डायरिया में कैसा हो आहार

Updated at : 29 Apr 2016 12:29 AM (IST)
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डायरिया में कैसा हो आहार

डायरिया में पानी जैसा या पतला दस्त होता है. इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, कमजोरी, दर्द इत्यादि लक्षण भी दिखते हैं. ऐसे समय में दवाई और आराम करने के साथ-साथ खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. अर्चना नेमानी डायटीशियन व डायबिटीज एजुकेटर ‘आहार क्लिनिक’ बैंक रोड, मुजफ्फरपुर मो : 9472573686 डा यरिया होने पर […]

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डायरिया में पानी जैसा या पतला दस्त होता है. इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, कमजोरी, दर्द इत्यादि लक्षण भी दिखते हैं. ऐसे समय में दवाई और आराम करने के साथ-साथ खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए.

अर्चना नेमानी

डायटीशियन व डायबिटीज एजुकेटर ‘आहार क्लिनिक’ बैंक रोड, मुजफ्फरपुर

मो : 9472573686

डा यरिया होने पर खान-पान में बदलाव इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि डायरिया किस प्रकार का है, एक्यूट डायरिया में मरीज को 12 से 24 घंटे तक लिक्विड डायट दिया जाता है, ताकि पेट को आराम मिल सके. कभी-कभी इस प्रकार का डायरिया किसी एक खाद्य पदार्थ से एलर्जी के कारण भी हो जाता है. अत: सावधानी बरतने पर आराम मिलता है. क्रॉनिक डायरिया में दूध, फैट, फाइबर युक्त भोज्य पदार्थ नहीं देना चाहिए.

कैसा आहार देना चाहिए

डायरिया में ताकत प्रदान करनेवाले, विटामिन या मिनरल्स से भरपूर लिक्विड या सॉफ्ट डायट दिया जाता है. इसमें सब्जियों का जूस, पालक का जूस, कुम्हड़ा या पोटैटो का सूप, आॅरेंज या अन्य फ्रूट जूस, दाल का सूप, खिचड़ी दलिया (मिक्सी में पीस के) इत्यादि दी जाती है. चूंकि सोडियम, पोटैशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने से जी मिचलाना, कमजोरी, सुस्ती होने लगती है. जरूरी है कि ताकत प्रदान करनेवाले एवं पेय पदार्थ में ग्लूकोज (मात्रा एक चम्मच) मिला कर दिया जाये. डायरिया में आयरन की कमी हो सकती है.

इसलिए धनिया या पुदीना का जूस, कुम्हरा का सूप, तरबूज का रस, पालक सूप, हरी पत्तेदार सब्जियों का सूप आलू व प्याज का सूप इत्यादि देना फायदेमंद होता है. पानी और इलेक्ट्रोलाइट की सही मात्रा थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहना चाहिए.

एक्यूट डायरिया : मैं शुरू के दो-दिनों में मरीज को 200 एमएल पानी में एक चम्मच ग्लूकोज एक चुटकी नमक और पांच चम्म्च आॅरेंज जूस मिला कर दें. यह मिश्रण प्रत्येक एक घंटे के अंतराल पर दें. तीसरे दिन से दो-दो घंटे के अंतराल पर ये चीजें दे सकते हैं, जैसे-

– बार्ली के पानी में बराबर मात्रा में छाछ या दूध मिलाएं और एक चम्मच ग्लूकोज मिला कर लें.

– आॅरेंज जूस (200 एमएल) में ग्लूकोज एक चम्मच मिला कर (चार घंटे के अंतराल पर लें) जैसे-जैसे स्थिति में सुधार आने लगे.

– ब्रेड को टोंड मिल्क, आॅरेंज जूस के साथ एक हफ्ते तक दें. अच्छे से पका कर सादा साफ-सुथरे तरीके से पका मुलायम भोजन लें. मिर्च मसालेदार, तले-भुने से परहेज करें.

क्रॉनिक डायरिया : शुरू के दो दिनों तक दो-दो घंटे के अंतराल पर बार्ली के पानी में बराबर दूध मिला कर (200-300 एमएल) साथ में एक चम्मच चीनी मिला कर दें.

चार घंटे के अंतराल पर एक बार जूस भी ले सकते हैं. स्थिति में सुधार होने पर ब्रेड, केला, सेब इत्यादि 150-200 एमएल टोंड दूध के साथ दे सकते हैं. एक हफ्ते के बाद सादा बिना मिर्च मसाले के साफ-सुथरे तरीके से पका सॉफ्ट भोजन दें. रेशेदार भोजन से बचना चाहिए.

बच्चे में डायरिया

छह-आठ महीने के बच्चे को डायरिया होने पर दवाई व आराम की स्थिति के साथ ही खान-पान की सावधानी इस प्रकार से बरते. प्रत्येक तीन घंटे पर टोंड दूध 200 एमएल दे सकते हैं. प्रत्येक चार-चार घंटे पर आॅरेंज जूस दें, जब तक डायरिया रुक न जाये. इसके बाद डायरिया रुकने पर नॉर्मल दूध दिया जा सकता है. फल का जूस, ब्रेड, मिल्क पुडिंग इत्यादि तब तक न दें, जब तक बच्चा नॉर्मल न हो जाये. फिर सामान्य रूटिन पर लाएं.

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