Bettiah : वीटीआर के 8 वन प्रक्षेत्रों में 100 से अधिक बनाए गए है कच्चे व पक्के वाटर होल, वन्यजीवों की बुझ रही प्यास

Updated at : 11 May 2025 5:08 PM (IST)
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Bettiah : वीटीआर के 8 वन प्रक्षेत्रों में 100 से अधिक बनाए गए है कच्चे व पक्के वाटर होल, वन्यजीवों की बुझ रही प्यास

<P><H2></H2></P><H2>Bettiah : हरनाटांड़.</H2> भीषण गर्मी में पशु-पक्षी और जंगली वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश में परेशान हो जाते हैं और पानी के लिए भटकते रहते हैं. इसको

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Bettiah : हरनाटांड़.

भीषण गर्मी में पशु-पक्षी और जंगली वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश में परेशान हो जाते हैं और पानी के लिए भटकते रहते हैं. इसको देखते हुए वीटीआर प्रशासन द्वारा वन प्रमंडल एक व दो अंतर्गत 8 वन प्रक्षेत्रों के जंगल में 100 से अधिक कच्चे व पक्के वाटर होल बनाए गए हैं. इन वाटर होल से बाघ, तेंदुआ, गौर और अन्य वन्यजीवों समेत पक्षी को अपने आवास क्षेत्र में ही पानी मिल जा रहा है. जिससे उन्हें पानी की तलाश में भटकना नहीं पड़ रहा है.

वाटर होल पर बढ़ी सुरक्षा

गर्मी के दिनों में वीटीआर के कई छोटे-छोटे जल स्रोत सूख जाते. इसके बाद जंगली जानवरों को इधर-उधर भटकना पड़ता था. वीटीआर में पानी की तलाश में वन्यजीव वाटर होल पर प्यास बुझाने पहुंच रहे हैं. इसे देखते हुए वाटर होल पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि वाटर होल में जीवों के लिए पर्याप्त जल आपूर्ति की जा रही है. जिससे जीवों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. वीटीआर प्रशासन के अनुसार भीषण गर्मी में वन्यजीव पानी के अभाव में प्यास बुझाने के लिए जंगल से भटककर रिहायशी व शहरी इलाकों की ओर पहुंच जाते हैं. ऐसे में जंगल से सटे रिहायशी इलाकों के लोगों का जीवन खतरे मे पड़ जाता है.

वीटीआर अन्य जल स्रोत

वीटीआर के जंगल में 100 से अधिक वाटर होल और सौसर बनाए गए हैं. जिनमें टैंकरों से पानी भरा जाता है. इसके अलावा, 158 प्राकृतिक और 12 महीने वाले जल स्रोत भी हैं. वीटीआर में 50 से अधिक सोलर पैनल स्थापित किए गए हैं, जो जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर पानी एकत्र करते हैं. इनकी देखरेख के लिए वन कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं. जंगलों में घास के मैदानों में पानी के गड्ढों को भरने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों का उपयोग किया जाता है. करीब एक दर्जन सोलर पैनल सिस्टम से वाटर होल तैयार किए जा रहे हैं. जहां पर खुद से ही वाटर होल में पानी भरता रहेगा.

बोले वन संरक्षक

इस बाबत वीटीआर के वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक डॉ. नेशामणी के. ने बताया कि वन प्रक्षेत्रों के जंगल में वाटर होल पर वन्यजीव आ रहे तथा प्यास बुझा भी रहे हैं. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्ती दलों की जिम्मेदारी बढ़ा दी गयी है. वन विभाग का प्रयास है कि वन्यजीवों को पर्याप्त पानी वनों में ही मिल जाए. वन्यजीव बाहरी क्षेत्रों में पानी की तलाश में न जाएं. बताते चलें कि इस समय जल स्त्रोतों के पास बड़ी संख्या में वन्यजीव नजर आने लगे हैं.

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