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Heat Wave 2022: हीट वेव का भीषण वार, जलवायु परिवर्तन है जिम्मेदार

Updated at : 04 May 2022 5:51 PM (IST)
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Heat Wave 2022: हीट वेव का भीषण वार, जलवायु परिवर्तन है जिम्मेदार

Heat Wave 2022: उत्तरी भारत के तमाम हिस्सों में फिलहाल लगभग हर कोई इस वक्त एक जानलेवा हीटवेव का अनुभव कर रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि भारत समेत पाकिस्तान में भी जानलेवा हीटवेव तैयार हो रही है. ये वो इलाका है जहां दुनिया के हर पांच में से एक व्यक्ति गुजर-बसर करता है.

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Heat Wave 2022: पाकिस्तान के जैकबाबाद में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने का अनुमान है. यह धरती के सबसे गर्म स्थानों में से एक माने जाने वाले इस शहर में गर्मी के सर्वकालिक उच्चतम स्तर के नजदीक पहुंच रहा है. भारत की राजधानी दिल्ली भी 44-45 डिग्री सेल्सियस की तपिश से बेहाल है और यह अब तक के सबसे गर्म अप्रैल के आसपास ही है. वहीं, भारत के उत्तरी इलाकों के कुछ हिस्सों में पारा 46 डिग्री तक पहुंच सकता है. हीटवेव से जुड़ी चेतावनियां जारी की जा रही हैं. जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि साल के शुरुआती महीनों में ही इतनी प्रचंड गर्मी खासतौर पर खतरनाक है.

हीटवेव का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से

पर्यावरण वैज्ञानिकों के एक ताजा विश्लेषण के मुताबिक हीटवेव का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है. इंपीरियल कॉलेज लंदन की डॉक्टर मरियम जकरिया और डॉक्टर फ्रेडरिक ओटो ने पाया कि इस महीने के शुरू से ही भारत में जिस तरह की तपिश पड़ रही है, वह पहले ही एक आम बात हो चुकी है क्योंकि इंसान की गतिविधियों की वजह से वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है.

हर 4 साल में एक बार ऐसी भयंकर तपिश से होगा सामना

इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रंथम इंस्टीट्यूट में रिसर्च एसोसिएट डॉक्टर मरियम ने कहा “भारत में हाल के महीनों में तापमान में हुई बढ़ोत्तरी का बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है. वैश्विक तापमान में वृद्धि में इंसान की गतिविधियों की भूमिका बढ़ने से पहले हम भारत में 50 वर्ष में कहीं एक बार ऐसी गर्मी महसूस करते थे, जैसे कि इस महीने के शुरू से ही पड़ रही है लेकिन अब यह एक सामान्य सी बात हो गई है. अब हम हर 4 साल में एक बार ऐसी भयंकर तपिश की उम्मीद कर सकते हैं और जब तक प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन पर रोक नहीं लगाई जाएगी तब तक यह और भी आम होती जाएगी.”

इंसान की नुकसानदेह गतिविधियों की वजह से है भारत में मौजूदा हीटवेव

इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रंथम इंस्टिट्यूट में जलवायु विज्ञान के सीनियर लेक्चरर डॉक्टर फ्रेडरिक ओटो ने कहा “भारत में मौजूदा हीटवेव जलवायु परिवर्तन की वजह से और भी गर्म हो गई है. ऐसा इंसान की नुकसानदेह गतिविधियों की वजह से हुआ है. इनमें कोयला तथा अन्य जीवाश्म ईंधन का जलाया जाना भी शामिल है. अब दुनिया में हर जगह हर हीटवेव के लिए यही मामला होता जा रहा है. जब तक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बंद नहीं होगा, तब तक भारत तथा अन्य स्थानों पर हीटवेव और भी ज्यादा गर्म तथा और अधिक खतरनाक होती जाएगी.” डॉक्टर फ्रेडरिक ओटो वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन ग्रुप के नेतृत्वकर्ता हैं और टाइम मैगजीन ने वर्ष 2021 के सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों में उन्हें नामित किया था.

2015 की जानलेवा हीटवेव के दौरान नई दिल्ली हवाई अड्डे पर अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस था

जिन तापमानों का पूर्वानुमान लगाया गया है वह मई-जून 2015 में भारत और पाकिस्तान में बड़ी जानलेवा हीटवेव के जैसे ही हैं, जिनमें कम से कम 4500 लोगों की मौत हुई थी. जून 2015 की जानलेवा हीटवेव के दौरान नई दिल्ली हवाई अड्डे पर अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था. वहीं उड़ीसा के झाड़सुगुड़ा में पारा 49.4 डिग्री सेल्सियस के सर्वोच्च स्तर पर जा पहुंचा था. पाकिस्तान के कराची में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था. वहीं, बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों के अन्य कुछ शहरों में पारा 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.

मार्च का महीना पिछले 122 सालों के दौरान सबसे गर्म मार्च रहा

भारत में गुजरा मार्च का महीना पिछले 122 सालों के दौरान सबसे गर्म मार्च रहा. इस अप्रत्याशित गर्मी की वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में गेहूं के उत्पादन में 10 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई. भारत के कुछ विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न भीषण गर्मी से लोगों को राहत दिलाने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत पर भी जोर दे रहे हैं.

