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World Tribal Day 2022: आज मनाया जा रहा है आदिवासी दिवस, जानिए इसका इतिहास और इस साल की थीम

Updated at : 09 Aug 2022 7:15 AM (IST)
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World Tribal Day 2022:  आज मनाया जा रहा है आदिवासी दिवस, जानिए इसका इतिहास और इस साल की थीम

World Tribal Day 2022: हर साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रुप में मनाया जाता है. तो चलिए है आखिर क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस और इसके पीछे क्या है इतिहास…..

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World Tribal Day 2022: 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के रूप में पूरी दुनिया में मनाया जाता है। तो आज ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के इस खास अवसर पर आपको विश्व आदिवासी दिन से जुडी जानकारी देते है.तो चलिए है आखिर क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस और इसके पीछे क्या है इतिहास…..

आपको बता दें कि विभिन्न सरकारों और संगठनों द्वारा आदिवासियों के उत्थान के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ आज पूरी दुनिया में आदिवासियों की संख्या घटकर 37 करोड़ के आस पास हो गयी है. यह कहना गलत नहीं होगा की कहीं न कहीं मॉर्डन लोग ही आदिवासियों के अस्तित्व के दुश्मन है. क्योंकि हर साल न जाने कितने पेड़ और जंगल का सफाया किया जाता है सिर्फ अपने फायदे के लिए। लोग इस फायदे में यह भूल जाते हैं की हम आदिवासियों के घर यानी उनके जंगल को नष्ट कर रहे हैं.

विश्व आदिवासी दिवस का इतिहास

इसे पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 1994 में प्राथमिक बैठक के दिन घोषित किया गया था। 1982 में मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण पर संयुक्त राष्ट्र के कार्यकारी दल की आदिवासी आबादी पर संयुक्त राष्ट्र की कार्यकारी पार्टी की पहली बैठक की गयी।

विश्व आदिवासी दिवस 2022 की थीम

कोविड-19 के चलते 2021 में कोई थीम जारी नहीं की गयी. वर्ष 2020 की थीम को पुनः जारी कर दिया गया था. विश्व आदिवासी दिवस 2022 की थीम आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग (डीईएसए) इस वर्ष के विषय पर ध्यान केंद्रित करते हुए, इस वर्ष की थीम “संरक्षण में स्वदेशी महिलाओं की भूमिका और पारंपरिक ज्ञान का प्रसारण ” (“The Role of Indigenous Women in the Preservation and Transmission of Traditional Knowledge”)

झारखंड प्रमुख राज्य

भारत के झारखंड राज्य में 26 फीसदी आबादी आदिवासी है. झारखंड में 32 आदिवासी जनजातियां रहती हैं, जिनमें बिरहोर, पहाड़िया, माल पहाड़िया, कोरबा, बिरजिया, असुर, सबर, खड़िया और बिरजिया जनजाति समूह हैं. देश की आजादी के समय झारखंड में आदिवासी जनजाति के लोगों की संख्या 35 फीसदी के करीब थी, जो कि 2011 की जनगणना के अनुसार, 26 फीसदी रह गई है.

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