जरूरी है ऑफलाइन शॉपिंग को बढ़ावा देना
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offline shopping : ऑफलाइन शॉपिंग केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री का माध्यम नहीं है, यह लाखों लोगों की आजीविका का आधार भी है. हमारे शहरों, कस्बों और गांवों में हजारों छोटे दुकानदार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शोरूम, रिटेल स्टोर और सेवा प्रदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर रहते हैं.
Offline shopping : इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग ने लोगों के जीवन को पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक बना दिया है. इसका एक परिणाम ऑनलाइन शॉपिंग भी है. ऑनलाइन शॉपिंग ने समय की बचत, घर तक डिलीवरी और विभिन्न प्रकार के ऑफर्स जैसी सुविधाएं प्रदान की हैं, पर इसके साथ यह भी आवश्यक है कि हम इसके दूसरे पक्ष को समझें और स्थानीय व्यापार तथा ऑफलाइन शॉपिंग के महत्व को न भूलें.
ऑफलाइन शॉपिंग केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री का माध्यम नहीं है, यह लाखों लोगों की आजीविका का आधार भी है. हमारे शहरों, कस्बों और गांवों में हजारों छोटे दुकानदार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शोरूम, रिटेल स्टोर और सेवा प्रदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर रहते हैं. जब लोग स्थानीय दुकानों से खरीदारी करते हैं, तो उस धन का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही बना रहता है, जिससे व्यापार, रोजगार और विकास को बढ़ावा मिलता है.
भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में खुदरा व्यापार रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. भारत का रिटेल सेक्टर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 10 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है तथा लगभग आठ प्रतिशत रोजगार का आधार है. भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिटेल बाजार माना जाता है. लाखों लोग दुकानों, मॉल, शोरूम, गोदामों, परिवहन सेवाओं और संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत हैं. एक छोटी-सी दुकान भी कई परिवारों की आय का स्रोत हो सकती है. फरवरी, 2026 तक देश में 7.86 करोड़ से अधिक एमएसएमइ इकाइयां पंजीकृत थी, जिनसे लगभग 34.63 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ था.
स्थानीय दुकानदार और छोटे व्यापार इसी विशाल रोजगार तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. विश्व बैंक के अनुसार, भारत का एमएसएमइ क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत तथा निर्यात में 40 प्रतिशत का योगदान देता है और 15 से 18 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है, पर बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. बड़े इ-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भारी छूट, आकर्षक ऑफर्स और तेज डिलीवरी के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित करते हैं. इससे उपभोक्ताओं को अल्पकालिक लाभ अवश्य मिलता है, पर कई छोटे व्यापारियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जाता है. परिणामस्वरूप, उनकी बिक्री प्रभावित होती है और कई बार व्यवसाय बंद होने की स्थिति तक पहुंच जाता है. इसका प्रभाव केवल दुकान के मालिक तक सीमित नहीं रहता, उससे जुड़े कर्मचारी, आपूर्तिकर्ताओं के व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है.
यदि बड़ी संख्या में छोटे व्यवसाय प्रभावित होते हैं, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है. रोजगार के अवसर कम होने से कई परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार 2025 में असंगठित व्यापार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में रोजगार बढ़कर 12.81 करोड़ तक पहुंच गया. वहीं देश के कुल कार्यबल का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा असंगठित क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें किराना दुकानें, छोटे रिटेल स्टोर, सड़क किनारे व्यवसाय और अन्य स्थानीय व्यापार प्रमुख भूमिका निभाते हैं.
इसके अतिरिक्त, 2025 में भारत के असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र में प्रतिष्ठानों की संख्या 7.92 करोड़ तक पहुंच गयी, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आठ प्रतिशत अधिक है. मजबूत स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्याप्त रोजगार समाज की स्थिरता व विकास में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं. इसलिए स्थानीय व्यवसायों का समर्थन आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऑफलाइन शॉपिंग के कई ऐसे लाभ हैं, जो ऑनलाइन खरीदारी में हमेशा उपलब्ध नहीं होते. जब ग्राहक किसी दुकान पर जाकर उत्पाद खरीदते हैं, तो वे वस्तु को स्वयं देख सकते हैं, उसकी गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सही विकल्प चुन सकते हैं. स्थानीय दुकानदार अपने ग्राहकों को व्यक्तिगत सेवा भी प्रदान करते हैं. कई बार ग्राहक और दुकानदार के बीच वर्षों पुराना विश्वास और संबंध विकसित हो जाता है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में संभव नहीं होता.
झारखंड में लाखों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम रोजगार सृजन का आधार हैं. राज्य सरकार की विभिन्न औद्योगिक एवं एमएसएमइ नीतियां स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं. वहीं संताल परगना, कोल्हान और उत्तरी छोटानागपुर जैसे क्षेत्रों में खुदरा व्यापार ग्रामीण और अर्ध शहरी रोजगार का प्रमुख स्रोत है. स्थानीय बाजारों में हजारों छोटे व्यापारी, परिवहन कर्मी और सेवा प्रदाता प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं. स्थानीय व्यवसाय अक्सर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी योगदान देते हैं. स्थानीय स्तर पर खरीदारी करने से पैकेजिंग और परिवहन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को भी कम किया जा सकता है. विश्वभर में स्थानीय अर्थव्यवस्था पर हुए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि स्थानीय दुकानों पर खर्च किया गया धन बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की तुलना में अधिक मात्रा में स्थानीय समुदाय में ही पुनः निवेश होता है, जिससे रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा मिलता है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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