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अक्सर क्यों सताता है पेट दर्द

Updated at : 22 Feb 2019 3:37 PM (IST)
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अक्सर क्यों सताता है पेट दर्द

बच्चों का शरीर बहुत नाजुक होता है. उनका शरीर विकसित हो रहा होता है, इसलिए पाचन तंत्र से लेकर दूसरे तंत्रों का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता है. बच्चों का इम्यून तंत्र भी कमजोर होता है, इसलिए वो संक्रमण से लेकर दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. अक्सर देखने में […]

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बच्चों का शरीर बहुत नाजुक होता है. उनका शरीर विकसित हो रहा होता है, इसलिए पाचन तंत्र से लेकर दूसरे तंत्रों का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता है. बच्चों का इम्यून तंत्र भी कमजोर होता है, इसलिए वो संक्रमण से लेकर दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. अक्सर देखने में आता है कि बच्चों को पेट दर्द बहुत होता है. अगर बच्चे को कभी-कभार पेट दर्द हो तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर पेट दर्द लगातार कईं दिनों तक बना रहे या दर्द बहुत तेज हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है या इसका कारण शरीर के दूसरे भागों में होने वाली कोई समस्या भी हो सकती है.

बच्चों में पेट दर्द

सभी उम्र के बच्चों में पेट दर्द एक सामान्य समस्या होती है. इसका कारण सामान्य से लेकर गंभीर हो सकता है. दर्द पूरे पेट में या पेट के एक ओर हो सकता है. पेट दर्द पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकता है और शरीर के किसी अन्य भाग में पल रही कोई स्वास्थ्य समस्या भी इसका कारण बन सकती है. अगर पेट दर्द का कारण मामूली है तो यह अपने आप ही थोड़े समय में ठीक हो जाएगा, लेकिन अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो उपचार कराना जरूरी हो जाता है.

क्या हो सकते हैं कारण

बच्चों में पेट दर्द कईं कारणों से हो सकता है. अधिकतर इसका कोई गंभीर कारण नहीं होता है, लेकिन कईं बार यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है.

सामान्य कारण

कब्ज

गैस

लूज़ मोशन

ओवर ईटिंग

अपच

गंभीर समस्याएं

डायरिया

संक्रमण

अपेन्डिक्टिस

गाल ब्लैडर स्टोन

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

गले का संक्रमण

गैस्ट्रोएंटीराइटिस

डायरिया

एंग्जाइटी या स्ट्रेस

मिल्क एलर्जी

फूड एलर्जी

स्टमक अल्सर

इनफ्लेमैटरी बाउल डिसीज (आईबीडी)

डायग्नोसिस

पेट में दर्द कईं कारणों से होता है, इसलिए दर्द के सही कारणों का पता लगाना बहुत जरूरी है. इसके लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं.

शारीरिक परीक्षण

शारीरिक परीक्षण के द्वारा डॉक्टर यह पता लगाने का प्रयास करेगा कि वास्तव में दर्द कहां हो रहा है.

यूरीन टेस्ट

संक्रमण का पता लगाने के लिए यूरीन का सैम्पल लेकर जांच की जाती है.

स्टूल टेस्ट

बैक्टीरिया, परजीवी या मल में रक्त की उपस्थिति जांचने के लिए स्टूल टेस्ट किया जाता है।

ब्लड टेस्ट

एमाइलेज़ और लाइपेज़ के स्तर तथा अग्नाश्य की कार्यप्रणाली जांचने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है.

इमेजिंग टेस्ट

आंतरिक अंगों और उतकों में किसी प्रकार की गड़बड़ी का पता लगाने के लिए डॉक्टर एक्स-रे, अल्ट्रा साउंड या सीटी स्कैन कराने का भी कह सकता है.

उपचार

पेट दर्द के कारणों के आधार पर पेट दर्द का उपचार किया जाता है. अगर दर्द संक्रमण के कारण हो रहा है तो उसके लिए दवाईयां दी जाती हैं. अगर मिल्क एलर्जी है तो डॉक्टर बच्चे को दूध और दुग्ध उत्पाद देने से मना कर सकता है. अगर पेट दर्द के साथ दस्त और उल्टी हो रही है तो बच्चे को दवाईयों के साथ पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी हो जाता है, ताकि बच्चे के शरीर में पानी की कमी न हो. जब तक बच्चा ठीक न हो जाए उसे हल्का और सुपाच्य भोजन दें. अगर किसी गंभीर समस्या के कारण पेट दर्द हो रहा है तो उस समस्या का उपचार किया जाता है.

तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

बच्चे का पेट फूलकर कड़ा हो गया हो.

पेट में दर्द अचानक और बहुत तेज़ हो.

मल या उल्टी में खून दिखाई दे.

कब्ज के कारण बच्चा मल पास न कर पाए.

नाभि में दर्द होना, उल्टी होना, फिर दर्द दायीं ओर शिफ्ट हो जाना, इसके साथ ही बुखार आना और भूख की कमी, ये अपेंडिटाइटिस के कारण हो सकता है.

पेट के निचले भाग में सूजन आ जाना, यह हर्निया के कारण हो सकता है.

पेट के उपरी भाग में दायीं ओर दर्द होना, पीलिया इसकी वजह हो सकता है.

लड़कियों में अचानक पेट के निचले भाग में दर्द होना और उल्टी होना, ओवेरियन सिस्ट के कारण हो सकता है.

कैसे बचें

बच्‍चों को फास्‍ट फूड और फैट फूड की बजाए घर का बना खाना खिलाएं.

अंकुरित अनाज खिलाएं क्‍योंकि शरीर इनको आसानी से ग्रहण कर लेता है.

उनके भोजन में फलों और सब्‍जियों को शामिल करें। भोजन में एक-तिहाई फल और सब्‍जियां तथा दो तिहाई अनाज होना चाहिए.

बच्‍चों को हर तीन घंटे में कुछ खाने को दें.

उन्‍हें टीवी के सामने बैठकर न खाने दें; धीरे-धीरे चबाकर खाने की आदत डालें.

बच्‍चे देखकर सीखते हैं इसलिए सबसे जरूरी है अपनी खानपान की आदतें सुधारें.

बच्‍चों को कम से कम दस घंटे की नींद लेने दें, इससे उनका मेटाबॉलिज्म दुरूस्त रहेगा.

खाना खाने के तुरंत बाद न सोने दें.

बचपन से ही साफ-सफाई की आदत डालें, ताकि बच्चे संक्रमण की चपेट में न आएं.

विशेषज्ञ
डॉ. संदीप कुमार सिंहा, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक सर्जरी, रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल, नई दिल्ली

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