Online रिश्तों की Offline होती डोर, मैट्रिमोनियल साइट्स पर कर रहे हैं रिश्तों की तलाश, तो....

Updated at : 13 Sep 2017 9:42 AM (IST)
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Online रिश्तों की Offline होती डोर, मैट्रिमोनियल साइट्स पर कर रहे हैं रिश्तों की तलाश, तो....

मैट्रिमोनियल साइट्स पर कर रहे हैं रिश्तों की तलाश, तो पूरी तरह कर लें जांच-पड़ताल हम हमेशा से सुनते आये हैं कि जोड़ियां ऊपर से बन कर आती हैं. एक जमाने में शादी-विवाह के रिश्ते घर के बड़े-बुजुर्ग तय करते थे. पहले वे लड़का-लड़की देखते थे और उन्हें हर मामले में सबकुछ पसंद आने पर […]

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मैट्रिमोनियल साइट्स पर कर रहे हैं रिश्तों की तलाश, तो पूरी तरह कर लें जांच-पड़ताल
हम हमेशा से सुनते आये हैं कि जोड़ियां ऊपर से बन कर आती हैं. एक जमाने में शादी-विवाह के रिश्ते घर के बड़े-बुजुर्ग तय करते थे. पहले वे लड़का-लड़की देखते थे और उन्हें हर मामले में सबकुछ पसंद आने पर ही रिश्ते तय होते थे. तब जाकर दूल्हा-दुल्हन साते फेरे लेते थे. बदलते जमाने के साथ अब सात फेरों के ये रिश्ते भी शॉर्टकट बनने लगे हैं.
अब लड़के-लड़कियां एक दूसरे से दो-चार दिन बात करते ही जीने-मरने की कसमें खाने लगते हैं. फिर घरवाले मान गये, तो धूमधाम से और न माने तो मंदिर में जाकर शादी कर लेते हैं. जो काम पहले अगुआ के रूप में नाते-रिश्तेदार किया करते थे, वो अब आॅनलाइन पंडित जी या मैट्रिमोनियल साइट कर रहे हैं. यहां आप अपने प्रोफाइल और जरूरत के हिसाब से अपने लिए वर या वधू ढूंढ़ सकते हैं. इस साइट के माध्यम से किसी को डॉक्टर बीवी चाहिए, सॉफ्टवेयर इंजीनियर या फिर किसी को विदेश में कमाने वाला दूल्हा चाहिए, तो वो मिल जा रहा है.
समाजशास्त्री कहते हैं कि सोशल आैर आॅनलाइन के इस जमाने में सात फेरे लेना उतना ही आसान हो गया है, जितना कि खुद के लिए कोई ड्रेस लेना. हालांकि इस आॅनलाइन रिश्तों में ज्यादातर में खटास बहुत जल्दी आ जाती है. कोई-कोई रिश्ता तो महीने या साल भर भी नहीं चल पाता. ऑनलाइन रिश्तों की ऑफलाइन होती डोर पर पेश है-
जांच पड़ताल कर लें
जब भी प्रोफाइल सेलेक्ट करें, कोशिश करें कि उसके बारे में ए टू जेड इंफॉर्मेशन की तहकीकात कर लें. हो सके तो खुद या फिर किसी विश्वस्त सूत्र के माध्यम से जांच-पड़ताल कर लें. अगर जरूरत पड़े, तो पुलिस या किसी और की भी मदद ले सकते हैं.
कई बार प्रोफाइल में दी गयी जानकारी और असल में जो है वो मैच नहीं करती है. रिश्ता तय करने से पहले उस व्यक्ति के ऑफिस या अासपास के लोगों से भी उसके बारे में बहुत कुछ पता कर सकते हैं. आॅनलाइन बातों पर ज्यादा विश्वास न करें, क्योंकि अधिकतर लोग ऑनलाइन या सोशल साइट पर सही इंफॉर्मेशन नहीं डालते हैं.
मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिये बने रिश्तों में आ रही दरार
पिछले कुछ समय से कई ऐसे मामले सामने आये हैं, जहां शादी मैट्रिमोनियल साइट्स से जरिये हुई. शादी के बाद लड़के की प्रोफाइल फेक (गलत) पायी गयी. मतलब लड़की वालों को जो प्रोफाइल दिखायी गयी थी, वह असलियत में थी ही नहीं. ऐसे कई केस आये दिन महिला हेल्पलाइन में आते रहते हैं. आजकल साइट्स पर लोग खुद को रजिस्टर कर अपनी पसंद के युवक या युवती को पसंद करते हैं. इसमें कुछ शादी सफल जरूर होती है, पर अधिकांश में झूठ-फरेब के कारण शादियां कुछ दिन बाद ही टूट जाती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि कई लोग ऑनलाइन जानकारियां देते समय अहम बात छिपा लेते हैं.
ऐसे में दूसरे पक्ष के लोग गहराई से उसका बैकग्राउंड चेक नहीं कर पाते और रिश्ता तय कर लेते हैं. इसके बाद जिंदगी भर पछताने के सिवा और कुछ भी नहीं बचता. शादी के बाद कई ऐसी बातें पता चलती हैं, जिसे चाह कर भी ठीक नहीं किया जा सकता है. आज भी हमारे देश में 80 प्रतिशत शादियां अरेंज्ड होती हैं. इनमें अधिकतर वेबसाइट के जरिये होती हैं. कई पैरेंट्स को शादी की इतनी जल्दी होती है कि प्रोफाइल या बैकग्राउंड बिना जांचे-परखे ही शादी करने को राजी हो जाते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें और उनके परिवार को बाद में भुगतना पड़ता है.
