही को खुलेआम दर्शाता है. संयोग यह भी अच्छा है कि इस्तेमाल होने से पूर्व ही कार्यों की अनियमितता की पोल खुलने लगी है. वहीं कुछ माह पूर्व तक कार्य पूर्ण होने का दावा करते संवेदक विभाग को हैंडओवर करने का दबाव बना रही थी. लेकिन तीन दिन पूर्व गिरे सीलिंग ने संवेदक के कार्यों की पोल खोलकर रख दी.

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Prabhat Khabar News Desk
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