कहीं मुंह की गंदगी आपके दिल को न बना दे बीमार

नेशनल कंटेंट सेल आमतौर पर लोगों में यह धारणा है कि दांत या मसूड़ों में कोई समस्या है, तो इससे सिर्फ मुंह का भाग ही प्रभावित होता है और कोई खतरा नहीं. मगर यह धारणा गलत है. सच यह है कि आपके सड़े हुए दांत, फूले हुए मसूड़े या मुंह से आती दुर्गंध आपके हृदय […]
नेशनल कंटेंट सेल
आमतौर पर लोगों में यह धारणा है कि दांत या मसूड़ों में कोई समस्या है, तो इससे सिर्फ मुंह का भाग ही प्रभावित होता है और कोई खतरा नहीं. मगर यह धारणा गलत है. सच यह है कि आपके सड़े हुए दांत, फूले हुए मसूड़े या मुंह से आती दुर्गंध आपके हृदय को भी बीमार बना सकती है. आपकी ओरल कैविटी (मुख गुहा) यह संकेत देती है कि आपके हृदय और धमनियों के लिए खतरा बढ़ रहा है. जर्नल ऑफ पेरीडॉन्टोलॉजी द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दांतों के जिन मरीजों में पेरिओडॉन्टाइटिस के बैक्टीरिया की गतिविधि अधिक होती है, उनमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का प्रतिशत अधिक हो जाता है. यही नहीं, कई शोध कहते हैं कि मुंह की गंदगी उच्च रक्त दाब (हाइ बीपी) का खतरा भी बढ़ा देती है, जिससे हृदय रोगों और स्ट्रोक का खतरा और बढ़ जाता है.
ओरल हाइजीन और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज : ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को दांतों और मसूड़ों से संबंधित समस्याएं होती हैं, उनके हृदय रोगों की चपेट में आने का खतरा उन लोगों की तुलना में बढ़ जाता है, जिन्हें इनसे संबंधित कोई समस्या नहीं होती. कई अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि मुंह की गंदगी से हृदय रोगों का खतरा 70 गुना हो जाता है. जो लोग नियमित रूप से अपने मुंह की सफाई नहीं रखते, उन लोगों को हृदय रोगों का खतरा उनसे भी अधिक होता है, जिनके रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक है. जिन्हें पहले से ही हृदय से संबंधित समस्याएं जैसे – बैक्टीरियल एंडोकार्डिटिस (हृदय की अंदरूनी परत का संक्रमण) का खतरा अधिक है, उन्हें ओरल हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
हार्ट अटैक के बाद डेंटल सर्जरी या गहन ओरल ट्रीटमेंट के लिए कम-से-कम छह महीने इंतजार करना चाहिए. अगर आप एंटीकोएगुलैंट (रक्त को पतला करने वाली दवाइयां) ले रहे हैं, तो डॉक्टर को जरूर बताएं, क्योंकि इन दवाइयों के कारण सर्जिकल प्रोसीजर में ब्लीडिंग होती है.
मुंह की गंदगी कैसे करती है हृदय को बीमार : क्यूआरजी, हेल्थ सिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ गजिंदर कुमार गोयल इस बारे में बताते हैं, यदि मसूड़े में बैक्टीरिया के कारण जिंजिवाइटिस इन्फेक्शन हो जाये तो इससे बैक्टीरिया खून के माध्यम से दिल तक पहुंच सकता है और दिल की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके चलते हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है. दरअसल, चबाने और ब्रशिंग के दौरान बैक्टीरिया और ये रोगाणु रक्त के प्रवाह में प्रवेश कर परिसंचरण तंत्र के दूसरे भागों में पहुंच सकते हैं. जब ये सूक्ष्मजीव हृदय तक पहुंचते हैं, तो ये अपने आपको किसी क्षतिग्रस्त भाग से जोड़ लेते हैं और सूजन का कारण बन जाते हैं. इसके कारण बीमारियां होती हैं, जैसे- एंडोकार्डिटिस, जो हृदय की सबसे अंदरूनी परत का संक्रमण है. इस तरह ओरल हेल्थ और हृदय रोग आपस में जुड़े हुए हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, दूसरी कार्डियोवैस्कुलर कंडीशंस, जैसे- आर्थेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का ब्लॉक हो जाना) और स्ट्रोक भी उस सूजन से संबंधित है, जो मुंह में पाये जानेवाले बैक्टीरिया के कारण होती है. बैक्टीरिया व अन्य रोगाणु रक्त के प्रवाह में पहुंच कर सी-रिएक्टिव प्रोटीन (रक्त नलिकाओं में सूजन का संकेत) का स्तर बढ़ा देता है. इस कारण हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है.
