शक्तिशालिनी : पायल जांगिड़ की बगावत बनी मिसाल, दुनिया ने माना चेंजमेकर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Sep 2019 10:08 PM
अमेरिका में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से गोलकीपर ग्लोबल गोल्स अवॉर्ड्स कार्यक्रम में पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के अलावा एक और भारतीय को ‘चेंजमेकर अवॉर्ड’ मिला. नाम है – पायल जांगिड़. पायल की उम्र मात्र 17 साल है और उन्हें यह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार राजस्थान में बाल श्रम और बाल विवाह को […]
अमेरिका में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से गोलकीपर ग्लोबल गोल्स अवॉर्ड्स कार्यक्रम में पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के अलावा एक और भारतीय को ‘चेंजमेकर अवॉर्ड’ मिला. नाम है – पायल जांगिड़.
पायल की उम्र मात्र 17 साल है और उन्हें यह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार राजस्थान में बाल श्रम और बाल विवाह को खत्म करने के लिए चलाये जा रहे अभियान के लिए मिला है. पायल जांगिड़ ने यह पुरस्कार पाकर देश को गौरवान्वित किया है.
11 साल की उम्र में अपनी शादी से इनकार कर उन्होंने साहस भरा काम किया. माता-पिता को पायल की जिद के आगे झुकना पड़ा. इसमें बाद पायल ने हर बच्चे को बाल विवाह के चंगुल से निकालने का निर्णय लिया. उन्होंने गांव के हर घर जाकर बेटे-बेटी को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया. उनकी मेहनत रंग लायी. गांव वालों का कहना है कि बीते कई सालों से एक भी बाल विवाह नहीं हुआ.
राजस्थान के हिंसला गांवमेंरहनेवाले खेतिहर पिता पप्पूराम और गृहिणी मां का नाम रोशन करनेवाली बेटी पायल, इसके बाद कैलाश सत्यार्थी के बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़ीं. उन्होंने बाल परिषद बनायी और बाल पंचायत प्रमुख के तौर पर काम किया. सत्यार्थी कहते हैं- पायल बाल श्रम, बाल विवाह और घूंघट प्रथा का विरोध करने में सबसे आगे रहीं हैं.
आपको बता दें कि पायल को इससे पहले 2013 में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के असाधारण कार्य करने के लिए ‘वर्ल्ड्स चिल्ड्रेनस प्राइज’ का जूरी भी बनाया गया था. 2017 में उन्हें वैश्विक खेल और फिटनेस ब्रांड रीबॉक द्वारा ‘यंग अचीवर अवार्ड’ भी मिल चुका है.
पायल के पिता पप्पूराम जांगिड़ कहते हैं, गांव में लगभग सभी बच्चे स्कूल जाने लगे हैं. हमारी बेटी की पहल अब पूरे राजस्थान में फैल गई है. गेट्स फाउंडेशन ने भी अपने ट्विटर एकाउंट पर पायल के अभियान की कहानी साझा किया है.
नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी पायल की तारीफ करते हुए कहते हैं कि पायल जैसे युवा दुनिया को बदलने के लिए अपनी दमदार आवाजउठा रहे हैं. पायल जैसे युवाओं को धन्यवाद देना चाहिए, जिनकी वजह से परिवर्तन और उम्मीद की किरणें हमारे दरवाजों पर दस्तक दे रही हैं. दुनिया को इस नयी पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए तैयार रहना चाहिए. उनकी सक्रियता, समर्पण और बहादुरी पहले से ही समाज के अग्रणी लोगों को परिवर्तन करने के लिए आगे बढ़ा रही है और मुझे पता है कि आगे और भी बदलाव आने वाले हैं.
पायल कहती हैं, मैं ऐसी लड़की हूं जिसे समाज ने हमेशा ही परिवार में पुरुषों की सहायक की भूमिका निभाने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि हर युवा ‘चेंजमेकर’ (यानी, बदलाव लाने वाला) है, मैं उन सारे लोगों में से महज एक हूं. हमें बाल विवाह की बुराई से लड़ने के लिए एकजुट होना होगा. व्यापक परिप्रेक्ष्य में, मुझे लगता है कि भारत में सभी सामाजिक समस्याओं की जड़ लोगों में उचित शिक्षा का अभाव है. इसलिए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर बच्चे को न सिर्फ ‘बेसिक’ शिक्षा मिले बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिले. जिस तरह गांव में अभियान चलाकर समस्याएं खत्म कीं, उसी तरह मैं यह काम विश्व स्तर पर करना चाहती हूं.
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