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Inspirational: अपने गांवों को बेहतर स्वास्थ्य की ओर ले जा रही हैं Water Aunties

स्टाॅकहोम : भारत के गांवों में न्यूनतम लागत पर लाखों लोगों के पीने के पानी की समस्या का निदान कर छोटे जल उपक्रम (SWE, एसडब्ल्यूई) सामुदायिक स्वास्थ्य को महिला सशक्तिकरण से जोड़ बड़ा बदलाव ला रहे हैं. ‘वाटर आंटीज’ (Water Aunties) और हजारों अन्य लोग छोटे जल उपक्रमों के जरिये बदलाव के माध्यम बने हुए […]

स्टाॅकहोम : भारत के गांवों में न्यूनतम लागत पर लाखों लोगों के पीने के पानी की समस्या का निदान कर छोटे जल उपक्रम (SWE, एसडब्ल्यूई) सामुदायिक स्वास्थ्य को महिला सशक्तिकरण से जोड़ बड़ा बदलाव ला रहे हैं.

‘वाटर आंटीज’ (Water Aunties) और हजारों अन्य लोग छोटे जल उपक्रमों के जरिये बदलाव के माध्यम बने हुए हैं. इन जल उपक्रमों से जल शोधन की लागत महज कुछ रुपये रह गई और इसके लिए बेहद कम निवेश की जरूरत होती है. इसकी मदद से ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य परिदृश्य में भी सुधार आ रहा है.

यहां स्टाकहोम इंटरनेशनल वाटर इंस्टीट्यूट (SIWI, एसआईडब्ल्यूआई) द्वारा हाल में आयोजित विश्व जल सप्ताह में बदलाव लाने में उनकी प्रभावी भूमिका को रेखांकित किया गया. सी. पद्मजा ने बताया, वारंगल में मेरे गांव में जन स्वास्थ्य में सुधार हुआ है. गांव में हर कोई मुझे प्यार से वाटर आंटी बुलाता है.

दक्षिण भारत के इस सुदूरवर्ती इलाके वारंगल की उनकी यादगार कहानी की व्यापक गूंज यूरोपीय राजधानी में भी सुनाई दी. तेलंगाना के वारंगल जिले के गांव रंगासाइपेट में बच्चों और बड़ों के शरीर में कई तरह की विकृतियां हो रही थीं जो यहां किसी ‘महामारी’ की तरह था.

इसकी वजह भूजल के फ्लोराइड के उच्च स्तर से दूषित होना था. पद्मजा (39) 2016 में अपने परिवार के सदस्यों के अक्सर बीमार पड़ने से परेशान थीं और उन्होंने गांव में बदलाव लाने का फैसला किया.

गैर लाभकारी पंजीकृत ट्रस्ट ‘सेफ वाटर नेटवर्क’ की मदद से पद्मजा ने स्वच्छ जल वितरण केंद्र स्थापित किये, जिससे करीब पांच हजार निवासियों को कम कीमत पर शोधित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके.

‘आईजल’ नाम के इस जल केंद्र में बोरवेल से भूजल को शोधित कर इसे इंसानों के पीने लायक बनाया जाता है. इसके 20 लीटर पेयजल की कीमत पांच रुपये रखी गई है.

सुरक्षित जल नेटवर्क 2010 ने उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में करीब 300 आईजल संयंत्र स्थापित किये हैं. इनमें से अधिकांश का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है.

इस पहल ने देश दुनिया का ध्यान इस और खींचा और इसकी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ भी हुई. अमेरिका स्थित वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (WRI, डब्ल्यूआरआई) में लैंगिग एवं सामाजिक समानता शोध विश्लेषक आयुषी त्रिवेदी ने कहा, घर के स्तर पर महिलाएं पहले ही जल पर फैसला लेती हैं, लेकिन जब महिलाएं जल प्रबंधन को प्रभावित करती हैं, तो उनके समुदाय को इसके काफी बेहतर नतीजे मिलते हैं.

Prabhat Khabar Digital Desk
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