भारतियों में बढ़ती डायबिटीज़

कहते हैं डायबिटीज़ अमीरों का रोग है लेकिन पिछले सालों के आंकड़ों की माने तो, खाने की कमी और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे लोगों में भी डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ रहा है. शोध बतातें हैं कि बदलती जीवनशैली, तेज़ी से बदलती लाइफस्टाइल, शहरीकरण और प्रोसेस्ड फूड, फ़ास्ट फूड ने डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ा दिया […]
कहते हैं डायबिटीज़ अमीरों का रोग है लेकिन पिछले सालों के आंकड़ों की माने तो, खाने की कमी और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे लोगों में भी डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ रहा है.
शोध बतातें हैं कि बदलती जीवनशैली, तेज़ी से बदलती लाइफस्टाइल, शहरीकरण और प्रोसेस्ड फूड, फ़ास्ट फूड ने डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ा दिया है.
अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज़ फ़ेडरेशन का दावा है कि आने वाले सालों में (2035 तक) 600 मिलियन तक डायबिटीज के मरीज इस पूरी दुनिया में मौजूद होंगे. पिछले आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर अब 3.82 अरब हो गई है. जिसके आधे से ज्यादा मरीज एशिया में हैं.
अब तक चीन डायबिटीज़ मरीज़ों के मामले में एशिया में सबसे आगे था लेकिन हालिया आंकड़ों को देखें तो भारत चीन को इसमें भी पछाड़ रहा है. एक अनुमान के अनुसार छह करोड़ 51 लाख डायबिटीज़ मरीज़ों के साथ भारत भी चीन के काफी क़रीब आ चुका है.
बड़ों में ही नहीं बल्कि बच्चों में अधिक डायबिटीज के मामले देखे जा रहे हैं. पिछले आंकड़ों के अनुसार देश में दो करोड़ 10 लाख बच्चों का जन्म डायबिटीज़ से प्रभावित हुआ जो बताता है कि भारत में स्थिति जटिल होने वाली है.
वैसे तो डायबिटीज़ बढ़ती उम्र की बीमारी है, मगर आंकड़े बता रहे हैं कि अब युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग इसका ज़्यादा शिकार होने लगा है. यह मोटे लोगों में ज़्यादा पाया जाता है, मगर दुबले लोगों में इसके परिणाम बेहद ख़तरनाक हो सकते हैं.
डायबिटीज़ होने के बाद खराब गुर्दे, ह्रदय रोग और अंधापन जैसी आम जटिलताएं सामने आने लगती हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग पहले फ़सल ख़ुद उगाते थे, मछलियां पकड़ते थे, कहीं जाना होता था तो पैदल ही जाते थे. अब वो लोग आलसी हो गए हैं, सुविधाएं बढ़ गई हैं और खान-पान भी बदल गया है.
लोगों के व्यवसाय भी बदल गए हैं. अब फास्ट फूड और मिठाई उद्योग ने भी जीवनशैली को खराब किया है जिसके बाद डायबिटीज जैसे रोगों ने अपने पैर पसार लिए हैं.
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