जीरो साइज की चाहत : छात्राओं में हीमोग्लोबिन की कमी, घेर रहा है तनाव

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Jul 2019 9:49 AM

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बदलती जीवन शैली, खान-पान और फिगर को लेकर अधिक कॉन्शियस होना युवतियों को बीमार कर रहा है. हीमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिक हो रही हैं. फिगर मेंटेन यानी जीरो साइज की चाहत में हेल्दी डायट से दूर हो रही हैं. एनीमिया के कारण खून में आयरन की कमी हो जाती है. यह समस्या आज […]

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बदलती जीवन शैली, खान-पान और फिगर को लेकर अधिक कॉन्शियस होना युवतियों को बीमार कर रहा है. हीमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिक हो रही हैं. फिगर मेंटेन यानी जीरो साइज की चाहत में हेल्दी डायट से दूर हो रही हैं. एनीमिया के कारण खून में आयरन की कमी हो जाती है. यह समस्या आज लड़कियों में आम बात हो गयी है. साथ ही मासिक धर्म में गड़बड़ी के कारण भी खून की कमी हो रही है. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि युवतियां अपने खान-पान को लेकर सजग रहें, तो इस बीमारी को दूर किया जा सकता है. साथ ही स्कूल और कॉलेजों में भी इसको लेकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. पढ़िए लता रानी की रिपोर्ट.

हीमोग्लोबिन स्तर को जानिए

11 ग्राम प्रति डीएल (डेसीलीटर) से हीमोग्लोबिन स्तर कम हो, तो वह एनीमिया माना जाता है़

10 से 10.9 ग्राम प्रति डीएल

हीमोग्लोबिन हो, तो हल्का एनीमिया

07 से 9.9 ग्राम प्रति डीएल हीमोग्लोबिन हो, तो मध्यम स्तर का एनीमिया

07 ग्राम प्रति डीएल हीमोग्लोबिन

हो, तो गंभीर एनीमिया

आंकड़े बता रहे सच्चाई

65.2% महिलाएं झारखंड की एनीमिया की शिकार हैं

64.2% महिलाएं रांची की एनीमिया से ग्रसित हैं

29.9% पुरुष झारखंड के एनीमिया की चपेट में हैं

27.6% पुरुष रांची के एनीमिया से पीड़ित हैं

सरकार की पहल: छठी से 12वीं तक के बच्चों को दिया जाता है आयरन टैबलेट
स्वास्थ्य विभाग वीकली आयरन एंड फोलिक एसिड सप्लिमेंटेशन (विफ्स) कार्यक्रम के तहत सभी सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छठी से 12 वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए आयरन की गोली और फोलिक एसिड टैबलेट देता है. एनीमिया नियंत्रण के इस कार्यक्रम के तहत राज्य भर के 39 लाख बच्चों को हर सप्ताह के लिए एक-एक आयरन व फोलिक एसिड टैबलेट उपलब्ध कराया जाता है. विभाग प्रखंड स्तर पर यह टैबलेट उपलब्ध कराता है. यहां से सीडीपीअो और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के जरिये यह स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचता है.

इन चीजों का करें सेवन (डायटीशियन गजाला मतीन)

गुड़ और चना में आयरन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है. एनिमिक हैं, तो हर सुबह इसका सेवन करें

पालक का सेवन करें

मढ़ुआ के आटे का सेवन करे़ं, टेस्ट के लिए लड्डू व बर्फी भी बना कर खाया जा सकता है

शहद को एनीमिया के लिए शक्तिशाली इलाज माना जाता है, इसलिए शहद को सेब के टुकड़े या केले के साथ ले सकते हैं

एक गिलास पानी में नीबू का रस डालें और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून की कमी दूर होती है

