अब पीड़िता से विवाह पर भी बरी नहीं होंगे रेपिस्ट

Updated at : 15 Aug 2017 1:51 PM (IST)
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अब पीड़िता से विवाह पर भी बरी नहीं होंगे रेपिस्ट

ऐतिहासिक फैसला : जॉर्डन ने हटाया रेपल लॉ जॉर्डन ने अपने रेपल कानून को हटा लिया है. इसके खत्म होने के बाद ही अब रेप के अपराधी कानून सम्मत सजा पायेंगे. पहले वे पीड़िता से विवाह कर के अपने अपराध से बच जाते थे. जॉर्डन की संसद ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रेपल लॉ को […]

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ऐतिहासिक फैसला : जॉर्डन ने हटाया रेपल लॉ
जॉर्डन ने अपने रेपल कानून को हटा लिया है. इसके खत्म होने के बाद ही अब रेप के अपराधी कानून सम्मत सजा पायेंगे. पहले वे पीड़िता से विवाह कर के अपने अपराध से बच जाते थे.
जॉर्डन की संसद ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रेपल लॉ को खत्म कर दिया है. रेपल लॉ के अनुसार रेपिस्ट पीड़िता से विवाह कर कानून से छूट जाता था. जॉर्डन महिला आयोग के महासचिव सलमा निम्स ने बताया कि हम आज जश्न मना रहे हैं. यह उपलब्धि जॉर्डन की महिलाओं, मानवाधिकार संगठनों के ठोस प्रयासों का परिणाम है. यहां के कानून की धारा 308 के तहत रेपिस्ट अपने पीड़िता से विवाह करके तीन साल उनके साथ गुजारने के बाद अपराध से मुक्ति पा जाते थे.
यह विवादास्पद प्रावधान दशकों से जॉर्डन में चला आ रहा था. जिसे इस महीने खत्म कर दिया गया. यहां के लोगों ने समझा कि महिलाओं के सम्मान के लिए इसे हटाने की जरूरत है. लोग इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखने लगे और बदलाव की मांग तेज हो गयी.
सैकड़ों सिविल सोसाइटी कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में जॉर्डन की संसद भवन के बाहर धरना दिया ताकि इस प्रस्ताव को हटाया जा सके. निम्स ने बताया कि कुछ सांसदों की राय थी कि इस प्रावधान को समाप्त नहीं करना चाहिए. वे अंतिम मिनट तक इसे संशोधित करने का विचार कर रहे थे. हमलोग डरे हुए थे कि कहीं हमारे सालों की मेहनत पर पानी न फिर जाये. लेकिन हमारे प्रयासों में हम सफल रहे.
और आखिरकार जॉर्डन की महिलाओं को समान जीवन का अधिकार मिला और रेपल कानून को बैन कर दिया गया. अक्तूबर 2016 में, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने न्यायपालिका में सुधार के लिए शाही समिति की स्थापना का आदेश दिया और पूरे दंड संहिता की समीक्षा की, जो कि अंतिम बार वर्ष 1960 में हुई थी. इस वर्ष फरवरी में समिति ने इस कानून को खत्म करने की सलाह दी. जॉर्डन की सरकार ने इस समिति की बात को माना और और इसे संसद में पेश किया गया.
कानून के तहत होगी सजा
अब यहां घरेलू हिंसा को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है. खालिद रामदान जो कि एक सांसद और इस मामले को सभा में उठाने वाले लोगों में से एक हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने यहां के कानून के 57 वर्षों में इतना बड़ा बदलाव नहीं देखा. यह सामाजिक सुधार और समानता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. आज हम हर बलात्कारी को एक कड़ा संदेश दे रहे हैं कि आपके अपराध की अनदेखी नहीं की जाएगी.
आस्मा खादेर एक महिला कार्यकर्ता हैं वह पीड़ित महिलाओं के लिए एक एनजीओ चलाती हैं. उनका कहना है कि हमने इस बार सासदों को इस लिए ही वोट किया था कि वे हम महिलाओं को इस रेपल कानून से आजादी दिलाएं और आखिरकार हम सफल रहे. हमने कई वर्षों तक संघर्ष किया हर मोर्चे पर डटे रहे और अंत में जीत हमारी हुई.
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