तपिश के चरम अब भविष्य के खतरे नहीं बल्कि नियमित आपदा बन चुके हैं

गुजरात इंस्टिट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर और कार्यक्रम प्रबंधक डॉक्टर अभियंत तिवारी ने कहा “न्यूनीकरण संबंधी कदम उठाते वक्त भविष्य की वार्मिंग को सीमित करना बहुत आवश्यक है. तपिश के चरम, बार-बार और लंबे वक्त तक चलने वाले दौर अब भविष्य के खतरे नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एक नियमित आपदा बन चुके हैं और अब उन्हें टाला नहीं जा सकता.” “गर्मी से निपटने की हमारी कार्य योजनाओं में अनुकूलन के उपायों को भी सुनिश्चित करना आवश्यक होगा. जैसे कि जन अवशीतलन क्षेत्र, निर्बाध बिजली आपूर्ति की सुनिश्चितता, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता और सर्वाधिक जोखिम वाले वर्ग में आने वाले श्रमिकों के काम के घंटों में विशेषकर अत्यधिक तपिश वाले दिनों में बदलाव किया जाना चाहिए.”

भारत के 1000 शहरों के लिए अगले 5 वर्षों तक का पूर्वानुमान जारी होगा

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ गांधीनगर के निदेशक डॉक्टर दिलीप मावलंकर ने कहा “भारतीय मौसम विभाग भारत के 1000 शहरों के लिए अगले 5 वर्षों तक की अवधि में पूर्वानुमान परामर्श जारी कर रहा है. अहमदाबाद ऑरेंज अलर्ट वाले जोन में है और यहां तापमान 43-44 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है और इसमें वृद्धि भी हो सकती है.” उन्होंने कहा “लोगों को इन परामर्श पर गौर करने की जरूरत है. घर के अंदर रहें, खुद को जल संतृप्त रखें और गर्मी से संबंधित बीमारी के सामान्य लक्षण महसूस करने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं. खास तौर पर बुजुर्गों और कमजोर वर्गों का ध्यान रखें, जैसा कि हमने कोविड-19 महामारी के दौरान रखा था, क्योंकि इन लोगों को घर के अंदर बैठे रहने पर भी हीट स्ट्रोक का असर हो सकता है.”

गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा रखना जरूरी

नगरों को रोजाना विभिन्न कारणों से होने वाली मौतों के आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए. खासकर अस्पतालों में दाखिल किए जाने वाले मरीज और एंबुलेंस को की जाने वाली कॉल के डाटा पर ध्यान देना चाहिए ताकि पिछले 5 वर्षों के डाटा से उसका मिलान किया जा सके और मृत्यु दर पर गर्मी के असर के वास्तविक संकेत को देखा जा सके.

अलर्ट जारी कर लोगों को बचाया जा सकता है

“यह बहुत ही जल्दी आई हीटवेव है और इनकी वजह से मृत्यु दर भी आमतौर पर ज्यादा होती है क्योंकि मार्च और अप्रैल के महीनों में लोगों का गर्मी के प्रति अनुकूलन कम होता है और वे एकाएक तपिश को सहन करने के लिए तैयार नहीं होते. केंद्र और राज्य तथा नगरों की सरकारों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए. खासतौर पर जब मौसम विभाग के अलर्ट ऑरेंज और रेड जोन की घोषणा करें तो उन्हें इस बारे में अखबारों में विज्ञापन के तौर पर चेतावनी प्रकाशित करानी चाहिए. इसके अलावा टेलीविजन और रेडियो के माध्यम से भी जनता को आगाह किया जाना चाहिए. यह एक चेतावनी भरा संकेत है कि आगामी मई और जून में क्या होने वाला है. अगर हम अभी से प्रभावी कदम उठाते हैं तो हम बड़ी संख्या में लोगों को बीमार होने और मरने से बचा सकते हैं.”

स्कूली बच्चों को गर्मी से बचाने के उपाय कर रहीं राज्य सरकारें

पश्चिम बंगाल में स्थानीय सरकार ने स्कूलों को यह सलाह दी है कि वे जल्द सुबह कक्षाएं शुरू करें और रिहाइड्रेशन साल्ट्स की व्यवस्था करें ताकि अगर कोई बच्चा बीमार हो जाए तो उसका समुचित उपचार हो सके. राज्य के कुछ स्कूलों ने तो ऑनलाइन क्लास शुरु कर दी है ताकि बच्चों को भयंकर तपिश में स्कूल ना आना पड़े. इसी बीच, उड़ीसा में उच्च शिक्षा की कक्षाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है .

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प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन की वजह से तापमान और भी ज्यादा बढ़ेगा

जहां दक्षिण एशिया में इस हफ्ते तापमान के सर्वाधिक चरम पर पहुंच जाने की आशंका है, वहीं यह भी सत्य है कि सिर्फ यह उपमहाद्वीप ही इस वक्त ऐसी भयंकर गर्मी से नहीं जूझ रहा है. अर्जेंटीना और पराग्वे में भी तपिश अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है. पराग्वे में आज तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है. वहीं, चीन में 38 डिग्री और तुर्की तथा साइप्रस में 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने की संभावना है. जैसे-जैसे प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन की वजह से तापमान और भी ज्यादा बढ़ेगा, खतरनाक तपिश और भी ज्यादा सामान्य बात होती जाएगी.

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