ठोक-बजा कर परखना चाहिए रिश्ते को
पैरेंट्स अपने बच्चों की शादी ऑनलाइन प्रोफाइल चेक कर तय कर देते हैं. बाद में पता चलता है कि जो रिश्ता हुआ, उसमें कई सारी बातें झूठी हैं.
हालांकि शादी के बाद बहुत कुछ करने को रह नहीं जाता है. नतीजतन कोर्ट-कचहरी करते-करते रिश्ते खराब ही होते चले जाते हैं. पेशे से वकील हिनू की रहने वाली सुषमा सिन्हा कहती हैं कि पैरेंट्स को रिश्ता तय करने से पहले हर लिहाज से वहां की सारी जानकारी ले लेनी चाहिए.
रिश्ते को हमेशा हर तरीके से ठोक-बजा कर तय करना चाहिए, क्योंकि शादी लाइफ में एक ही बार होती है, जिसे हमें ताउम्र निभानी होती है. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण बताती हैं कि हमारे पास भी लगभग एक वर्ष में छह से अधिक मामले ऐसे आये, जो ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट्स के द्वारा शादी के बंधन में बंधे थे.
केस स्टडी
लड़की एमसीए की हुई थी. उसके पैरेंट्स ने मैट्रिमोनियल साइट से उसकी शादी के लिए एक लड़के को पसंद किया. प्रोफाइल में दी गयी जानकारी को पूरी तरह से चेक नहीं कर शादी कर दी. शादी के कुछ दिनों बाद पता चला कि लड़का कोई जॉब नहीं करता था. कई दिनों तक लड़के ने उस लड़की को अपने घरवालों से भी मिलने नहीं दिया, जिसकी वजह से वो डिप्रेशन में चल गयी. हालांकि उसने हार नहीं मानी और किसी तरह अपने पैरेंट्स से सारी बात कह दी. अब उसका तलाक हो चुका है और वह एक अच्छी कंपनी में काम कर रही है.
केस स्टडी
लड़की ग्रेजुएट थी और माता-पिता के कहने पर उसकी पसंद के लड़के से शादी भी हो गयी. शादी के कई महीनों बाद पता चला कि प्रोफाइल में जो जॉब बताया गया है, वह जॉब लड़का करता नहीं है. इस वजह से कई सारी प्रॉब्लम हुई. इस कारण वह बहुत दिनों तक डिप्रेशन में रही. अभी उसकी काउंसेलिंग चल रही है. दोनों के बीच रिश्ता खराब हो गया. दोनों के परिवार वाले भी परेशान हैं.
केस स्टडी
लड़की नॉन बैंकिंग सेक्टर में जॉब करती थी और ऑनलाइन प्रोफाइल चेक कर उसकी शादी तय की गयी. प्रोफाइल में लड़के ने खुद को सिंगल लिखा था, लेकिन उसकी फ्रेंड के कहने पर जब उनके पैरेंट्स ने उसकी खोजबीन की, तो पता चला कि लड़का पहले से शादीशुदा है और तलाक लेने वाला है, पर लड़के ने यह बताया ही नहीं था. सही समय पर शादी रोक दी गयी. आज लड़की की शादी दूसरी जगह हो गयी है.
महिला आयोग में भी आ रहे कई ऐसे मामले
मैट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से हुई शादियों के बाद चीटिंग के मामले अब बड़ी संख्या में झारखंड राज्य महिला आयोग तक पहुंचने लगे हैं. इस बाबत राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण कहती हैं कि जब से मैं महिला आयोग में बतौर सदस्य थी और जब से मैं आयोग की अध्यक्ष बनी हूं, इस तरह के कई मामले यहां आये हैं.
मेरे अध्यक्ष बनने के बाद से लगभग आठ मामले ऐसे थे, जहां ऑनलाइन साइट्स के जरिये शादी हुई आैर बाद में धोखे की बात कही गयी. वह कहती हैं कि ऐसी शादियों में वास्तविकता कुछ और होती है़ आपके सामने कुछ और दिखाया जाता है़ शादी के बाद सच और झूठ का पता चलता है़ ऐसी शादी का कोई महत्व नहीं है़ परिवार और समाज की सहमति से हुई शादी की डोर बहुत मजबूत हाेती है़ ऐसा नहीं है कि ऑनलाइन माध्यम से हुई सभी शादियां बिगड़ती ही हैं, लेकिन इसमें कोई संशय नहीं कि इस तरह की शादियां ज्यादातर सफल नहीं होती हैं.
फेक जानकारी दी जाती है : संजय
महिला हेल्प लाइन के पूर्व चीफ प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर संजय वर्मा कहते हैं कि इस तरह की शादियों की सफलता का प्रतिशत अरेंज्ड के मुकाबले कम है. इन माध्यमों से होने वाली शादियों के ओवरऑल प्रतिशत को देखें, तो ऐसे रिश्ते टीक नहीं पाते हैं. मैट्रिमोनियल साइट्स में जो जानकारियां दी जाती हैं, उनके फेक होने की संभावना भी होती है. ऐसा वर-वधू दोनों पक्षों की ओर से होता है.
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