कैसे रखें ओरल हाइजीन
साल में एक बार दांतों का चेकअप : दांतों में तकलीफ न हो, तब भी साल में एक बार दांतों का चेकअप जरूर कराएं. कभी-कभी बाहर से देखने पर दांत सामान्य लगते हैं, लेकिन कई बार अंदर ही अंदर उनमें कोई बीमारी पल रही होती है. शुरू में इसका पता नहीं चलता, लेकिन समय के साथ यह समस्या गंभीर होती जाती है. डेंटल चेकअप इस तरह की समस्याओं से बचाता है.
दो बार ब्रश करें : सुबह और रात को दो बार ब्रश करें. इसके अलावा कुछ भी खाने-पीने के बाद साफ पानी से कुल्ला करें.
टूथपिक का प्रयोग न करें : अगर दांतों में खाना फंस जाये, तो उसे टूथपिक से न निकालें. इससे मसूडों को नुकसान होता है. लेकिन इसे नजरअंदाज भी न करें और डेंटिस्ट को दिखाएं.
तीन महीने में बदलें ब्रश : ज्यादा पुराना ब्रश मसूड़ों और दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए हर तीन महीने में ब्रश जरूर बदल लें.
किन्हें है अधिक खतरा
डॉ जेके भगत , ओरल एंड डेंटल सर्जन, कांके रोड कंसल्टेंट, सेवा सदन, रांची
ओरल हाइजीन नहीं रखने से इकट्ठा होनेवाले प्लाक के कारण मसूड़ों के रोगों का खतरा बढ़ जाता है. जिन्हें मसूड़ों से संबंधित गंभीर समस्याएं, जैसे- जिंजिवाइटिस या गंभीर सब एक्यूट पीरियोडोंटल डिजीज है, उन्हें हृदय रोगों का खतरा सबसे अधिक होता है, विशेष रूप से तब जब समय रहते इनका पता न चले और उपचार न कराया जाये. इसके अलावा जिन्हें दांतों और मसूड़ों से संबंधित समस्याएं हैं, उनमें भी यह खतरा बढ़ जाता है, जैसे – मसूड़े लाल, सूजे हुए होना और उन्हें छूने में दर्द होना. खाने, ब्रश करने या फ्लॉस करने में मसूड़ों से खून आना. मसूड़ों और दांत के आसपास पस पड़ जान. मुंह से बदबू आना या मुंह का स्वाद खराब होना. दांत ढीले हो जाना. यदि हृदय की समस्या हो, तो नियमित डेंटल चेकअप अवश्य करवाएं.
कुछ अहम तथ्य
दांतों का रोग अपने देश में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें दंत क्षय से 60 से 65 प्रतिशत और सब एक्यूट पेरियोडेंटल बीमारियों से 50 से 90 प्रतिशत जनसंख्या प्रभावित होती है.
क्रॉनिक पेरिओडोंटाइटिस की स्थिति में मुंह में बैक्टीरिया की गतिविधियां इतनी बढ़ जाती हैं कि इनसे दिल को नुकसान होने लगता है.
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