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Mahakaleshwar Jyotirlinga:महाकाल के प्रमुख गण के रूप में पूजे जाते है काल भैरव

Updated at : 13 Jul 2024 8:29 PM (IST)
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Ujjain Kaal Bhairav Mandir: History, Myth, and Significance

Ujjain Kaal Bhairav Mandir: History, Myth, and Significance

मध्यप्रदेश के प्राचीन नगर उज्जैन में काल भैरव मंदिर में महाकाल के प्रमुख गण के रूप में पूजे जाते है. लोक मान्यताओं के अनुसार यहां उन्हें मदिरा पान भी कराया जाता है.

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Mahakaleshwar Jyotirlinga, Ujjain: प्रदेश के प्राचीन शहर उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर(Kaal Bhairav Mandir), भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है.

मंदिर की उत्पत्ति आज भी रहस्य में डूबी हुई है, लेकिन माना जाता है कि यह कई शताब्दियों पुराना है, ऐतिहासिक अभिलेखों और शिलालेखों से पता चलता है कि यह 9वीं शताब्दी में परमार वंश के दौरान अस्तित्व में आया था. जो लगभग 6000 साल पुराना बताया जाता है.

काल भैरव की कथा हिंदू पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित है. पुराणों के अनुसार, काल भैरव को भगवान शिव ने अहंकार को नष्ट करने और ब्रह्मांड के क्रम को बनाए रखने के लिए बनाया था. जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है उसे भैरव गढ़ कहा जाता है. भैरव अर्थात भय को हरने वाला.  

कौन है भगवान काल भैरव

The kaal bhairav mandir, ujjain,mp (image source-social media)

एक बार ब्रह्मा विष्णु और शिव जी तीनों देवताओं के बीच एक बहस के दौरान, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने शिव के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की. क्रोध में आकर शिव ने काल भैरव को प्रकट किया, जिन्होंने ब्रह्मा के पांच सिरों में से एक को काट दिया, जो अहंकार का प्रतीक था.इस कृत्य के परिणामस्वरूप, काल भैरव को ब्रह्मा की खोपड़ी ले जाने का श्राप मिला, जिसके कारण वे तब तक भटकते रहे जब तक कि वे पवित्र शहर काशी (वाराणसी) नहीं पहुंच गए, जहां उन्हें श्राप से मुक्ति मिली.

उज्जैन के द्वारपाल है काल भैरव  

उज्जैन में, काल भैरव को संरक्षक देवता द्वारपाल के रूप में पूजा जाता है, जो शहर और उसके निवासियों को बुरी शक्तियों से बचाते हैं.यह मंदिर अनोखा है क्योंकि भक्त देवता को शराब चढ़ाते हैं, ऐसा माना जाता है कि यह प्रथा काल भैरव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए है.

पहले करे काल भैरव के दर्शन  

The kaal bhairav mandir, ujjain,mp (image source-social media)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से पहले काल भैरव मंदिर जाना कई भक्तों के लिए एक प्रथा है. यह परंपरा इस विश्वास पर आधारित है कि महाकालेश्वर की सफल तीर्थयात्रा के लिए उनकी अनुमति और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए, रक्षक के रूप में काल भैरव की पूजा पहले की जानी चाहिए.

इस प्रथा के पीछे कई कारण हैं:

  • स्थानीय लोगों के द्वारा काल भैरव को उज्जैन का संरक्षक माना जाता है.
  • शिव के एक उग्र रूप के रूप में, काल भैरव को उन बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने वाला माना जाता है जो किसी भक्त के मार्ग में बाधा बन सकती हैं
  • यह प्रथा पीढ़ियों से चली आ रही है और तीर्थयात्रा का एक अभिन्न अंग बन गई है. 

काल भैरव कौन थे?

काल भैरव एक देवता हैं, जो विनाश(संहार) और सुरक्षा दोनों का प्रतीक हैं. वे भगवान शिव के सबसे विकराल  रूपों में से एक हैं, जो समय (काल) के विनाशकारी पहलू और बुराई को खत्म करने वाली अथक शक्ति को दर्शाते हैं. भैरव को उनके रौद्र रूप के रूप में दर्शाया जाता है, जिसमें वे त्रिशूल, ढोल और कटा हुआ सिर पकड़े होते हैं, जो बाधाओं को दूर करने वाले और अहंकार को नष्ट करने वाले के रूप में उनकी भूमिका का प्रतीक है.

मदिरा पान करते है काल भैरव

काल भैरव को मदिरा का भोग लगाने की प्रथा यहां बेहद प्राचीन है आज भी लोग यहां अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए भगवान काल भैरव को मदिरा पान कराते है. काल भैरव को शराब चढ़ाने की प्रथा, हालांकि अपरंपरागत है, लेकिन भक्तों का मानना ​​है कि काल भैरव उनके प्रसाद को स्वीकार करते हैं और उन्हें अपना आशीर्वाद देते हैं. ये मंदिर प्राचीन समय से तंत्र विद्या का केंद्र भी रहा है तब यहां पर सिर्फ तांत्रिकों को आने की अनुमती थी. यह एक वाम मार्गी तांत्रिक मंदिर है जहां पर मदिरा का भोग लगाया जाता है.

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Pratishtha Pawar

लेखक के बारे में

By Pratishtha Pawar

मैं लाइफस्टाइल कंटेंट राइटर हूं, मीडिया जगत में 5 साल का अनुभव है. मुझे लाइफस्टाइल, फैशन, ब्यूटी, वेलनेस और आध्यात्मिक विषयों पर आकर्षक और दिलचस्प कंटेंट लिखना पसंद है, जो पाठकों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचा सके.

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