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कैमूर के गोबिंद भोग चावल हैं खास, अयोध्या में इससे रामलला को लगता है भोग

Updated at : 14 Mar 2023 12:57 AM (IST)
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कैमूर के गोबिंद भोग चावल हैं खास, अयोध्या में इससे रामलला को लगता है भोग

अयोध्या में रामलला के भोग में प्रयुक्त होने के बाद जहां क्षेत्र के किसानों सहित कैमूर जिले के लोग हर वर्ष इसे समय पर अयोध्या भेजने को लेकर खासे उत्साहित रहते हैं. इसमें 2023 का चावल भेजने को लेकर तैयारी की जा रही है.

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कैमूर के गोबिंद भोग चावल से पिछले चार वर्षों से अयोध्या में रामलला भोग लगा रहे हैं. कैमूर जिले के मोकरी गांव के गोबिंद भोग चावल की खास पहचान है. गोबिंद भोग चावल की खासियत है कि यह चावल आकर में छोटा और काफी सुगंधित होता है. पटना महावीर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुणाल की पहल पर 2019 में इसकी शुरूआत हुई थी. गाैरतलब है कि कैमूर जिले के मोकरी गांव के गोबिंद भोग चावल की मांग बिहार ही नहीं देश-विदेश तक है. धान के कटोरा कहे जाने वाले कैमूर जिले में किसान धान के खेती पर निर्भर हैं. यहां भारी मात्रा में किसान धान की खेती करते हैं. जिले में प्रतिवर्ष कुल धान की उपज 6.5 लाख मीटरिक टन है, जिसमें सोनाचूर, गोबिंद भोग, मंसूरी आदि के साथ कतरनी चावल की कई वैराइटियां शामिल हैं.

मुंडेश्वरी मंदिर से बरसात का पानी पहुंचता है मोकरी, इसलिए सुगंधित होता है गोबिंद भोग चावल

ऐसी मान्यता है कि कैमूर के पवरा पहाड़ी पर स्थित माता मुंडेश्वरी मंदिर है, जहां बरसात में पहाड़ी से होकर पानी मोकरी गांव पहुंचता है. इससे खेतों की मिट्टी में पवरा पहाड़ी पर मौजूद औषधियों का अंश यहां की मिट्टी में घुल कर मिट्टी को खास व मुलायम बना देता है, जिससे गोबिंद भोज चावल खास स्वाद व औषधीय गुणों के साथ सुगंधित हो जाता है. पहाड़ी के नीचे बसे मोकरी गांव में वर्षों से कतरनी व गोबिंद भोग चावल उपजाये जाते हैं, जिसकी मांग देश के साथ साथ विदेशों में भी है. जबकि, एक खास सीमित क्षेत्र में ही इसकी खेती होने के कारण गोबिंद भोग चावल दुर्लभ हो जाता है. वहीं, अयोध्या में रामलला के भोग में प्रयुक्त होने के बाद जहां क्षेत्र के किसानों सहित जिले के लोग हर वर्ष इसे समय पर अयोध्या भेजने को लेकर खासे उत्साहित रहते हैं. इसमें 2023 का चावल भेजने को लेकर तैयारी की जा रही है.

अयोध्या में अब तक भेजे गये गोबिंद भोग चावल

2019 में पहला वर्ष – 25 टन

2020 में दूसरा वर्ष – 25 टन

2021 में तीसरा वर्ष – 25 टन

2022 में चौथा वर्ष – 25 टन

मोकरी गांव के किसानों में खुशी

  • मोकरी के श्रीगौश जी राइस मिल मालिक नारद सिंह ने बताया कि अयोध्या में श्रीरामलला को भोग लगाने के लिए 2019 में पहली बार ऑर्डर आया था. पटना महावीर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने 60 क्विंटल गोबिंद भोग चावल मंगवाया था, उसी साल से लगातार मोकरी का सुगंधित गोबिंद भोग चावल अयोध्या भेजा जाने लगा, जो हमारी परंपरा बन गयी है. इस वर्ष चावल नहीं गया है, ऑर्डर आने पर भेजा जायेगा.

  • मोकरी गांव के किसान जय शंकर बिहारी सह मोकरी पंचायत के पूर्व मुखिया बताते है कि गांव के किसानों में काफी गर्व व खुशी है कि गांव के खेतों में उपजे गोबिंद भोग चावल से अयोध्या में रामलला को भोग लगता है. बिहार सरकार किसानों की समस्या को दूर कर दे, तो गांव सहित आसपास के गावों में भारी मात्रा में गोबिंद भोग चावल का उत्पादन हो सकता है और देश के हर थाली में गोबिंद भोग चावल उपलब्ध होगा.

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जिला कृषि पदाधिकारी गोबिंद भोग के बारे में अंजान

जिला कृषि पदाधिकारी रेवती रमन देश के प्रसिद्ध चावल गोबिंद भोग के बारे में अंजान हैं. जिले के मोकरी गांव के चावल गोबिंद भोग से अयोध्या में रामलला काे भोग लगाया जाता है. देश के कोने-कोने में कैमूर जिले के मोकरी गांव का चावल मशहूर है. वहीं, किसानों को हौसला देने के बजाय जिला कृषि पदाधिकारी अंजान दिखे.

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