मैं भी आम आदमी हूं, इसीलिए अकेले घूमता हूं" बिना सुरक्षा प्रोजेक्ट भवन पहुंचने पर बोले CM हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
Hemant Soren: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को बिना किसी तामझाम और सुरक्षा काफिले के प्रोजेक्ट भवन पहुंचकर सबको हैरान कर दियाा. पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि "मैं भी आम आदमी हूं", इसलिए जमीनी हकीकत जानने के लिए अकेला निकला. इसी दौरान सीएम ने शहीद पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए 'दिशोम गुरु शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय' को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की घोषणा की.
Hemant Soren, रांची, (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को अपनी सादगी और संवेदनशीलता से एक बार फिर सबको प्रभावित किया. वे बिना किसी सुरक्षा काफिले और कारकेड के प्रोजेक्ट भवन (मंत्रालय) पहुंचे गए. जब इससे लेकर पत्रकारों ने उनके इस औचक दौरे पर सवाल किया, तो मुख्यमंत्री ने सहज भाव से उत्तर दिया. उन्होंने कहा, “मैं भी एक आम आदमी हूं और आम आदमी ही सरकार में जाते हैं. एक आम नागरिक के नाते मेरा अपना दायित्व है और सरकार के मुखिया के नाते भी एक जिम्मेदारी है. व्यवस्था की हकीकत को महसूस करने के लिए ही आज मैं अकेले सड़क पर निकला.”
सीएम के आगमन से मचा हड़कंप, सुरक्षा व्यवस्था हुई टाइट
मुख्यमंत्री के अचानक बिना लाव-लश्कर के मंत्रालय पहुंचने की खबर जैसे ही फैली, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के एसपी समेत तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी आनन-फानन में प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को पुन: व्यवस्थित किया. हालांकि, मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान व्यवस्था की जमीनी पड़ताल और कर्मचारियों की कार्यक्षमता का आकलन करने पर था.
शहीद जवानों के बच्चों के लिए ‘दिशोम गुरु आवासीय विद्यालय’
प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल की घोषणा की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय’ को ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करेगी. यह विद्यालय विशेष रूप से उन शहीद जवानों के बच्चों के लिए होगा, जिन्होंने देश और राज्य की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शहीद जवानों के बच्चों को एक ऐसा समान वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी अभाव के उच्च स्तर की शिक्षा-दीक्षा हासिल कर सकें.
मेहनतकश परिवारों के प्रति सम्मान
मुख्यमंत्री ने पुलिस संवर्ग की चुनौतियों का जिक्र करते हुए एक मार्मिक बात कही. उन्होंने कहा, “पुलिस और सेना की नौकरियों में अक्सर बहुत ही मेहनतकश और साधारण परिवार के नौजवान शामिल होते हैं. शायद ही कभी आपने देखा होगा कि किसी पूंजीपति घराने का बच्चा सेना में सीमा पर तैनात हो या पुलिस में भर्ती होकर जान हथेली पर लेकर चले. जब कोई जवान शहीद होता है, तो उसके परिवार पर क्या गुजरती है, यह हम सभी जानते हैं.” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसी दर्द को समझते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि शहीदों के बच्चों की शिक्षा का पूरा दायित्व सरकार उठाएगी.
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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