सोयाबीन का इस्तेमाल करें

गुड़ का नियमित सेवन करें

हरी सब्जियां, पालक, चुकंदर, ब्रोकली, लौकी खायें

पके हुआ आम के गुद्दे और मीठे दूध का साथ सेवन करें

ये हैं लक्षण

शरीर में थकान होना, उठने-बैठने और खड़े होने पर चक्कर

नाखून पीला पड़ना, आंखों में पीलापन, त्वचा में पीलापन

काम में मन न लगना, लेटकर उठने के बाद आंखों के सामने अंधेरा छाना, शरीर में तापमान की कमी

तलवों और हथेलियों में ठंडापन, लगातार सिर में दर्द रहना

एनीमिया को लेकर कितने सजग हैं कॉलेज

निर्मला कॉलेज में प्रत्येक सप्ताह होती है छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच
डॉ रश्मि माला साहू (सदस्य आंतरिक गुणवत्ता सेल, निर्मला कॉलेज) कहती हैं : निर्मला कॉलेज में हर सप्ताह छात्राओं की स्वास्थ्य जांच होती है. डॉक्टर्स की टीम आती है. छात्राओं के आयरन ऑर फॉलिक एसिड का वितरण होता है. कॉलेज में समय- समय पर एक्टिविटी होती है. स्त्री रोग विशेषज्ञ छात्राओं को जागरूक करती हैं. साइकोलॉजी विभाग एनीमिया से ग्रस्त छात्राओं की काउंसेलिंग करता है. डॉ साहू कहती हैं कि एनीमिया एक साइकोलॉजिकल समस्या भी है. इस बीमारी के कारण युवतियां तनाव में आ जाती हैं. उनके तनाव को दूर करने का प्रयास किया जाता है.

रांची वीमेंस कॉलेज में छात्राओं को दिया जाता है फूड बास्केट

रांची वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ मंजु सिन्हा कहती है : वीमेंस कॉलेज में क्लिनिकल न्यूट्रीशियन और डायटेटिक्स डिपार्टमेंट की ओर से हेल्थ कैंप लगाया जाता है. ब्लड डोनेशन कैंप भी लगता है. छात्राओं की एनीमिया जांच होती है. उन्हें जागरूक किया जाता है. इसके लक्षण और बचाव की जानकारी दी जाती है. दवाइयां बांटी जाती है. छात्राओं को 10 दिन का फूड बास्केट बना कर दिया जाता है़ इसका उद्देश्य है कि वह अपना डायट फॉलो करे़ं इस पैकेट में ऐसे खाद्य प्रदार्थ होते हैं, जिसमें आयरन पर्याप्त मात्रा में हो. साथ ही छात्राओं को हेल्दी चीज खाने की सलाह दी जाती है.

समय पर करायें इलाज

आयरन और फोलिक एसिड की कमी और मासिक धर्म में अत्यधिक स्त्राव एनीमिया का मुख्य कारण है. खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाती है़ यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा होती है़ इसका समय पर उपचार नहीं किया गया, तो यह घातक साबित भी हो सकती है़ हीमोग्लोबिन की कमी के कारण कमजाेरी आना, पढ़ाई में मन नहीं लगना की शिकायत बढ़ने लगती है.
-डॉ मधुलिका, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रिम्स

खान-पान पर ध्यान नहीं देती हैं छात्राएं
कॉलेजों में ब्लड डोनेशन कैंप लगाये जाते हैं. इसमें छात्राओं की सहभागिता काफी कम हो गयी है. क्योंकि हीमोग्लोबिन की कमी के कारण वह ब्लड डोनेट करने में सक्षम नहीं होती है़ं अंडर वेट की भी समस्या होती है. हालांकि यह देखा गया है कि ब्लड डोनेशन कैंप से पहले जब उन्हें जागरूक किया जाता है, तो उनका रेशियो बढ़ जाता है. इसका मतलब यह है कि युवतियां खान-पान पर ध्यान नहीं देती हैं.
-कविता देवगढ़िया, काउंसलर, ब्लड बैंक रिम्स

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