बच्चों को सुस्त बना सकता है हेवी डायट

Updated at : 27 Jul 2017 2:26 PM (IST)
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बच्चों को सुस्त बना सकता है हेवी डायट

बच्चे यदि देर रात तक या सुबह-सवेरे पढ़ने के लिए जगते हैं, तो माता-पिता को भी उनके लिए जागना होता है. ऊपर से परीक्षा का समय हो, तो पढ़ाई के दबाव में बच्चे अपने खान-पान पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. इसलिए पैरेंट की भूमिका बढ़ जाती है. अध्ययन से यह सिद्ध हो चुका है […]

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बच्चे यदि देर रात तक या सुबह-सवेरे पढ़ने के लिए जगते हैं, तो माता-पिता को भी उनके लिए जागना होता है. ऊपर से परीक्षा का समय हो, तो पढ़ाई के दबाव में बच्चे अपने खान-पान पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. इसलिए पैरेंट की भूमिका बढ़ जाती है. अध्ययन से यह सिद्ध हो चुका है कि बच्चे जो भी खाते हैं, उसका सीधा प्रभाव उनके मस्तिष्क पर और स्वास्थ्य पर पड़ता है.
स्मार्ट स्नैक्स का कर सकती हैं उपयोग
बच्चों को स्मार्ट स्नैक्स यानी घर का बना स्वादिष्ट स्नैक्स दे सकती हैं. लगातार पढ़ते रहने से एकरसता हो सकती है. ऐसे में कुछ अच्छा खाने की चाहत होती है. बादाम चिक्की, निमकी, शकरपाला, भुना चुड़ा इत्यादि दें. यह हेल्दी फैटब्रेन के लिए अच्छा होता है. चाॅकलेट, कैंडी, कुकीज आदि ब्लड में चीनी की मात्रा को बढ़ा सकता है. इसलिए इनसे बचना चाहिए. ओमेगा-3 फैटी एसिड मछली में पाया जाता है. यह ब्रेन की कार्यक्षमता एवं याद्दाश्त बढ़ाने में सहायक है. ऑलिव आॅयल, नारियल तेल, सालमन मछली, ब्लू बेरीज, हल्दी, अंडा, अखरोट, कच्चू, ब्रोकली, पिस्ता, डार्क चाॅकलेट, पालक साग आदि में भी ओमेगा-3 होता है. सुबह योग की आदत डालें.
श्वेता जायसवाल
कंसल्टेंट डायटिशियन नगरमल मोदी सेवा सदन बरियातु, रांची
संतुलित आहार बच्चे के मस्तिष्क पर और स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए बेहद जरूरी हैं. बच्चों के दिन की शुरुआत ओट, उपमा, खिचड़ी, इडली, पोहा आदि से की जा सकती है. इनमें लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है और ये ब्रेन को लगातार गलूकोज प्रदान करते हैं. यदि बच्चों को हेवी मील दे दिया जाये, तो यह बच्चों को सुस्त बना सकता है. थोड़ा-थोड़ा संतुलित आहार बच्चों में लगातार ऊर्जा और पोषण प्रदान करता है. इससे बच्चे सजग और स्फूर्ति से भरे रहेंगे.
आहार में कार्बोहाइड्रेट : कार्बोहाइड्रेट तुरंत पच जाता है, जबकि प्रोटीन का पाचन धीरे-धीरे होता है और यह बच्चों को लगातार ऊर्जा देते रहता है. इसलिए नाश्ते में अंडा, पोहा, इडली, दूध, डोसा, ढोकला इत्यादि को शामिल कर सकते हैं.
यह टायरोसिन (एक तरह का एमिनो एसिड) की मात्रा ब्लड में बढ़ाता है एवं ब्रेन नर्व सेल को बनाता है, जो बच्चों को अलर्ट और एक्टिव रखता है. बच्चे यदि एसी कमरे में पढ़ाई करते हैं, तो उनमें पानी की कमी पायी जाती है. वे जल्दी ही डिहाइडेरेट हो जाते हैं. इससे मस्तिष्क भी जल्दी थक जाता है. अगर वे पानी ज्यादा नहीं पीना चाहते, तो उन्हें नारियल पानी, नीबू पानी, छांछ, फलों का जूस, सब्जी का सूप, सत्तू, ग्रीन टी देकर हाइड्रेट रखा जा सकता है.
परीक्षा के समय स्ट्रेस काफी होता है. इससे निजात दिलाने के लिए शरीर में कुछ जल में घुलनेवाले विटामिन बी और जिंक जैसे मिनरल तत्वों की आवश्यकता होती है. यह विटामिन एवं जिंक स्ट्रेस फाइटिंग एड्रनल हार्मोंस के बनने में एवं उसके कार्य करने में मदद करता है. ये ब्राउन राइस, नट्स, अंडा, ताजे फल एवं सब्जियों में बहुतायात पाये जाते हैं.
एंटीऑक्सिडेंट्स : एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे विटामिन ए, सी और इ ब्रेन सेल्स को नष्ट हाेने से बचाते हैं, क्योंकि ये फ्री रैडिकल से लड़ते हैं और उन्हें खत्म करते हैं. अंडा, मछली, गाजर, कद्दू, कोंहड़ा, हरी पत्तेवाली सब्जियां और ताजे फलों से बच्चों को विटामिन ए, सी और विटामिन इ मिलता है.
विटामिन सी के लिए आंवला, टमाटर, पालक साग, कीवी, ब्रोकली एवं स्ट्राबेरी सही मात्रा में विटामिन सी प्रदान करते हैं. जंक फूड जैसे- चाउमीन, पिज्जा, बर्गर, पैक्ड फूड में ट्रांस फैट होता और मैदा, चीनी, सफेद चावल, मीठा पेय पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रहें.
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