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SIR में मान्य नहीं होंगे 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्र, जानें क्यों

1 Jan, 2026 8:06 pm
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OBC Certificate Not Valid For SIR Hearing Election Commission of India Calcutta High Court

बंगाल में 2010 के बाद जारी ओबीसी सर्टिफिकेट एसआईआर के लिए मान्य नहीं.

OBC Certificate Not Valid For SIR Hearing: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले मतदाता शुद्धिकरण के लिए जारी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) की शुरुआत के बाद से ही विवाद जारी है. एसआईआर की प्रक्रिया को विवादित बनाने के विपक्ष के आरोपों के बीच एक ऐसा निर्देश चुनाव आयोग ने जारी किया है, जिससे बंगाल की राजनीति में नया उबाल आने की आशंका है.

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OBC Certificate Not Valid For SIR Hearing: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान वर्ष 2010 के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों को पहचान के सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जायेगा. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है. यह स्पष्टीकरण उस आदेश के बाद आया है, जिसमें 24 दिसंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा था कि क्या ऐसे ओबीसी प्रमाणपत्रों को विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में मान्य दस्तावेज माना जायेगा.

एसआईआर से जुड़े अधिकारियों को चुनाव आयोग का सख्त निर्देश

आयोग ने साफ किया है कि किसी भी स्थिति में वर्ष 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों का उपयोग पहचान के लिए नहीं किया जायेगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ पश्चिम बंगाल) कार्यालय के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस निर्देश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है. किसी भी स्तर पर उल्लंघन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी.

  • ओबीसी प्रमाणपत्र की मान्यता के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा था जवाब
  • 22 मई 2025 को हाइकोर्ट ने 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करने का दिया था आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करने का दिया था आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 मई 2025 को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वर्ष 2010 के बाद जारी सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया था. भविष्य में किसी भी उद्देश्य के लिए उनके उपयोग पर रोक भी लगा दी थी. इसी फैसले के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पश्चिम बंगाल इकाई ने अदालत का रुख किया था और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में ऐसे प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल पर आपत्ति जतायी थी.

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OBC Certificate Not Valid For SIR Hearing: पहचान के प्रमाण में शामिल है ओबीसी प्रमाणपत्र

निर्वाचन आयोग ने बताया है कि पहचान के प्रमाण के रूप में कुल 13 दस्तावेज निर्धारित किये गये हैं, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्र भी शामिल हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्र अब इस श्रेणी में मान्य नहीं रहेंगे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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