हड़जोड़ से गठिया में मिलता है आराम

Updated at : 26 Aug 2017 12:37 PM (IST)
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हड़जोड़ से गठिया में मिलता है आराम

नीलम कुमारी टेक्निकल ऑफिसर झाम्कोफेड यह एक बहुवर्षीय लत्तेदार तना है़ इसकी तना गांठों से युक्त होती है. तना में प्रत्येक पांच से छह अंगुल पर एक गांठ होती है़ इससे पत्ते निकलते है़ं पत्ते ह्दयाकृति के छोटे और तीन से पांच भागों में बंटे होते है़ं फूल छोटे-छोटे रोएंदार तथा सफेद रंग के होते […]

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नीलम कुमारी
टेक्निकल ऑफिसर झाम्कोफेड
यह एक बहुवर्षीय लत्तेदार तना है़ इसकी तना गांठों से युक्त होती है. तना में प्रत्येक पांच से छह अंगुल पर एक गांठ होती है़ इससे पत्ते निकलते है़ं पत्ते ह्दयाकृति के छोटे और तीन से पांच भागों में बंटे होते है़ं फूल छोटे-छोटे रोएंदार तथा सफेद रंग के होते है़ं यह वर्षा ऋतु में आते है़ं फल लाल रंग के गोल मटर के दाने के समान होते है़ं इसका वानस्पतिक नाम सीसस क्वाड्रैन्गुलैरिस है. यह वाइटेसी परिवार का पौधा है़
संस्कृत में इसे अस्थि शृंखला, अस्थि संहारी, हिंदी में हड़जोड़ और बांग्ला में हड़जोड़ा कहा जाता है़ इसका तने का प्रयोग भोजन में भी किया जाता है़ इसके तने को घी में भून कर उसको दूध के साथ प्रयोग किया जाता है़ इससे हड्डियां जल्दी जुड़ती है़ं गठिया में आराम मिलता है़ यह गरम प्रकृति की होती है़ इसलिए जिनको गरम चीजों से परहेज है और गर्भवती महिलाओं को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए़
उपयोगी भाग : तना, पत्ता
औषधीय उपयोग : यह कफवात जनित रोगों में उपयोगी है़ इसकी शाखाओं का प्रयोग पशुओं व मनुष्यों की टूटी हुई हड्डियों काे जोड़ने में हाेता है़ इसलिए इसे हड़जोड़ कहा जाता है़ इसमें सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम कार्बोनेट अधिक मात्रा में पाया जाता है़ इससे हड्डियां मजबूत होती हैं. यह हड्डी जोड़ने, बवासीर, पेट के रोग, अर्थराइटिस, कर्ण रोग, दमा, अल्सर, पेट
के कैंसर, घाव, कब्ज, कृमि रोग, उच्च
रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल, मोटापा , डायबिटीज आदि में उपयोगी है़
हड्डी जोड़ने में : इसका चूर्ण तीन ग्राम दिन में दो बार किया जाता है़ इसमें तने को पीस कर उसका लेप किया जाता है़
दस्त, अपच : इसके पत्तों या तनों का काढ़ा या चूर्ण प्रयोग करने से दस्त ठीक होता है़ अपच गैस आदि में आराम मिलता है़
नकसीर : यदि नाक से खून निकल रहा है, तो इसके पत्तों का रस नाम में डाला जाता है़
दमा : पांच से 10 ग्राम चूर्ण खाने से दमा में लाभ मिलता है़
कान : पत्तों का रस कान में टपकाने से कान से पस का निकलना बंद हो जाता है़
पाचन शक्ति : इसके तने के चूर्ण को सोंठ के साथ मिला कर दिन में दो बार प्रयोग किया जाता है़
गठिया : यह गठिया व अर्थराटिस में उपयोगी है़ इसको तेल में पकाकर दर्द वाले स्थान में मालिश करने से आराम मिलता है़
पेट दर्द : इसके पौधे को चूना के पानी में उबाल कर पीना चाहिए. इसके दो से पांच ग्राम चूर्ण का प्रयोग किया जाता है़
घाव : गरम पानी में उबाल कर इसके पानी से सफाई करने पर घाव जल्दी ठीक होता है़
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